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लडकियों को सेक्स करने के तुरंत बाद करनी चाहिए ये 8 चीजें

Saturday, November 25 2017

लडकियों को सेक्स करने के तुरंत बाद करनी चाहिए ये 8 चीजें

Updated: 17:47 ज्यादातर महिलाओं को यह नहीं मालूम होता है कि सेक्स करने से पहले या सेक्स के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। महिलाओं में प्राइवेट पार्ट्स की साफ-सफाई न रखने की वजह से सबसे अधिक इन्फेक्शन फैलता है। इसलिए सेक्स करने के बाद महिलाओं को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। सेक्स के दौरान योनि के टिश्यू चिकने हो जाते हैं और रगड़ खाकर सूज जाते हैं जिससे कि इनकी क्रिया में परिवर्तन आ जाता है। इसलिए आपको हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि सेक्स के बाद कुछ चीजों से इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि सेक्स के तुरंत बाद क्या करना चाहिए। 1. इंटरकोर्स के तुरंत बाद वॉशरूम जाएं: सेक्स के दौरान प्राइवेट पार्ट्स में बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं। नमी की वजह से योनि में बैक्टीरिया की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। इसलिए सेक्स के तुरंत बाद वॉशरूम जाना चाहिए क्योंकि पेशाब करने से सारे बैक्टीरिया बाहर निकल आते हैं और योनि में इन्फेक्शन नहीं होता है। 2. गर्म पानी से न नहाएं: सेक्स के बाद योनि का द्वार अधिक बड़ा हो जाता है। इसलिए इंटरकोर्स के तुरंत बाद गर्म पानी से नहाने पर इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। सेक्स के बाद गर्म पानी से नहाने से बचना चाहिए। 3. पानी पिएं-: इंटरकोर्स के बाद संभव हो तो एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके तुरंत बाद पानी पीने से यूटीआई से पैदा होने वाले हानिकारक बैक्टीरिया पेशाब के जरिए बाहर निकल आते हैं। 4. प्रोबायोटिक युक्त भोजन करें: इंटरकोर्स के बाद आप किस तरह का भोजन करते हैं, इसपर विशेष ध्यान दें। आप खमीरयुक्त भोजन जैसे दही, कोंबछा या किम्ची खा सकते हैं। इंटरकोर्स के बाद ये खाद्य पदार्थ खाने से लाभदायक बैक्टीरिया फिर से संचित होने लगते हैं जिससे कि योनि में यीस्ट इन्फेक्शन नहीं होता है। 5. प्राइवेट पार्ट्स में साबुन न लगाएं: सेक्स करने के तुरंत बाद प्राइवेट एरिया को साबुन से धोएं। सिर्फ सेक्स के ठीक बाद ही नहीं बल्कि काफी देर बाद भी साबुन का इस्तेमाल न करें। योनि की सफाई अपने आप हो जाती है। साबुन लगाने से इसका पीएच लेवल गड़बड़ हो सकता है जिसकी वजह से जलन, सूखापन और यहां तक कि इन्फेक्शन भी हो सकता है। 6. आरामदायक अंडरवियर पहनें: ज्यादातर अंडरवियर नॉयलान और पॉलिस्टर के बने होने हैं जिनके अंदर हवा नहीं जा पाती है। इंटरकोर्स के तुरंत बाद ऐसे अंडरवियर पहनने से कीटाणुओं की संख्या बढ़ सकती है। 7. गीले कपड़े से न पोछें: इंटरकोर्स के बाद गीले कपड़े से पोछने पर इसमें मौजूद केमिकल से प्राइवेट पार्ट्स में जलन हो सकता है। इसलिए सादे पानी या विनेगर से सफाई करें। 8. ब्लो ड्रायर का प्रयोग करें: ज्यादातर महिलाएं इंटरकोर्स के बाद ब्लो ड्रायर का प्रयोग करने के बारे में जानती हैं। डॉक्टर के अनुसार यह काफी सहायक साबित होता है। जो महिलाएं यूटीआई और माइकोसिस से ग्रस्त हैं ब्लो ड्रायर उनके लिए काफी फायदेमंद है। सेक्स के बाद इसे विशेषतौर पर करना चाहिए। English summary Ladies! Do These Things Immediately After An Intercourse Read to know what are the important things that you need to do after having an intercourse. Please Wait while comments are loading...

शुष्क त्वचा से निपटने के लिए अद्भुत घरेलू उपचार

Saturday, November 25 2017

शुष्क त्वचा से निपटने के लिए अद्भुत घरेलू उपचार

Updated: Saturday, November 25, 2017, 15:59 सर्दिया नज़दीक हैं और हो सकता है कि आपकी त्वचा ने इसके संकेत देना शुरू कर दिया हो। सर्दियों में त्वचा अक्सर सूखी, खुजलीदार और फ्लेकी हो जाती है। इस सूखे मौसम में त्वचा से नमी छिन जाती है और त्वचा रुखी और बेजान नज़र आने लगती है। हमारी त्वचा बहुत नाज़ुक होती है। इसकी ऊपरी सतह पर तेल और नमी होती है जो त्वचा की अन्दर की सतहों की रक्षा करती है। मौसम की सूखी हवाओं के कारण त्वचा की ऊपरी सतह से नमी सूख जाती है जिससे त्वचा सूखी और खुजलीदार हो जाती है। हमारी तेल ग्रंथियां भी कम सक्रिय हो जाती है और तेल का कम स्त्राव करती हैं जिससे सर्दियों की यह समस्या अधिक बढ़ जाती है। सूखी त्वचा के कारण हमें बहुत अधिक समस्या होती है। त्वचा खुजलीदार और लाल हो जाती है जिसके कारण ऊनी कपडे पहनना बहुत असुविधाजनक हो जाता है। सूखी त्वचा बेजान और रुखी दिखती है। बहुत अधिक शुष्कता के कारण त्वचा में दरारें पड़ जाती हैं जिसमें रोगाणु आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। सर्दियों में त्वचा का शुष्क होना एक आम समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए बाज़ार में कई तरह के क्रीम्स और लोशन उपलब्ध होते हैं। हालाँकि इन सभी उत्पादों से आराम तो मिलता है परन्तु इसका असर केवल कुछ समय तक ही रहता है। आपको शुष्क त्वचा की समस्या को दूर रखने के लिए दिन में कई बार इन्हें लगाना पड़ता है। इसके अलावा सही मॉस्चराइज़र का चुनाव करना भी बहुत से लोगों के लिए कठिन हो जाता है। जिन लोगों की त्वचा बहुत अधिक शुष्क होती है उनके लिए लाइट मॉस्चराइज़र उपयोगी नहीं होता। उसी तरह बहुत हेवी क्रीम बेस्ड मॉस्चराइज़र त्वचा के रोम छिद्रों को बंद कर देता है जिससे मुंहासों की समस्या हो सकती है। अत: सर्दियों में त्वचा के लिए सही उत्पाद का चुनाव बहुत ज़रूरी होता है। यदि बाज़ार में उपलब्ध उत्पादों से आपको आराम नहीं मिल रहा है तो हम आपको सलाह देंगे कि सर्दियों में त्वचा की समस्या से निपटने के लिए आप इन घरेलू उपचारों का उपयोग करके देखें। यहाँ कुछ प्राकृतिक घरेलू उपचार बताये गए हैं जिनका उपयोग यदि नियमित तौर पर लम्बे समय तक किया जाए तो वे आपकी त्वचा को नरम बनाते हैं और उसे पोषण प्रदान करते हैं। 1) एलोवेरा: इस हर्ब के बिना स्किन केयर को अधूरा माना जाता है। यह शुष्क त्वचा के लिए सर्वोत्तम घरेलू उपचार है। एलो वेरा में मॉस्चराइजिंग का गुण होता है जो त्वचा की नमी को बनाये रखता है। इसका नमी को खींचने वाला गुण वातावरण से नमी को खींचकर त्वचा की ओर लाता है। अपने हाथों और चेहरे पर एलो वेरा जैल लगायें। इसे 5 मिनिट तक लगा रहने दें और बाद में धो डालें। 2) पपीता: पपीते में एक्स्फोलियेटिंग गुण पाया जाता है अत: यह त्वचा से मृत कोशिकाओं को दूर करता है। इसमें विटामिन ए, सी और ई पाया जाता है जो शुष्क त्वचा को नमी प्रदान करता है। इसमें पापेन नामक एंजाइम पाया जाता है जो शुष्क त्वचा को नमी प्रदान करता है। पापेन नामक एंजाइम नई कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायक होता है। पके हुए पपीते के गूदे को मसलकर पेस्ट बनायें और इसे शुष्क त्वचा पर लगायें। इसे 15 मिनिट बाद धो डालें। 3) अवोकेडो: अवोकेडो क्रीमी होते हैं और इसमें प्राकृतिक रूप से फैटी एसिड पाए जाते हैं जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को बनाये रखते हैं। यह कोलेजन के उत्पादन को भी बढ़ाता है और त्वचा की रंगत में भी सुधार लाता है। पके हुए आधे अवोकेडो को कटोरे में मसलें। इसमें 2 चम्मच ऑलिव ऑइल मिलाएं और इसे त्वचा पर लगायें। इसे 15 मिनिट बाद धो डालें। 4) खीरा: खीरे में 80% पानी होता है। अत: शुष्क त्वचा के लिए इसका उपयोग सबसे अच्छा होता है। यह त्वचा को हील करता है, डैमेज त्वचा को सुधारता है और इसकी प्राकृतिक नमी को वापस लाता है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को नरम बनाते हैं और इसे सूर्य की रोशनी से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। आराम पाने के लिए दिन में कई बार खीरे के ठंडे टुकड़ों को अपने चेहरे पर तथा शरीरे के सूखे भागों पर रगड़ें। 5) नीम का तेल: नीम बहुत अच्छा एंटीसेप्टिक है और इसके तेल में मॉस्चराइजिंग का गुण पाया जाता है। यह त्वचा को खुजली और जलन से राहत पहुंचाता है। यह त्वचा पर उपस्थित बैक्टीरिया को भी नष्ट करता है और आपको संक्रमण से दूर रखता है। यह बाज़ार में उपलब्ध होता है। अत: नियमित तौर पर त्वचा पर इसका इस्तेमाल करें। बाहरी उपचारों के अलावा हमारी त्वचा को अन्दर से भी उपचार की आवश्यकता होती है। सही आहार से त्वचा की शुष्क होने की समस्या कम हो जाती है। आहार में प्रचुर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करके त्वचा की कोशिकाओं को मज़बूत और पोषित बनाता है जिससे त्वचा शुष्क नहीं होती। इसके अलावा ये फैटी एसिड त्वचा की जलन को दूर करते है और आपको साफ़, चिकनी और स्वस्थ त्वचा प्रदान करते हैं। English summary शुष्क त्वचा से निपटने के लिए अद्भुत घरेलू उपचार Using natural ingredients such as apple cider vinegar, lemon, etc., can actually remove age spots. Read to know more. Please Wait while comments are loading...

