A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life”

Wednesday, March 7 2018

A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life”

Home | A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life” A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life” March 7, 2018 Camps / Workshops / Seminars Comments Off on A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life” On 23 rd February a National Seminar on “ Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary life ” was organized jointly by the Department of Yoga and Health, the Centre for Scientific Spirituality Studies and ICPR (Indian Council of Philosophical Research) at (DSVV). Students from different universities of the country including DSVV, Gurukul Kangri University, Patanjli University, Uttarakhand Sanskrit University , etc. attended the Seminar. The program began with the enkindling of the lamp jointly by Mr. Rajneesh Kumar Shukla, the chief Guest of the program and the honorable Secretary of ICPR, and Dr. Chinmay Pandya , the Pro-Vice Chancellor of DSVV. Presiding over the program, Hon’ble Pro-Vice Chancellor, Dr. Chinmay Pandya , said that the seminar was held to assimilate critical thinking. The present time is different from the ancient times. Enemy in olden days was without and declared, while today, it is within and has penetrated into our ideas, character and lifestyle, with which we have to struggle, continuously, throughout the day. It is much like the inner battle of Dev-Asur (Gods and Demons). It is only when we dive deep into the Vedic Knowledge, Upanishads and other books of our culture with faith that we find a solution to this problem. Read More... Hon’ble Chief Guest, Mr. Rajneesh Kumar Shukla , the Secretary, ICPR said that there is no peace today despite so much development of science and technology. This is because we have totally neglected the fundamental elements of Vedic knowledge, Vedic Science, Shastras and our culture. It is really necessary for us to make them a part of our life with intense-contemplation and mutual discussion. The is performing this task very well. Mr. Shukla said that India has never fought a battle for the expansion of its empire, but to uproot evil powers and to safeguard our divine culture and religion. Vedic knowledge is one of the traditions of holistic knowledge in which all contradictions dissolve. We find complete solution to today’s problems and challenges vested in them. Honorable Shri Sharad Pardhy said that Vedas are not just Volumes or books, but are also a symbol of knowledge that reveal in the pure heart making our thoughts, character and behavior pure and intense. The welcoming speech of the program was delivered by Dr. Suresh Lal Baranwal , the Head of the Department of Yoga and Health. Dr. Jaidev Vedalankar , in the second session of the Seminar, described the importance of the Vedas highlighting the eternal concept of Vedic knowledge. He also spoke about the congregations of the Universe described in the Vedas, mathematical experiments of the Vedas, mathematical astrology, planetary conditions and calculation of solar years. Researcher Lokesh Chaudhary presented his views on ‘ Elements of Yoga from Yajur Veda ’ while Researcher Rohit Kumar spoke on ‘ Environment from the Vedas ’. Dr. Govind Prasad Mishra from the University of Patanjali, and Dr. Indu Sharma presented their views on ‘ Religion and Sects inherent in Yoga ’ and ‘ Education in Vedas ’, respectively. On this occasion, an e-processing of Research papers by a Researcher was also released. The program was attended by Dr. Ishwar Bharadwaj , the Head of the Yoga Department of Gurukul Kangri University, Prof. Sukhanandan Singh, Dr. Gyanendra Pandey, Dr. Vandana Srivastava, Dr. Piyush Trivedi , teachers, researchers, and students from different universities. Vote of thanks was extended by Dr. Piyush Dwivedi. 