National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication”

Wednesday, March 7 2018

National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication”

Home | National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication” National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication” March 7, 2018 Camps / Workshops / Seminars Comments Off on National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication” A two day National Seminar on “ Indian Language, Literature and Mass Communication ” and a Student Study Tour were inaugurated jointly by the Central Hindi Directorate , Higher Education Department, Human Resource Development Ministry, New Delhi and the (DSVV) . The seminar was organized free of charge in which students from National Institute of Culture, Dev Prayag , Gurukul Kangri University, Haridwar , Uttarakhand Sanskrit University, DSVV and from seven other universities participated. The objective of the program was to promote Hindi language. The program on Indian Language began with the enkindling of the lamp by the Chief Guest and the Honorable Shri Sharad Pardhy . Guiding the youth, he said that instead of looking in the outside world, we should promote and spread our own culture for which promotion of Hindi is the easiest medium. We must be proud of our culture. The responsibility of maintaining the beauty and structure of our language is ours and we must carry this out honestly, said the Vice Chancellor. The Director of Central Hindi Directorate, Mrs. Gandhari , apprised the students of various activities being run by the Centre to promote Hindi. Read More... Dr. Narendra Pratap Singh , the coordinator of the Centre of Hindi (Indian Language) in DSVV, spoke that Hindi is the only language which unites everyone. Out of the total population of India of 125 crores, almost 90 crores understand Hindi. There are approximately 6000 languages ​​in the world, of which around 3000 ​​resemble Hindi. Speaking on the topic, Professor Abhay Saxena , the Dean of the University, said that language is a bridge that connects everyone. Professor Suresh Barnwal , spoke about the life of Revered Master Pandit Shriram Sharma Acharya and said that the Master’s entire life was dedicated to literature. Acharya Shree considered Hindi as the only language of the common masses, because of which he wrote more than 3200 books in Hindi. In the next phase of the program, Shri Virendra Singh , the Hindi lecturer from the Sanskrit Institute, Dev Prayag , said that language is a simplest means of expressing thoughts. Words are the only enemies or friends of a human being. Hindi (Indian Language), he said, has the ability to express ideas with much simplicity. Expressing his concern, Mr. Singh said that due to the changing nature of the present time, it is necessary to look into the fact that today we are paralyzing literature and poetry. Hindi is variable in nature; that is its beauty, he further said. Thereafter, other researchers from various universities presented their views. Shri Pankaj Kumar of the National Sanskrit Institute spoke on ‘ Communication Revolution in Young India ‘, Ms. Mona Sharma of Gurukul Kangri University presented her views on ‘ Utility of Hindi in the Advertising World ‘, and Ms. Artee from Uttarakhand University expressed on ‘ Development of Hindi in Mass Communication ‘. Besides this, various researchers presented their research papers on their subjects. Students were taken for a trip around DSVV campus and other areas of Haridwar . The entire program was conducted under the guidance of Dr. Narendra Pratap Singh. केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली एवं के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं छात्र अध्ययन यात्रा का शुभारम्भ हुआ। यह दो दिवसीय संगोष्ठी भारतीय भाषा (Indian Language), साहित्य और जनसंचार विषय पर निःशुल्क आयोजित की गई। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में राष्ट्रीय संस्कृति संस्थान देव प्रयाग, गुरूकुल कांगड़ी हरिद्वार, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं समेत सात अन्य विश्वविद्यालय से आए छा़़़त्र-छात्राआंे ने प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार रहा। देसंविवि के माननीय कुलपति श्री शरद पारधी जी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया। उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि हमें कहीं बाहर न देख कर अपनी ही संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहिए, हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार ही इसका सबसे सरल माध्यम है, हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के सौंदर्य और संरचना को संभाल कर रखने कि जिम्मेदारी हमारी है और इसे हमें निष्ठापूर्वक निभाना होगा। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय कि निदेशिका श्रीमति गांधारी जी ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न गतिविधियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया। देसंविवि के हिन्दी केन्द्र के समन्वयक डाॅ. नरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिन्दी ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो सबको एक सूत्र में पिरोती है। भारत के 125 करोड़ लोगों में से लगभग 90 करोड़ को हिन्दी समझ आती हैं। विश्व में कुल लगभग 6000 कुल भाषाऐं हैं जिनमें 3000 भाषाएँ हिन्दी से मिलती-जुलती है । देसंविवि के सह संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर अभय सक्सेना ने भाषा के विषय में बताते हुए कहा कि भाषा वह कड़ी है जो सभी को जोड़ती है। प्रोफेसर सुरेश वर्णवाल ने आर्चाय पंडित श्रीराम शर्मा के जीवन के विषय में बताते हुए कहा कि आचार्य जी का संपूर्ण जीवन ही साहित्य को समर्पित रहा। आचार्यश्री हिन्दी को ही जनसमान्य कि भाषा मानते थे जिस कारण 3200 से अधिक पुस्तकें उन्होंने हिन्दी भाषा में ही लिखीं। कार्यक्रम के अगले चरण में संस्कृत संस्थान देव प्रयाग से आए हिन्दी के प्रवक्ता श्री वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि भाषा, विचारों को व्यक्त करने का सबसे सरल माध्यम है, शब्द ही मनुष्य के शत्रु एवं मि़त्र हैं, उन्होंने कहा कि हिन्दी एक मात्र ऐसी भाषा है जो भावों को सरलता से व्यक्त करती है, श्री वीरेन्द्र सिंह ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते स्वरूप कि वजह से आज हम साहित्य एवं कविताओं कि टांग तोड़ते जा रहे हैं इस पर गौर करने कि आवश्यकता है, साथ ही उन्होंने कहा कि हिन्दी परिवर्तनशील है और यही उसकी सुंदरता है। इसके उपरान्त विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने अपने विषयों पर प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्री पंकज कुमार ने ‘युवा भारत में संचार क्रांति‘, गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय कि सुश्री मोना शर्मा ने ‘विज्ञापन जगत में हिन्दी की उपयोगिता‘, उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय कि आरती ने ‘जनसंचार रूप में हिन्दी का विकास‘ पर अपने विचार व्यक्त किए, इनके साथ-साथ सत्राह अन्य शोधार्थियों ने अपने विषयों पर शोधसार भी प्रस्तुत किये। साथ ही विद्यार्थियों को देसंविवि परिसर एवं हरिद्वार क्षेत्र का भ्रमण कराया गया। डाॅ0 नरेन्द्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन हुआ।