जानिए Vitamin C की मदद से कैसे लायें चेहरे पर रौनक

Saturday, November 25 2017

जानिए Vitamin C की मदद से कैसे लायें चेहरे पर रौनक

Updated: Saturday, November 25, 2017, 13:41 हम सब आजकल के इस भाग दौड़ भरी जिन्दगी में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि अपने लिए बिलकुल भी समय नहीं निकाल पाते हैं। इतना व्यस्त होने के बावजूद भी अगर आप स्किन की देखभाल करने की सोच रहें हैं तो हम आपको इसके लिए मदद करेंगे। एक ठोस और अच्छे उपाय को करने से आपको अपनी त्वचा में एक बहुत बड़ा फर्क समझ में आएगा। आप जानते हैं कि आपकी स्किन को हर रोज सूर्य से आने वाली अल्ट्रा-वोइलेट किरणों की वजह से बहुत सारे नुकसान झेलने पड़ते हैं। जिसकी वजह से आपको आक्सीडेटिव स्ट्रेस, स्किन पर दाग धब्बे और स्किन कैंसर आदि भी हो सकते हैं। इस चीज को आप आसानी से दूर कर सकते हो, इसके लिए आपको धुम्रपान से बचना होगा, सनग्लासेज पहनना होगा या फिर अपने खाने पीने में एंटी-आक्सीडेंट जैसे कि टमाटर और बेरी आदि का इस्तेमाल करना होगा। आप अपनी स्किन को बचाने के लिए एंटी-आक्सीडेंट वाले प्रोडक्ट्स भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हम आपको यहाँ कुछ ऐसी चीजें बताने जा रहें हैं जो आपकी त्वचा के लिये बहुत ही फायदेमंद हैं। 1- विटामिन सी: विटामिन सी को एस्कोर्बिक एसिड भी कहते हैं। यह इम्युनिटी को बढाने के साथ साथ एक अच्छा एंटी-आक्सीडेंट भी है। यह आपकी त्वचा में पाए जाने वाले कोलेजन प्रोटीन को बनाने में मदद करता है। विटामिन सी आपकी त्वचा को सूर्य से आने वाली खतरनाक किरणों से बचाता है जिससे आपकी स्किन में लाल चकत्ते नहीं पड़ते है और साथ ही दाग धब्बे और कील मुंहासे भी आसानी से दूर होते हैं। विटामिन सी युक्त पदार्थ खाने की बजाय उसे सीधे स्किन पर लगाने से ज्यादा फर्क पड़ता है क्योंकि ऐसा करने से विटामिन सी आसानी से आपकी त्वचा की भीतरी सतह पर पहुँचता है। 2- नींबू: नींबू आपकी चाय और आपके पानी को और भी अधिक बेहतर बना सकता है। इसके साथ ही यह आपकी त्वचा के लिए भी अच्छा है क्योंकि इसमें पॉलीफिनोल जैसे फ्लेवोनोइड्स या बायोफ्लेवोनोइड्स आदि पाए जाते हैं। नीम्बू में जो फ्लेवोनोइड्स पाए जाते हैं उनमें से डायोस्मिन, हेसपेरिडीन और इरियोसिट्रिन होते हैं। जर्नल ऑफ़ फाईटोकेमेस्ट्री और फाइटोबायोलॉजी के अनुसार डायोस्मिन और हेसपेरिडीन आपकी स्किन को सूर्य की खतरनाक किरणों से बचाते हैं जबकि इरियोसिट्रिन एक अच्छा एंटी-आक्सीडेंट होता है। ये तीनों नेचुरल केमिकल फ्री रेडिकल से लड़ने का काम करते हैं। नींबू एक तगड़ा एसिड होता है इसलिए इसको आप सीधे इस्तेमाल ना करके किसी चीज के साथ इस्तेमाल करें, नहीं तो आपकी स्किन को बहुत अधिक नुकसान हो सकता है। 3- व्हाइट टी: यह आपको मजबूती देने से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण ड्रिंक है क्योंकि इसमें मौजूद पॉलीफीनोल आपकी त्वचा पर अदभुत काम करता है। एक्सपेरिमेंटल डर्मेटोलॉजी के अनुसार इसमें बहुत अधिक मात्रा में एंटी-आक्सीडेंट गुण होते हैं जो आपकी स्किन को सूर्य की किरणों से होने वाले आक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं। त्वचा पर व्हाइट टी वाले प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने से वातावरण कारणों के द्वारा स्किन में होने वाली समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है। चाय में पॉलीफीनोल बहुत अधिकता में होता है लेकिन इसके अलावा आप व्हाइट टी युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करें जो आपकी त्वचा के लिए फायदेमंद हैं। यहाँ तक कि आप व्हाइट टी को एक टोनर के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आप दो व्हाइट टी बैग को गर्म पानी में रखिये और ठंडा होने के बाद इसे रुई से अपनी त्वचा पर लगाएं। ऐसा करने से आपकी स्किन फ्रेश और साफ़ हो जायेगी। English summary Radiant Makeover With The Brightening Effects Of Vitamin C Vitamin C, also known as ascorbic acid, is a popular immune booster. It’s also a powerful antioxidant. Please Wait while comments are loading...

