Health and Fitness

कॉफी के पेस्‍ट से आंखों की सूजन और डार्क सर्किल को करें कम

Monday, October 23 2017

कॉफी के पेस्‍ट से आंखों की सूजन और डार्क सर्किल को करें कम

कल देर रात तक आपको नींद नहीं आई या कल देर तक ऑफिस का काम करने के बाद आप सोने के लिए गई। जाहिर सी बात है कि अगर नींद पूरी नहीं हुई होगी तो आंखों के आसपास तो काले घेरे बन गए होंगे, आंखे सूजी हुई लग रही होगी। इस वजह से आपका चेहरा भी सूजा हुआ लग सकता है और आप किसी बीमार व्यक्ति से कम नहीं लगते हैं। इससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल हो जाते हैं और आप काफी थके हुए भी नजर आते हैं। कुल मिलाकर आपका फेस बहुत ज्यादा डल दिखता है। बेशक आप आई शैडो या काजल से आंखो की सूजन को कम कर सकते हैं लेकिन आंखों को तुरंत आराम देने के लिए आप कॉफी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

कॉफी ही क्यों ??

अगर इसका सही तरह इस्तेमाल किया जाए, तो इससे आपको सिर पर जहां बाल नहीं है वहां बाल विकसित करने और वजन कम करने में भी मदद मिल सकती है। लेकिन कॉफी का कॉस्मेटिक उपयोग यहां खत्म नहीं होता है। यह पता चला है कि आप इससे अपनी सूजी हुई आंखों से राहत पा सकते हैं। त्वचा की समस्याओं के लिए लगाएं ये 10 दही के फेस पैक इन दिनों आंखों की थकान दूर करने के लिए टी बैग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कुछ सालों से ब्यूटी एक्सपर्ट डार्क सर्कल और चेहरे की सूजन से राहत के लिए कैफीनयुक्त पेय जैसे चाय और कॉफी भी उपयोग कर रहे हैं। आपको बता दें कि इस उपाय में आपको इन्हें पीना नहीं बल्कि थोड़ी देर के लिए आंखों के नीचे लगाना है। वास्तव में कैफीन एक वेसोडाइलेटर है जो ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है। इसीलिए ब्यूटी प्रोडक्ट्स में कॉफी का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे लगाएं कॉफी

एक चम्मच कॉफी पाउडर और दो चम्मच गर्म पानी को मिक्स कर लें और पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को आराम से आंखों के नीचे लगाएं और 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें। इसे रगड़ने से बचें, ऐसा करने से आपको नुकसान हो सकता है। वैकल्पिक रूप से आप नारियल के तेल और कॉफी का मिश्रण भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इन 6 होममेड ग्रीन टी टोनर से कीजिये एक्‍ने की छुट्टी

इस बात का रखें ध्यान

थोड़ी देर बाद ही आपको आराम मिल जाएगा और पहले की तरफ फ्रेश महसूस करेंगे। ध्यान रहे कि इस उपाय से आपको अच्छी नींद आने में मदद नहीं मिलती है और इसका इस्तेमाल हफ्ते में कम से कम एक या दो बार किया जाना चाहिए।

ब्रेस्ट को हेल्दी रखने के लिए इन 7 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें महिलाएं

Monday, October 23 2017

ब्रेस्ट को हेल्दी रखने के लिए इन 7 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें महिलाएं

आयुर्वेद चिकित्सा और कल्याण के लिए प्राचीन भारतीय प्रणाली है। अमा एक टॉक्सिन है, जो ख़राब पाचन के कारण होता है। यह माना जाता है कि अमा दोष सबसे अधिक बीमारियों का मूल कारण है, जिसमें स्तन कैंसर भी शामिल है। आयुर्वेद के डॉक्टर के अनुसार, स्तन के ऊतकों में अमा का संचय स्तन रोगों के लिए पूर्ववर्ती है। स्तन स्वास्थ्य में सुधार करने और एमा के संचय को साफ करने के लिए, डॉ. इन सात आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का उपयोग करने की सलाह देते हैं। इस ब्रेस्‍ट पैक को लगा कर बढ़ा सकती हैं ब्रेस्‍ट के साइज इसके अलावा आप अपनी डाइट को सुधारें, आराम करें और नींद पूरी करें। अपने रिश्‍तों को मजबूत बनाएं तथा अच्‍छी अच्‍छी हॉबीज़ अपनाएं। अपने इमोशन्‍स को समझें। आप चाहें तो अपनी मन की बातों को एक डायरी में लिख सकती हैं। बाजार में मिलने वाले डियोड्रेंट को ना लगाएं। अगर पसीना आता है तो उसे प्राकृतिक तरीके से साफ करें। बाजारू डियो यूज़ करने से टिशू में लेयरर्स बिल्‍डअप हो जाती हैं, जिससे ब्रेस्‍ट को नुकसान पहुंचता है। फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट के इलाज के 12 घरेलू उपाय आप चाहें तो रोजाना अपने ब्रेस्‍ट की मसाज तिल के तेल या कैस्‍टर ऑइल से कर सकती हैं। इससे ब्रेस्‍ट में गांठे नहीं पड़ती।