23 फरवरी को में योग विभाग, वैज्ञानिक अध्यात्मवाद विभाग व आईसीपीआर (इण्डियन काउन्सिल आॅफ फिलोसफिकल रिसर्च) के संयुक्त तत्वावधान से ‘वैदिक ज्ञान (Vedic Knowledge), सांस्कृतिक विरासत एवं समकालीन जीवन‘ विषय पर ‘राष्ट्रीय संगोष्ठी‘ का शुभारम्भ हुआ। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में , गुरूकुल कांगड़ी वि.वि., पतंजली वि.वि., उत्तराखंड संस्कृति वि.वि., सहित देश के अन्य विश्वविद्यालयों के शोधार्थी, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थिति रहे। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे इंडियन काउन्सिल आॅफ फिलोसफिकल रिसर्च के माननीय सचिव श्री रजनीश कुमार शुक्ला एवं देसंविवि के माननीय प्रति कुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय प्रति कुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि गंभीर चिंतन को आत्मसात करने के लिए हम सब यहाँ एकत्र हुए हैं। वर्तमान समय प्राचीन समय से अलग है, पहले शत्रु बाहर था, घोषित था पर आज वह व्यक्ति के चिंतन, चरित्र एवं जीवनशैली में घुस गया है जिससे हमें चैबीसों घंटे जूझना होता है, यह अंदर के देवासुर संग्राम की तरह है, यदि हम अपनी संस्कृति वैदिक ज्ञान (Vedic Knowledge), उपनिषद् आदि में विश्वास के साथ गहराई से उतरेंगे तो ही इसका समाधान मिलेगा। माननीय मुख्य अतिथि आईसीपीआर के सचिव श्री रजनीश कुमार शुक्ला ने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक के इतने विकास के बावजूद शांति नहीं है क्योंकि हम वैदिक ज्ञान-विज्ञान, शास्त्र, संस्कृति आदि के मूल तत्व को भूल बैठे हैं, वर्तमान समय में इन विषयों पर गहन-चिंतन, चर्चा-परिचर्चा के साथ इसे अपने जीवन का अंग बनाने की आवश्यकता है। इस कार्य को बखूबी निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध कभी भी अपने सम्राज्य के विस्तार के लिए नहीं लड़ा, वरन सदैव आसुरी अक्षेदन, देव संस्कृति एवं धर्म की रक्षा के लिए ही युद्ध हुआ। वैदिक ज्ञान समग्र ज्ञान की परंपरा है जिसमें सारे विरोधाभास तिरोहित हो जाते हैं। आज की समस्याओं, चुनौतियों का पूर्व समाधान इसमें निहित है। देसंविवि के माननीय कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि वेद सिर्फ ग्रंथ या किताब नहीं है यह ज्ञान का प्रतीक भी है जो शुद्ध निर्मल हदय में प्रकट होता है और व्यक्ति के चिंतन-चरित्र एवं व्यवहार को पवित्र एवं प्रखर बनाता है। कार्यक्रम के आरंभ में ही अतिथियों का स्वागत योग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश लाल बर्णवाल के माध्यम से हुआ। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में वेदो की महत्ता के बारे बताते हुए डाॅ जयदेव वेदालंकार ने वैदिक ज्ञान-विज्ञान की सनातन अवधारणा पर प्रकाश डाला। वेदो में उल्लेख ब्रह्माण के मण्डलों, वेदों के गणितीय प्रयोग, गणितीय ज्योतिष, ग्रहों की स्थिति एवं सौर वर्षों की गणना के विषय में भी बताया। शोधार्थी लोकेश चैधरी ने यजुर्वेद में वर्णित योग के तत्व, रोहित कुमार ने वेदों में पर्यावरण, पतंजलि विश्वविद्यालय से आये डाॅ. गोविन्द प्रसाद मिश्र ने योग में निहित धर्म सम्प्रदाय, डाॅ. इन्दु शर्मा ने वेदों में शिक्षण विषय पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर शोधार्थी के शोधपत्र की ई प्रोसिडिग का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में गुरूकुल कांगड़ी विवि के योग विभागाध्यक्ष डाॅ. ईश्वर भारद्वाज, प्रो. सुखनन्दन सिंह, डाॅ. ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, डाॅ. वन्दना श्रीवास्तव, डाॅ. पीयूष त्रिवेदी, विभिन्न विवि से आए शिक्षक, शोधार्थी, एवं देसंविवि के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. पीयूष द्विवेदी ने किया।