चेहरे के खुले पोर्स दिखने में लगते हैं भद्दे, तो ऐसे करें उन्‍हें कम

Tuesday, November 28 2017

चेहरे के खुले पोर्स दिखने में लगते हैं भद्दे, तो ऐसे करें उन्‍हें कम

Published: Tuesday, November 28, 2017, 12:30 बहुत से लोग चेहरे पर खुले या बड़े पोर्स से काफी ज्‍यादा परेशान रहते हैं। यह देखने में तो भद्दे लगते ही हैं साथ में इनकी वजह से ब्‍लैकहेड्स और एक्‍ने भी हो जाते हैं। अत्‍यधिक तेल के रिसाव की वजह से इन पोर्स में बैक्‍टीरिया और गंदगी जम जाती है, जिससे कि ये पोर्स बंद हो जाते हैं। ब्‍लैकहेड्स की वजह से पोर्स काले और बड़े दिखना शुरु हो जाते हैं। जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है उसकी स्‍किन भी लूज़ होनी शुरु हो जाती है और इसी के साथ चेहरे के पोर्स भी बड़े होने लगते हैं। अगर आपने अपनी स्‍किन की केयर अभी से शुरु नहीं की तो बाद में आपका चेहरा ओपन पोर्स से भर जाएगा। हांलाकि आपको इतना परेशान होने की जरुरत नहीं है क्‍योंकि खुले पोर्स को बद करने या फिर छोटा करने के ऐसे कई आसान तरीक हैं, जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे। पर एक बात का हमेशा ध्‍यान रखे कि पोर्स हमारी त्‍वचा का एक प्राकृतिक हिस्‍सा हैं, जिसे पूरी तरह से बंद करना मुश्‍किल है। इससे पहले कि आप पोर्स बंद करने वाली कोई क्रीम खरीदें, इससे पहले जान लें उन्‍हें बंद करने के कुछ प्राकृतिक उपाय। 1. आइस क्‍यूब्‍स खुले रोमछिद्रों से तुरंत निजात दिलाने में बर्फ बेहद कारगर उपाय है। बर्फ त्वचा पर टोनर की तरह काम करती है। इससे त्वचा के रोमछिद्रों में कसाव आता है। बर्फ का एक टुकड़ा लें और उसे 5 से 10 सेकेंड के लिए चेहरे पर मलें। आपको ऐसा दिन में दो बार करना है। इसकी जगह आप चाहें तो ठंडे पानी से चेहरा भी धो सकती हैं। 2. बेकिंग सोडा कई लोग बेकिंग सोडा के अद्भुत फायदों से अनजान हैं। बेकिंग सोडा का इस तरह इस्तेमाल कर आप खुले रोमछिद्रों की समस्या से निजात पा सकते हैं। गुनगुने पानी में दो चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। अब इससे सर्कलुर मोशन में हल्के हाथों से मसाज करें। 5 मिनट के लिए इसे चहेरे पर ही लगा छोड़ दें और इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। 3. शुगर स्‍क्रब घर पर बनाया गया शुगर स्‍क्रब बड़े पोर्स को छोटा करने के काम आ सकता है। एक कटोरी में 2 टीस्‍पून शुगर, 1 टीस्‍पून ऑलिव ऑइल और कुछ बूंद नींबू के रस की मिलाएं। इसे चेहरे पर हल्‍के हल्‍के 20 सेकेंड तक रगड़ें और फिर चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। इसे हफ्ते में दो या तीन बार यूज़ करें और रिजल्‍ट देंखे। आप चाहें तो नींबू के छिलके पर थोड़ी सी शक्‍कर डालें और उससे चेहरे को हल्‍के हल्‍के रगड़ें। 10 मिनट छोड़ने के बाद चेहरा धो लें। यह हफ्ते में दो बार करें। 4. एग वाइट मास्‍क अंडे की सफेदी का मास्क पोर्स को कसने, और उन्हें छोटा दिखाने के लिए अच्छा माना जाता हैं। 1/4 कप ताज़े संतरे के रस के साथ 2 कच्चे अंडे की सफेदी मिलाएँ। इस मास्क को चेहरे पर लगाएँ और इसे गुनगुने पानी से धोने से पहले 15 मिनिट के लिए रहने दें। संतरे का रस आपकी रंगत निखारने में भी मदद करता है। 5. शहद शहद आपके रोमछिद्रों को छोटा कर देता है और तेलीय त्वचा की समस्या भी दूर हो जाती है। दो से तीन चम्मच शहद, नींबू का रस और जडी बूटी मिलकर मास्क बनाएं और चेहरे पर इसका उपयोग करें। कुछ मिनिट मालिश करें, इसे पांच मिनिट सूखने दें और फिर गुनगुने पानी से धो लें। 6. मुल्‍तानी मिट्टी मुल्‍तानी मिट्टी चेहरे के अत्‍यधिक तेल को सोख लेती है और डेड स्‍किन को हटाती है। यह चेहरे के दाग धब्‍बों को हल्‍का कर देती है। 2 चम्‍मच मुल्‍तानी मिट्टी में थोड़ा सा गुलाबजल मिक्‍स करें। इसे चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के बाद ठंडे पानी से धो लें। इस मास्‍क को हफ्ते में एक या दो बार यूज़ करें। 7. ओटमील पांच बड़े चम्मच शहद और दो बड़े चम्मच ओटमील को दूध पावडर में मिलाएं। सभी चीज़ों को मिलाएं। चेहरे पर लगायें और गोलाकार दिशा में मालिश करें। जब ख़त्म हो जाए तो अच्छी तरह से धो लें। सप्ताह में कम से कम दो बार इसे चेहरे पर लगायें। 8. नींबू का रस नींबू के रस में सिट्रस एसिड होता है जो कि चेहरे को एक्‍सफालिएट करने में मदद करता है। 1 टीस्‍पून नींबू के रस में आधा चम्‍मच शहद मिक्‍स करें। इसे स्‍किन पर लगाएं और 15 मिनट तक रहने दें। ऐसा रोज़़ करने से महीने भर के अंदर आपके पोर्स बद हो जाएंगे। English summary Reduce the Size of Large Pores with These 8 Natural Treatments Before you go shopping, you can try some inexpensive, easy and natural home remedies to minimize the appearance of open pores. Story first published: Tuesday, November 28, 2017, 12:30 [IST] Nov 28, 2017 कीअन्यखबरें Please Wait while comments are loading...

An MOU signed amidst AIIMS Rishikesh and Dev Sanskriti University, Haridwar

Monday, November 27 2017

An MOU signed amidst AIIMS Rishikesh and Dev Sanskriti University, Haridwar

Home | An MOU signed amidst AIIMS Rishikesh and Dev Sanskriti University, Haridwar An MOU signed amidst AIIMS Rishikesh and Dev Sanskriti University, Haridwar November 27, 2017 Visits Comments Off on An MOU signed amidst AIIMS Rishikesh and Dev Sanskriti University, Haridwar A new chapter has been added in the field of academic development with the signing of a Memorandum of Understanding (MOU) between All India Institute of Medical Sciences (AIIMS), Rishikesh University (DSVV), haridwar. Professor Ravikant , the Director and CEO of AIIMS, and Dr. Chinmay Pandya , the Pro-Vice Chancellor of DSVV, jointly signed the MOU. This MOU would promote academic exchanges between the two institutes, besides making it possible for mutual exchange of students, teachers and medical practitioners at various levels of research, rural medical development and training programs. The Director of AIIMS, Padamshree Prof. Ravikant , told that the allopathic therapy, though being fully scientific, is limited in its effect. The therapy helps in curing a disease up to an extent of about 23 percent, the rest is only possible through alternative therapies. AIIMS specializes in Allopathic therapy while DSVV specializes in Yoga, Ayurveda and Alternative therapies. Both the institutes can together play an effective role in diagnosing diseases. The practitioners belonging to AIIMS will not only receive training from DSVV for curing various diseases but also they will enhance their utility by learning the art of healthy living. The Pro-Vice Chancellor of DSVV, Dr. Chinmay Pandya , said that it is a matter of great fortune for the university to join hands with a prestigious institute like AIIMS. The experiments of alternative therapies running in DSVV will receive a more scientific outlook, which the disease-stricken society, today, desperately needs. This will make the benefits of medical treatment more comprehensive. After signing the memorandum, Prof. Ravikant met the Honorable Chancellor of DSVV, Dr. Pranav Pandya , at Shantikunj and talked on the mutual understanding. The Honorable Chancellor encouraged both the institutions to work excellently in the fields of medicine and research. On this occasion, the Registrar of the university, Shri Sandeep Kumar , the Deans and the Heads of the various departments were also present. Read the News in Hindi अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश एवं देसंविवि के मध्य एमओयू हस्ताक्षर से देसंविवि के शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया। एम्स के निदेशक एवं सीईओ प्रो.रविकान्त एवं देसंविवि के प्रतिकुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने इस एमओयू पर संयुक्त हस्ताक्षर किये। इस एमओयू से देसंविवि एवं एम्स के मध्य शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शोध, ग्रामीण चिकित्सा विकास एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं चिकित्सों का विभिन्न स्तर पर परस्पर आदान-प्रदान सम्भव होगा। एम्स के निर्देशक पद्मश्री प्रो. रविकान्त ने बताया कि एलोपैथ चिकित्सा पूर्णतः विज्ञान सम्मत होते हुए भी अपने प्रभाव में सीमित है। इसमें रोग का उपचार लगभग 23 प्रतिशत ही हो पाता है शेष 77 प्रतिशत रोग का उपचार वैकल्पिक चिकित्सा से ही सम्भव है। एम्स की एलोपैथ चिकित्सा एवं देसंविवि की योग, आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा में विशेषज्ञता है। दोनों संस्थान मिलकर रोग निदान में एक प्रभावी भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं। एम्स के चिकित्सक विभिन्न रोेगों के उपचार का प्रशिक्षण तो प्राप्त करते ही हैं, साथ ही देसंविवि से स्वस्थ एवं निरोगी जीवन का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी उपयोगिता और अधिक बढ़ा पायेंगे। देसंविवि के प्रति कुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ना हमारे संस्थान के लिए सौभाग्य की बात है। देसंविवि में चल रहे वैकल्पिक चिकित्सा के प्रयोगों का एम्स के साथ जुड़कर और अधिक वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण सम्भव होेगा, जिसकी आज रोग पीड़ित समाज को अत्यन्त आवश्यकता है। वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण से चिकित्सा का लाभ और व्यापक होगा। देसंविवि में संयुक्त अनुबंध कार्यक्रम के उपरांत प्रो. रविकांत ने शांतिकुंज जाकर दे.से.वि.वि. के श्रद्धेय कुलाधिपति डाॅ. प्रणव पण्ड्या जी से कुशल भेंट एवं अनुबंध संबंधी वार्तालाप कीे व इसी दौरान श्रद्धेय कुलाधिपति जी ने दोनोें संस्थानों को चिकित्सा एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। इस अवसर पर देसंविवि के कुलसचिव संदीप कुमार, संकायाध्यक्ष एवं विभिन्न विभागों के अध्यक्ष भी उपस्थित रहे।

घर पर ऐसे बनाएं लो कैलोरी मूंग दाल डोसा

Wednesday, November 29 2017

घर पर ऐसे बनाएं लो कैलोरी मूंग दाल डोसा

हरी मूंग दाल का डोसा लो कैलारी साउथ इंडियन डिश है जिसे पेसारत्तू भी कहा जाता है। आंध्र प्रदेश के राज्‍य में ये डिश बहुत लोकप्रिय है और इसे नाश्‍ते और शाम को स्‍नैक में भी खाया जा सकता है। हरी मूंग दाल का डोसा साबुत हरी मूंग दाल से बना है। इसमें इन्‍हें पहले भिगोकर पीसा गया है। फिर इससे गोल आकार के डोसा बनाए गए। आमतौर पर डोसा चटनी और सागू के साथ खाया जाता है। इसे उपमा के साथ भी सर्व कर सकते हैं। हरी मूंग दाल का डोसा का रंग बेहद अलग होता है और ये स्‍वाद में भी लाजवाब होता है। इसे धनिया पत्ती, प्‍याज और चावल के आटे से अलग फ्लेवर दिया जा सकता है। इस डोसे को बनाने का पारंपरिक तरीका है कि पैन को स्‍टोव से उतार लें और घोल को उस पर डालकर पकने दें। इसमें इस बात का ध्‍यान रखें के पकते समय डोसा पैन पर चिपकना नहीं चाहिए। हरी मूंग दाल का डोसे को आप घर पर बड़ी आसानी से ना सकते हैं और इसमें ज्‍यादा मेहनत भी नहीं लगती है। इस वीडियो को देखकर आप हरी मूंग दाल का डोसा बनाना सीख सकते हैं। पानी - 2 कप (भिगोने के लिए) + ¾th कप+ ½ कप धनिया पत्ती (बारीक कटी हुई) - - ¼ कप प्‍याज़ - 1 चावल का आटा - 4 टेबलस्‍पून नमक - 1½ टेबलस्‍पून तेल - 1 कप (ग्रीसिंग के लिए) How to Prepare एक कटोरा लें और उसमें हरी मूंग की दाल डालें। इसमें 2 कप पानी डालें। इसे ढक कर रातभर भीगने के लिए रख दें। कम से कम 6-8 घंटे। भीगी हुई हरी मूंग की दाल का पानी निकालकर इसे एक तरफ रख दें। एक प्‍याज लें। उसका ऊपरी और मध्‍य हिस्‍सा काट दें। इसका छिल्‍का उतारें। आधा काटकर इसे छोटे टुकड़ों में काट लें। ए‍क मिक्‍सर जार लें और उसमें कटी हुई प्‍याज़ डालें। अब इसमें हरी मिर्च और बारीक कटी हुई धनिया पत्ती डालें। इसमें भीगी हुई हरी मूंग की दाल ¾ कप पानी के साथ डालें। इसका गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। अब इस मिश्रण को एक कटोरे में भरकर रख लें। इसमें चावल का आटा और नमक डालें। अच्‍छी तरह से मिक्‍स करें। अब इसमें आधा कप पानी डालें और थोड़ा स्‍मूद होने तक मिक्‍स करें। इसे अलग रख दें। समतल तवा लें और उसे गर्म करें। आधी प्‍याज़ की मदद से तवे पर 2 टेबलस्‍पून तेल लगाएं। अब तवे को स्‍टोव से हटा लें और उस पर घोल डालें और उसे गोल आकार दें। थोड़े तेल के साथ डोसे को ग्रीस करें। ग्रिडल से अतिरिक्‍त घोल हटा दें। एक मिनट तक पकाएं। पलट कर आधे मिनट तक पकाएं। Instructions 1.घोल को सामान्‍य डोसे के घोल की तुलना में थोड़ा गाढ़ा रखें 2.डोसे का घोल डालते समय तवे को स्‍टोव से नीचे उतार लें। नॉन स्टिक तवे की जगह ट्रेडिशनल कास्‍ट आयरन तवे का भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं. Nutritional Information सर्विंग साइज़ - 1 डोसा कैलोरी - 86.4 कैलोरी फैट - 0.3 ग्राम प्रोटीन - 5.4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट - 14.2 ग्राम चीनी - 1.5 ग्राम फाइबर - 5.9 ग्राम .

HOW TO PREPARE- GREEN GRAM DOSA

एक कटोरा लें और उसमें हरी मूंग की दाल डालें। 1.इसमें 2 कप पानी डालें। 2.इसे ढक कर रातभर भीगने के लिए रख दें। 3.कम से कम 6-8 घंटे। 4.भीगी हुई हरी मूंग की दाल का पानी निकालकर इसे एक तरफ रख दें। 5.एक प्‍याज लें। उसका ऊपरी और मध्‍य हिस्‍सा काट दें। 6.इसका छिल्‍का उतारें। 7.आधा काटकर इसे छोटे टुकड़ों में काट लें। 8.ए‍क मिक्‍सर जार लें और उसमें कटी हुई प्‍याज़ डालें। 9.अब इसमें हरी मिर्च और बारीक कटी हुई धनिया पत्ती डालें। 10.इसमें भीगी हुई हरी मूंग की दाल ¾ कप पानी के साथ डालें। 11.इसका गाढ़ा पेस्‍ट बना लें। 12.अब इस मिश्रण को एक कटोरे में भरकर रख लें। 13.इसमें चावल का आटा और नमक डालें। अच्‍छी तरह से मिक्‍स करें। 14.अब इसमें आधा कप पानी डालें और थोड़ा स्‍मूद होने तक मिक्‍स करें। 15.इसे अलग रख दें। 16.समतल तवा लें और उसे गर्म करें। 17.आधी प्‍याज़ की मदद से तवे पर 2 टेबलस्‍पून तेल लगाएं। 18.अब तवे को स्‍टोव से हटा लें और उस पर घोल डालें और उसे गोल आकार दें। 19.थोड़े तेल के साथ डोसे को ग्रीस करें। 20.ग्रिडल से अतिरिक्‍त घोल हटा दें। 21.एक मिनट तक पकाएं। 22.पलट कर आधे मिनट तक पकाएं।

लो कैलोरी पत्‍तागोभी पराठा रेसिपी बनाने का तरीका

Wednesday, November 29 2017

लो कैलोरी पत्‍तागोभी पराठा रेसिपी बनाने का तरीका

पत्तागोभी परांठा एक ऐसी डिश है जिसे सभी लोग खा सकते हैं। ये ना केवल हेल्‍दी है बल्कि लो कैलोरी भी है। इस लो कैलारी डिश को बनाने के लिए कसी हुई पत्तागोभी के साथ गेहूं का आटा और मसालों की जरूरत पड़ती है। अनेक तरह के परांठे बनाए जाते हैं जिनमें पत्तागोभी परांठा भी है। अचार और दही के साथ खाने पर ये परांठा बेहद स्‍वादिष्‍ट लगता है और इसे देखते ही मुंह में पानी आ जाता है। पत्तागोभी परांठा बनाना काफी आसाना है। यहां हम आपको पत्तागोभी परांठा की आसान रेसिपी को वीडियो और तस्‍वीरों के ज़रिए बता रहे हैं। पत्तागोभी परांठा रेस‍िपी | कैसे बनाएं पत्तागोभी का परांठा | परांठे के साथ पत्तागोभी रेसिपी | पत्तागोभी परांठा रेसिपी | परांठा रेसिपी पत्तागोभी | कैसे बनाएं पत्तागोभी का परांठा पत्तागोभी परांठा रेस‍िपी | कैसे बनाएं पत्तागोभी का परांठा | परांठे के साथ पत्तागोभी रेसिपी | पत्तागोभी परांठा रेसिपी | परांठा रेसिपी पत्तागोभी |

कैसे बनाएं पत्तागोभी का परांठा Prep Time

पत्तागोभी - 1 कप अदरक, लहसुन और मिर्च का पेस्‍ट - 3 टेबलस्‍पून जीरा - 2 टेबलस्‍पून लाल मिर्च पाउडर - 2 टेबलस्‍पून हल्‍दी पाउडर - ¼ टेबलस्‍पून गेहूं का आटा - 1 कप पानी - 2 कप तेल - 1 टेबलस्‍पून

How to Prepare

1.पत्तागोभी को अच्‍छी तरह से बारीक घिस लें। सिर्फ आधी पत्तागोभी का ही प्रयोग करें। 2.एक बड़े कटोरे या कंटेनर में इस घिसी हुई पत्तागोभी को रखें। 3.इसमें अदरक, लहसुन और मिर्च का पेस्‍ट डालें। 4.अब इसमें जीरा पाउडर के साथ लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। 5.हल्‍दी पाउडर डालें। 6.इन सब चीज़ों को एकसाथ मिक्‍स करें। 7.अब इसमें गेहूं का आटा मिलाएं। 8.आवश्‍याकतानुसार पानी मिलाते रहें और इस मिश्रण का हल्‍का मुलायम आटा तैयार कर लें। 9.इसे 10 मिनट के लिए कपड़े से ढक कर रख दें। 10.अब कपड़ा हटाकर आटे में से थोड़ी सी लई लें। 11.इसे हथेली से गोल आकार दें। 12.अब इसे चकले पर रखकर गोल आकार में बेल लें। 13.इसे गर्म तवे पर डाल दें। 14.इसे 3 मिनट तक तब तक सेकें जब तक कि परांठा हर तरफ से थोड़ा फूल ना जाए। 15.अब चम्‍मच से परांठे के ऊपर तेल लगाएं। 16.परांठा पलट दें और फिर 2 मिनट तक सेकें। 17.इसके बाद पैने से परांठा उतार लें और प्‍लेट में डालकर सर्व करें। Instructions घिसने से पहले पत्तागोभी को अच्‍छी तरह से धो ले पत्तागोभी को बारीक घिसें ताकि ये आटे की लोई में अच्‍छी तरह से आ सके परांठे में अपने स्‍वादानुसार मिर्च का पाउडर डाल सकते हैं पत्तागोभी भी पानी छोड़ती है इसलिए आटा गूंथते समय पानी की मात्रा थोड़ी कम ही रखे. Nutritional Information सर्विंग साइज़ - 1 परांठा कैलोरी - 309 कैलोरी फैट - 5.12 ग्राम प्रोटीन - 7.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट - 59.18 ग्राम चीनी - 4 ग्राम फाइबर - 5.7 ग्राम HOW TO PREPARE- CABBAGE PARATHA 1.पत्तागोभी को अच्‍छी तरह से बारीक घिस लें। सिर्फ आधी पत्तागोभी का ही प्रयोग करें। 2. एक बड़े कटोरे या कंटेनर में इस घिसी हुई पत्तागोभी को रखें। 3.इसमें अदरक, लहसुन और मिर्च का पेस्‍ट डालें। 4.अब इसमें जीरा पाउडर के साथ लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। 5.हल्‍दी पाउडर डालें। 6.इन सब चीज़ों को एकसाथ मिक्‍स करें। 7. अब इसमें गेहूं का आटा मिलाएं। 8. आवश्‍याकतानुसार पानी मिलाते रहें और इस मिश्रण का हल्‍का मुलायम आटा तैयार कर लें। 9. इसे 10 मिनट के लिए कपड़े से ढक कर रख दें। 10.अब कपड़ा हटाकर आटे में से थोड़ी सी लई लें। 11. इसे हथेली से गोल आकार दें। 12. अब इसे चकले पर रखकर गोल आकार में बेल लें। 13.इसे गर्म तवे पर डाल दें। 14. इसे 3 मिनट तक तब तक सेकें जब तक कि परांठा हर तरफ से थोड़ा फूल ना जाए। 15.अब चम्‍मच से परांठे के ऊपर तेल लगाएं। 16. परांठा पलट दें और फिर 2 मिनट तक सेकें। 17. इसके बाद पैने से परांठा उतार लें और प्‍लेट में डालकर सर्व करें। [ 3.5 of 5 - 101 Users] Read more about: low calorie recipes , indian bread , breakfast , नाश्‍ता , रोटी Please Wait while comments are loading...

सेहत सुधर जाएगी अगर पीना शुरु कर देंगे ओट मिल्‍क, जाने इसके 9 फायदे

Wednesday, November 29 2017

सेहत सुधर जाएगी अगर पीना शुरु कर देंगे ओट मिल्‍क, जाने इसके 9 फायदे

क्या आपने जई का दूध यानी ओट मिल्क के बारे में सुना है? कई लोग इस समय डेयरी प्रोडक्ट से दूर हो रहें हैं, और उसकी जगह सब्ज़ियों को दे रहें हैं। यह सिर्फ पाचन तंत्र के लिए ही अच्छा नहीं है बल्कि इसमें कई सारे स्वस्थवर्धक गुण हैं। इस आर्टिकल में आज हम आपको ओट मिल्क को पीने के फायदों के बारे में बातएंगे।

कैसे बनाये ओट मिल्क और इसे कैसे पीएं?

यह उनके लिये काफी अच्‍छा है जिन्‍हें लैक्टोज से एलर्जी है। इसके साथ आप इसको कॉफी या चॉकलेट के साथ मिला कर पी सकते हैं। साथ आप इससे क्रीम, सॉस, स्मूदी और पेस्ट्री में डाल कर भी बना सकते हैं। इसे आप बना बनाया बाजार से ले सकते हैं (कुछ ब्रांड्स इसे वेनिला या चॉकलेट फ्लेवर के साथ भी बेचते हैं) और अगर आप चाहें तो इसे घर पर ही तैयार कर सकते हैं।

आइये जानते हैं इसे घर पर तैयार करने की विधि -

सामग्री 6 बड़े चम्मच ओटमील (60 ग्राम) 4 गिलास पानी (1 लीटर) बनाने की विधि ब्लेंडर में ओटमील डालें। अब इसमें पानी मिलाएं और तब तक चलाएं जब तक यह मिश्रण सफ़ेद ना हो जाये अब इसे छान लें इसके लिए आप सूती कपडे का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसमें निकले तरल पदार्थ को दूध की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं और बचे हुए से आप पेस्ट्री या कोई अन्य चीज़ बना सकती है। इसके बाद अगर आपको यह और गाढ़ा चाहिए तो आप इसके लिए उसमें 1 या 2 बड़ा चम्मच ओटमील मिला सकती है। वही अगर आपको इसका तरल पदार्थ ज्यादा रखना है तो इसमें और पानी मिला दें। इसे मिठास लाने के लिए आप इसमें शहद या ब्राउन शुगर मिला सकती है। ओट्स के दूध के लाभ ओट्स के दूध में प्रोटीन, मिनरल्स, विटामिन और रेशेदार पदार्थों अधिक मात्रा में पाए जाते हैं जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं। यही नहीं इसे फाइबर की ज्यादा मात्रा होने की वजह से इसे पचाने में भी आसानी होती है।

1. यह शरीर साफ करता है

इसे पीने से आपके पेट की सफाई होती है। इसमें कई सारे स्वस्थवर्धक गुण होते हैं जिससे पेट की ऐठन ठीक होती है और आपका पेट साफ़ रहता है। यह कब्ज को दूर कर, पेट खराब होने की समस्या से निजात दिलाने में सहायक है।

2. बढ़ती उम्र को रोके

इसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जिससे शरीर बाहरी हानिकारक प्रभावों बचा रहता है। जिससे कई बीमारियां होती है और शरीर उम्र से ज्यादा बूढ़ा लगने लगता है।

3. सूजन कम करे

ओट्स में पाए जाने वाले फाइबर की वजह से हमारे आंत और मलाशय मजबूत रहते हैं और इन को काफी फायदा पहुंचता है। इसलिए सुबह खली पेट ओट मिल्क पीना चाहिए।

4. ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है

ओटमिल्क को हर रोज़ नाश्ते में पीने से आपका ब्लड प्रेशर ठीक रहता है और इसके साथ साथ अगर आपको डायबिटीज है तो यह भी कंट्रोल में रहती है। तो इसलिए इन बीमारियों में आप ओटमिल्क जरूर पियें।

5. यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है

ओटमिल्क में ओमेगा 3 और 6 अन्सैचरेटिड पाया जाता है। जिससे खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) और ट्राइग्लिसराइड्स कम होता है। इसके साथ अगर आपका कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है तो आपको दिल के रोग होने की समस्या नहीं होगी।

6. यह अपच ठीक करता है

ओटमिल्क पेट संबंधी रोगों में भी काफी लाभ देता है। यह कब्ज को दूर कर, पेट खराब होने की समस्या से निजात दिलाने में सहायक है।

7. तंत्रिका तंत्र को ठीक रखता है

इस में भरपूर मात्रा में फाइबर और मैग्नीशियम पाया जाता है जो कि हमारे दिमाग में सेरोटोनिन की मात्रा को बढ़ाता है। यह दिमाग को शांत रखने और आपका मूड भी अच्छा रहता है। इसमें ऐंटि-ऑक्सिडेंट और विटामिन पाए जाते हैं जो कि तनाव से लड़ने में मदद करते हैं।

8. मांसपेशियों और हड्डियों को स्वस्थ रखे

ओट मिल्क में प्रोटीन पाया जाता है जो मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है। अगर व्यायाम करने के बाद आपको दर्द होता है तो यह उसमें भी आराम दिलाता है।

9. वजन घटने में मदद करे

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो इसमें मौजूद कम फैट और कम कैलोरी कंटेंट और फाइबर की अधिक मात्रा होने के कारण यह वजन घटाने के लिए सबसे उत्तम है।

पान के पत्तो से दूर होते है 10 तरह के रोग, आप भी जानिए

Wednesday, November 29 2017

पान के पत्तो से दूर होते है 10 तरह के रोग, आप भी जानिए

पान तो आप सभी ने कभी ना कभी जरूर खाया होगा। आपको आज हम पान के बारे में बताएंगे। पान एक माउथ फ्रेशनर के साथ साथ आपके शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता है। हर उम्र के लोग इसका सेवन कर सकते है। इसको हर व्यक्ति इसलिए खा लेता है क्योंकि मीठा पान, गौलोरी इत्यादि काफी स्वादिष्ठ और शरीर के फायदा पहुंचाने वाली होती है। किसी समारोह में या घर पर भोजन के बाद, बेहतर पाचन और मुखवास के रूप में प्रयोग किया जाने वाला पान, केवल स्वाद की पुड़िया नहीं है, बल्कि इससे आपकी कई तरह की समस्याएं हल हो सकती हैं। अगर आपका दिल और रक्त धमनियां कमजोर हैं तो आज से ही ये काम शुरू कर दें क्या आप जानते है कि पान को औषधि के रूप में इस्तेमाल करने से कितनी तरह की समस्याएं खत्म हो सकती है। आज हम आपको बताएंगे कि पान एक असरदार औषधि है जिसके इस्तेमाल से 10 तरह के रोग आपसे दूरी बनाकर रखते है। आइए जानते है इनके बारे में...

एंटिसेप्टिक

क्या आप जानते है कि पान का पत्ता सिर्फ खाने में ही नहीं बल्कि हम इसको एंटिसेप्टिक की तरह इस्तेमाल कर सकते है। इसको आप छोटी मोटी खरोंच या चोट में भी इस्तेमाल कर सकते है। चोट और खरोंच की जगह इसको बांधने से आपको इससे आराम मिल जाएगा।

नकसीर फूटना

अगर आपकी नकसीर फूटती है तो आपको बिल्कुल भी नहीं घबराना है। इसके लिए आपको पान के पत्ते को सूंघना है औऱ ऐसा करने से आपकी नकसीर बहनी बंद हो जाएगी।

आंखे लाल होना

अगर आप किसी कारणवश रात को जागते है या आपको कोई थकान होती है। इस कारण कभी कभी आपकी आंखे एकदम सुर्ख लाल हो जाती है। इसके लिए आपको पान के पत्तों को पानी में उबालकर उसी पानी की छीटें आंखो पर मारनी है। ऐसा करने से आपको आराम मिल जाएगा।

आवाज मोटी होना

आपको बता दें कि अगर आपकी आवाज मोटी होती जा रही है तो आपको इसके लिए पान का सेवन करना चाहिए। इससे आपकी आवाज पतली होगी। पान का पानी पीने से आपके गले की समस्याओं का समाधान हो जाता है।

मसूड़ों की समस्या

आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोगो के मसूड़ों से खून आता है। अगर आपको ऐसी समस्या है तो इसके लिए आपको पान के साथ उबाले गए पानी के साथ कुल्ला करने से राहत मिल जाती है। आप गरारा भी कर सकते है।

ब्रोकाइटिस

अगर आपको ब्रोकाइटिस की समस्या है तो इसके लिए आपको पान के 7 पत्तो को 1 गिलास पानी के साथ चीनी डालकर उबाले। जब ये खोलते हुए एक गिलास रह जाए तब दिन में 3 बार इसका सेवन करें। ऐसा करने से ब्रोकाइटिस में लाभ मिल जाता है। कफ अगर आपको कफ की समस्या है तो आपको पान के पत्तो और पानी को चीनी मिलाकर उबालना है औऱ बाद में इसका सेवन करना है। इससे आपकी कफ की समस्या खत्म हो जाती है।

शरीर की बदबू

आपके शरीर से अगर औरों के मुकाबले ज्यादा बदबू आती है तो आपको पान के दो पत्तो को उबालकर दोपहर मे इस पानी का सेवन करना है। इससे आपकी ये समस्या खत्म हो जाएगी।

खुजली

अगर आपको खुजली है तो आपको आपको पान के पत्तों के से उबले पानी से नहाने में आराम मिल सकता है। स्तनों में सूजन अक्सर देखा जाता है कि जो महिलाएं स्तनपान कराती है उसके स्तनों मे सूजन आ जाती है। ऐसे में आपको नारियल का तेल पान में लगाकर हल्का गर्म करेक स्तनों के पास रखने से आराम मिलता है

सर्दियों में ठंड से बचने के लिए खाएं ये 7 ड्राई फ्रूट्स और नट्स

Wednesday, November 29 2017

सर्दियों में ठंड से बचने के लिए खाएं ये 7 ड्राई फ्रूट्स और नट्स

सर्दियों का मौसम अब आ चुका है और लोगों ने अपने शरीर को गर्म और स्वस्थ रखने के लिए गर्म कपडे भी निकल लिए हैं। लेकिन केवल गर्म कपडे पहनने से और गर्म ब्लैंकेट में सोने से मात्र से ही हमें गर्मी नहीं मिलती है। सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने लिए सही मात्रा में न्यूट्रीयेंट्स की जरुरत होती है जिससे आप इन सर्दियों में भी स्वस्थ रहें। इसलिए आपको जंक फूड्स को छोड़कर नट्स और बीज आदि को अपने खाने पीने में इस्तेमाल करना चाहिए जिससे आपको शरीर के लिए जरुरी न्यूट्रीयेंट्स मिलें और आप स्वस्थ रहें। इन नट्स और बीज में फैटी एसिड होते हैं जिनके ढेर सारे फायदे होते हैं। जाड़े के मौसम में सही खाना खाने से आप कई सारी बीमारियों से दूर रह सकते हैं और बिना किसी चिंता के सर्दियों के मौसम का आनंद ले सकते हैं। आप अपने दिन की शुरुआत कुछ हॉट मील के साथ भी कर सकते हैं, उसमें नट्स को मिलाकर। इसलिए यहाँ हम आपको कुछ नट्स और बीजों के बारे में बताने जा रहें हैं जिसे आप सर्दियों में इस्तेमाल कर सकते हैं और सर्दियों में होने वाली स्किन के सूखेपन, फटी एड़ियां और फटे होंठो से छुटकारा पा सकते हैं।

1- अलसी का बीज:

इस बीज का सेवन करने से आपको देर तक भूख नहीं लगती है और यह आपका वजन भी कम करने में मदद करता है। अलसी के बीज में ग्लूटेन नहीं होता है, कोलेस्ट्राल नहीं होता है और आपके पाचन तंत्र और आपकी हड्डियां को भी मजबूती मिलती है।

2- तिल का बीज:

तिल के बीज में हेल्दी कोलेस्ट्राल, विटामिन B1, फाइबर, हेल्दी फैट्स, कैल्शियम के अलावा और कई चीजें होती हैं। इस बीज में एंटी-कैंसर गुण भी होते हैं। तिल के बीज का इस्तेमाल करने से आपका ब्लड प्रेशर नियत्रण में रहता है, आपका हार्ट स्वस्थ रहता है और आपकी इम्युनिटी भी मजबूत रहती है। इस बीज को आप सलाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल लड्डू और चिक्की आदि में भी होता है जोकि जाड़े में आपके शरीर को गर्मी भी देते हैं।

3- बादाम:

बादाम में बहुत अधिक मात्रा में विटामिन B2, E, प्रोटीन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, और मैगनीज पाया जाता है। बादाम आपको सर्दियों के मौसम में खांसी और कफ में आराम देता है। बादाम का सेवन करने से आपका कोलेस्ट्राल लेवल नियंत्रित रहता है और इसके साथ ही आपको किडनी स्टोन की भी शिकायत नहीं होती है।

4- अखरोट:

बहुत अधिक मात्रा में विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन होने के साथ साथ अखरोट में एंटी-कैंसर गुण भी होते हैं जिसकी वजह से यह आपकी त्वचा को नमी देता है और उसमें निखार भी लाता है। अखरोट खाने से आपकी इम्युनिटी और आपकी मेमोरी ठीक रहती है और कोई भी इन्फ्लामेट्री लक्षण की संभावना नहीं होती है।

5- मूंगफली:

मूंगफली आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इसमें जिंक, फाइबर, मैग्नीशियम, प्रोटीन, विटामिन D, E, पोटेशियम के अलावा और भी कई मिनरल्स होते हैं। इसे भूनकर खाने से आपकी स्किन स्वस्थ रहती है। इसको आप गुड के साथ भी खा सकते हैं क्योंकि गुड और मूंगफली दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।

6- कद्दू का बीज:

कद्दू के बीज में फाइबर, विटामिन A, K और C की अधिकता होने की वजह से यह आपको अच्छी नींद देता है, गाल-ब्लैडर की समस्या को दूर रखता है और डायबिटीज आदि को भी होने से रोकता है। इस कुरकुरे बीज को आप आपने सूप, सलाद आदि में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

7- चिया बीज:

इस बीज में प्रचुर मात्रा में एमिनो एसिड, फाइबर आदि होते हैं जिसकी वजह से यह ह्रदय संबंधी बीमारियों को दूर रखने के अलावा डायबिटीज को भी नियंत्रित करता है। यह बीज आपके शरीर से पानी का अवशोषण करके आपके वजन को कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करने का काम करता है। इसलिए सर्दियों के मौसम में इन कुरकुरे और स्वास्दिष्ट नट्स और बीजों का सेवन करने से आपको ढेर सारे स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे। इसके अलावा जाड़े में आपको किसी भी तरह का बुखार नहीं होगा। संतुलित डाइट और इन हेल्दी आप्शन के साथ आप जाड़े के मौसम का आनंद ले सकते हैं।

दुनिया के 5 मशहूर लोग, जिनकी AIDS से हुई मौत

Friday, December 1 2017

दुनिया के 5 मशहूर लोग, जिनकी AIDS से हुई मौत

हर वर्ष एड्स के प्रति लोगों का जागरुक करने के लिए 1 दिसम्‍बर को एड्स डे मनाया जाता है। ताकि लोग इस लाइलाज बीमारी से बचके रहें। 9 जुलाई 1986 को मुंबई के एक हॉस्पिटल में एड्स के पहले मरीज के मौत हुई थी। एड्स को लेकर न सिर्फ देश में बल्कि पूरे विश्‍व में कई संगठन इस पर लोगों को जागरुक करने का काम कर रहें हैं। एड्स जैसी खतरनाक बीमारी का कोई इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। एक भारतीय अभिनेत्री की मौत भी इस बीमारी की वजह से हुई थी। मामले ने मीडिया का काफी ध्यान खींचा था। न सिर्फ ये सेलिब्रेटी बल्कि आज हम आपको ऐसे ही कुछ मशहूर लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी मौत एड्स की वजह से हुई थी। आइए जानते हैं। 80 के दशक में साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की पॉपुलर एक्ट्रेस निशा नूर के साथ रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े स्टार्स भी उनके साथ काम करना चाहते थे। उस समय निशा नूर ने कई फिल्मों में काम किया। लेकिन कहा जाता है कि उन्हें एक प्रोड्यूसर ने प्रॉस्टिट्यूशन में धकेल दिया था, जिसके बाद बदनामी के कारण उन्होंने हमेशा के लिए फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी थी। इसके कई साल बाद सड़क पर बुरे हाल में मिली थी निशा। आसपास के लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया तो पता चला कि उन्हें एड्स था। 2007 में निशा जिंदगी की जंग हार गईं। एक लीडिंग वेबसाइट के मुताबिक, जब निशा को नागोर की दरगाह के पास पड़ा पाया गया तो उनके शरीर पर कीड़े और चींटियां रेंग रही थीं। अमेरिका में जब होमोसेक्शुअलिटी को क्राइम माना जाता था, तब पाब्लो ऐसे शख्स थे, जिन्होंने खुल कर अपने गे होने की बात स्वीकार की थी। पाब्लो और उनके गे पार्टनर सीन सस्सेर एड्स से ग्रस्त थे। पाब्लो ने MTV के पॉपुलर शो The Real World: San Fransisco पर अपनी बीमारी और गे होने पर खुलकर बातें की थी। उनकी मौत 11 नवंबर 1994 को हुई थी। इस दिन उनके रियलिटी शो का आखिरी एपिसोड भी ऑन एयर हुआ था। इसके कुछ समय बाद इनके पार्टनर की भी मौत हो गई थी। जिया सारंगी इस अमेरिकन मॉडल ने दुनिया के टॉप ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग की थी। मात्र 26 साल की उम्र में इस मॉडल को एड्स हो गया। एक समय में ये मॉडलिंग जगत के शिखर तक पहुंच गई थीं। लेकिन फिर इन्हें ड्रग्स की लत लग गई, जिसकी वजह से इनके करियर का ग्राफ गिरने लगा। न्यूमोनिया की वजह से इन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया, जहां डॉक्टर्स ने इनकी बॉडी में HIV वायरस पाया। इसके कुछ समय बाद इनकी मौत हो गई।

आर्थर ऐशे

अमेरिका के महान टेनिस प्लेयर आर्थर पहले खिलाड़ी थे, जिन्होंने यूएस डेविस कप में टीम का नेतृत्व किया और यूसएस विंबलडन भी जीता। एड्स के बारे में पता चलने के बाद आर्थर ने लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करने के लिए कई कदम उठाए। 1993 में बीमारी की वजह से उनकी मौत हो गई।

रिक्की विल्सन

अमेरिकन म्यूजिक इंडस्ट्री में काफी मशहूर थे रिक्की। पॉपुलर बैंड B52 का हिस्सा रहे रिक्की गिटार बजाते थे। उन्हें अपने HIV पॉजिटिव होने की बात 1983 में पता चली। इसके दो साल बाद बीमारी से लड़ते हुए इनकी मौत हो गई।

बीमारियों से बचना है तो घर पर रखें ये नेचुरल एंटीबायोटिक्‍स, नहीं पड़ेंगे कभी बीमार

Friday, December 1 2017

बीमारियों से बचना है तो घर पर रखें ये नेचुरल एंटीबायोटिक्‍स, नहीं पड़ेंगे कभी बीमार

डाइट-फिटनेस » बीमारियों से बचना है तो घर पर रखें ये नेचुरल एंटीबायोटिक्‍स, नहीं पड़ेंगे कभी बीमार बीमारियों से बचना है तो घर पर रखें ये नेचुरल एंटीबायोटिक्‍स, नहीं पड़ेंगे कभी बीमार Diet Fitness Published: Friday, December 1, 2017, 11:30 एंटीबायोटिक्स को लगभग सभी लोग जानते हैं कि जब बुखार, ज्वर, खांसी, मलेरिया, वायरल, संक्रामण बीमारियां शरीर में ज्यादा दिनों तक रहता है, तो डॉक्टर इनका सेवन करने की सलाह देते हैं। घातक संक्रमण, बैक्टीरिया, वायरल रोगों में एंटीबायोटिक दवाईयां ही शीघ्र असर करती हैं। लेकिन इन एंटीबायोटिक दवाओं को खाने से कुछ नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। इसीलिए जितना हो सके प्राकृतिक एंटीबायोटिक दावायें खाएं, जो हमारे किचन में आसानी से मिल जाती हैं। इसे मसाले, जड़, फल, चाय, पकवान, व्यजंन, सलाद, जूस आदि के रूप में सेवन करें तो, लगभग सभी संक्रामण, वायरल, बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं। प्राकृतिक एंटीबायेटिक अन्य दवाईयों से सैकड़ों गुना ज्यादा सुरक्षित, असरदार और फायदेमंद हैं। प्राकृतिक एंटीबायोटिक अक्सर किचन में ही मौजूद नजरों के आसपास होती हैं। आइये जानते हैं किंचन में मौजूद एंटीबायेटिक के बारे में, जो कि शरीर को संक्रमण, वायरल, घातक रोगों से बचने के लिये सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। ये शरीर स्वस्थ, निरोग, तन्दुरूस्त बनाये रखने में सहायक है। प्राकृतिक एंटीबायोटिक का सेवन करने से शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। स्वस्थ शरीर के लिए प्राकृतिक एंटीबायोटिक बहुत ही महत्वपूर्ण है। 1. लहसुन लहसुन प्राकृतिक रूप से सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक का श्रोत है। लहसुन को हम रोज़ाना सब्जी, दाल, या किसी अन्य खाद्य पदार्थ में डाल कर सेवन करते हैं । इसमें एंटीबायोटिक, एंटीवायरल, एंटी-फ़ंगल और एंटीबायोटिक गुण होते हैं। लहसुन हर तरह के रोगों को नष्ट करने में फायदेमंद है। कैसे खाएं अपने खाने में लहसुन का तड़का लगा कर खाएं। इसकी कुछ कलियाँ पीस कर उबालें और चाय की तरह पीएं सर्दी लगने पर कच्ची लहसुन खाएं 2. दालचीनी यह कैंडिडा जैसे फंगल इन्फेक्शन को ख़त्म करता है शोधकर्ताओं की माने तो दालचीनी का तेल इ कोली बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम है। कैसे खाएं इसे अपने खाने में मसाले की तरह डाल कर खा सकती हैं दालचीनी चाय बना कर पियें। इसके लिए आप दालचीनी की छड़ी को ½ कप पानी में 10 मिनट के लिए उबाल लें और फिर पीएं इससे आपको आंतों के बैक्टीरिया से छुटकारा मिल जाएगा है। 3. नारियल का तेल नारियल के तेल में काफी बड़ी मात्रा में कैप्रेलिक एसिड पाया जाता है जो शरीर में होने वाले संक्रमण के प्रभाव को कम कर, उसे बढ़ने से रोकता है। यह इंफेक्शन को दूर करने के लिए प्रयोग की जानें वाली दवाओं में भी कैप्रेलिक एसिड ही पाया जाता है। इसलिए नारियल का तेल इसके लिए उपयुक्त माना गया है। कैसे खाएं अपना टूथ पेस्ट खुद बनाएं जिसमें नारियल के तेल मिलाएं जिसमें एंटीबायोटिक होता है। नारियल के तेल से आयल पुल्लिंग करें इससे मुँह के बैक्टीरिया ख़त्म हो जाएंगे। 4. एप्‍पल साइडर विनगर यह भी एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में कार्य करता है। इसे एंटीफंगल,एंटीसेप्टिक गुणों के कारण जाना जाता है जो हमारे शरीर को एल्कालाइज कर देता है। कैसे खाएं बैक्टीरिया को और बढ़ने से रोकने के लिए आप 1 चम्मच एप्‍पल साइडर विनगर को गर्म पानी में मिला कर सुबह खली पेट पीएं। यही नहीं इससे आप खुल्ला भी कर सकते हैं जिससे गाला साफ़ रहेगा इसके साथ आप शहद मिला कर भी पी सकते हैं आपको खासी में आराम मिलेगा और अगर आपको चोट लग जाये तो रुई के फैये को एप्‍पल साइडर विनगर में भिगो कर चोट पर लगाएं। 5. काइन पेपर आयुर्वेद में काइन पेपर का इस्तेमाल विभिन्न रोग-विकारों की दवाइयां बनाने में किया जाता हैं। काइन पेपर के गुणों से परिचित होने के बाद बहुत सारे लोग घरेलू औषधि के रूप में भी करने लगे हैं। यह कफ, खांसी और जुकाम को ठीक करने में बहुत फायदेमंद है। कम भूख लगना, बदहजमी, अफारा और साँस की बीमारी जैसे दमा आदि में काइन पेपर के सेवन से बहुत लाभ होता है। कैसे खाएं 2 ग्राम काइन पेपर का पाउडर, गुड़ के साथ मिलाकर खाने से जुकाम जल्द ही ठीक होता है। काली मिर्च, घी और शक्कर मिलाकर सेवन करने से आँखों के रोग ठीक होते हैं। काइन पेपर का पाउडर सूंघने से बार-बार छींकने से जुकाम से बंद नाक खुलती है, सिरदर्द भी ठीक होता है। काइन पेपर को पीसकर दही में मिलाकर गुड़ के साथ खाने से नाक से होने वाला रक्त स्राव बंद होता है 6. अंगूर के बीज अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन सी, ई पाया जाता है। लेकिन कम ही लोगों को पता होता है कि ये सेहत का खजाना भी है। कैसे खाएं अंगूर को खाने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप इसे अच्छे से पीस लें और फिर इसे खाएं। 7. अदरक अदरक एंटीबायोटिक का श्रोत है, अदरक खांसी, सांस समस्या, संक्रामण, जुकाम, सर्दी, व शरीर को आंतरिक रूप से बैक्टीरियल होने से बचाता है। कैसे खाएं अदरक का पाउडर बनाकर कांच की शीशी में रखें जोकि हर मौसम में इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही इसे छील खाएं या ऐसे ही निगल जाएँ और आप अदरक की चाय भी बना कर पी सकते हैं। 8. हल्दी हल्दी में शरीर से बैक्टीरियल को नष्ट करने की भरपूर क्षमता होती है। चोट लगने, कटने, फटने, जलने पर हल्दी दूध पीने से शरीर चोट घाव जल्दी ठीक हो जाता है। और फुन्सी, गलन, जख्म खराब होने से बचाता है। कैसे खाएं 1 कप गर्म दूध में 1 चम्मच हल्दी और 1/8 चम्मच काली मिर्च मिलाएं। संक्रमण से लड़ने में मदद करने के लिए हर 4 घंटे में इसे पीएं। 1 चम्मच शहद के साथ 1 चम्मच हल्दी मिला कर पीने से संक्रमण से लड़ने और घावों को ठीक मदद मिलती है। 9. टी ट्री आयल इसमें एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं। कैसे खाएं 1:1 अनुपात में टी ट्री आयल को मिला लें और घाव पर लगाएं इसे आखों के नीचे इस्तेमाल करते वक़्त सावधानी बरते। 10. एलोवेरा एलोवेरा के सेवन से कई तरह के रोगों को दूर किया जा सकता है। एलोवेरा औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। साथ ही एलोवेरा बढिय़ा एंटीबायोटिक और एंटीसेप्टिक के रूप में भी काम करता है। कैसे खाएं इसके लिए एलोवेरा की पट्टी लें और उसे बीच से काट लें अब इसके जेल को निकाल लें अब आप एक गिलास जूस या शहद में 1 चम्मच जेल मिला कर खा सकते हैं। इससे आपकी सर्दी ठीक हो जायेगी। इसके साथ अगर आपको कोई घाव हो जाये या आप जल जाएँ तो भी आप इस जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। English summary Natural Antibiotics to Always Keep in Your Home Many foods act as natural antibiotics and are effective in treating many health issues. Unlike the over-the-counter antibiotics, most natural antibiotics also fight viral and fungal infections. Story first published: Friday, December 1, 2017, 11:30 [IST] Dec 1, 2017 कीअन्यखबरें Please Wait while comments are loading...