1) शतावरी:

डॉ भगवती के अनुसार, शतावरी जड़ी-बूटी स्तन को सुडौल और मजबूत बनाने में मदद करती है। यह एक फाइटोस्ट्रोजेन है जो नियमित रूप से उन महिलाओं के लिए निर्धारित किया जाता है जिन्हें लैक्टेटिंग की परेशानी होती है। आप को शतावरी बड़े आराम से सब्‍जी मंडी में मिल सकती है। इसे सैलेड मे डाल कर खाइये या फिर सब्‍जी बना कर प्रयोग कीजिये।

2) एलोवेरा:

आपको बता दें कि एलोवेरा के अनगिनत स्वास्थ्य फायदे हैं। इसे ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर सेल्स के विकास को रोकने के लिए जाना जाता है। डॉ. भगवती कहते हैं कि एलोवेरा को नियमित रूप से खाने से स्तन की नलिकाओं को मजबूत करने में मदद मिलती है। एलो वेरा आपको आराम से घर पर मिल सकता है। इसका जैल निकालें और ताजा ही प्रयोग करें।

3) पुनर्नवा:

इसे वैज्ञानिक नाम बोहेराविया डिफुसा से भी जाना जाता है। इस पौधे और उसके हिस्सों का उपयोग कई आयुर्वेदिक तैयारी में किया जाता है। मुख्यतः यह शरीर में जमा एमा को ख़त्म करने में सहायता करता है।

4) सौंफ़:

क्या आप जानते हैं कि खाने के बाद एक चम्मच सौंफ क्यों खाया जाता है? डॉ। भगवती कहते हैं कि सौंफ खाने से स्तन के ऊतकों में बनने वाले विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

5) यष्टिमधु:

इसमें कई शक्तिशाली कैंसर विरोधी और हार्मोन-संतुलन गुणों की वजह से इसे आयुर्वेद में एक खास जगह दी गई है। यह लसीका द्रव को साफ करता है, जिससे शरीर को स्तन के स्वास्थ्य के लिए खराब होने वाले विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

6) मेथी:

यह सुगंधित और थोड़ी कड़वी जड़ी-बूटी भारत के सभी किचन में पाई जाती है। इसके कई स्वास्थ्य फायदे होते हैं। डॉक्टर भगवती के अनुसार, आपको अपनी डायट में इसे जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि यह स्तन के ऊतक के चारों ओर एमा का निर्माण रोकती है।

7) तुलसी:

पवित्र तुलसी को भारतीय संस्कृति में कई स्वास्थ्य लाभ और धार्मिक महत्व के लिए सम्मानित किया गया है। यह सुगंधित जड़ी-बूटी, लीकोरिस की तरह, लसीका द्रव को साफ करने में मदद करती है और शरीर को एमा से छुटकारा दिलाती है।

महिलाएं यूटीआई से बचना चाहती हैं तो ज्यादा पानी पिएं

Monday, October 23 2017

महिलाएं यूटीआई से बचना चाहती हैं तो ज्यादा पानी पिएं

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, 40 से 60 प्रतिशत महिलाएं अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार यूटीआई यानि की मूत्र मार्ग संक्रमण से ग्रसित होती हैं। जबकि हर चार में से एक महिलाओं में ये संक्रमण बार- बार होते हैं, क्योंकि वो इसे लेकर सावधानियां नहीं बरतती। अगर आपको इस तरह की कोई भी समस्या होती है तो इसे अन देखा ना करें। जानिये किन लोंगो को सबसे ज्‍यादा होता है UTI पुरूषों में भी ये संक्रमण होता है लेकिन 59 साल की उम्र के बाद उन्‍हें ये समस्‍या होन शुरू होती है। इसके लिए जरूरी है कि पुरूष अपने जननांगों को साफ रखें और पेशाब जाने के बाद भी वॉश करना न भूलें। मियामी यूनिवर्सिटी में संक्रमित रोग डिवीजन के क्लिनिकल डायरेक्टर थॉमस एम. हूटन ने एक बयान में कहा है कि 'यह जानना अच्छा है कि पीने का पानी एक असहज ओर संक्रमण को रोकने का आसान और सुरक्षित तरीका है।' एक अध्ययन से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है और गुदा के अधिक पास होता है। जिसकी वजह से बैक्टीरिया को मलाशय और योनि से मूत्राशय तक पहुंचने में मदद मिलती है। जिससे पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यूटीआई अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इसलिए अधिक पानी पीने से मूत्राश्य के जरिए बैक्टीरिया को बाहर निकाला जा सकता है और ज्यादा पानी पीने से योनि से मूत्राशय में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया को भी खत्म किया जा सकता है। हूटन ने कहा है कि 'ज्यादा पानी पीने से मूत्रप्रवाह बढ़ता है और किसी भी संक्रमण के होने की संभावना कम हो जाती है। इससे बैक्टीरिया ज्यादा देर तक मूत्राशय में नहीं ठहर पाता, जो कि संक्रमण के लिए जरुरी होता है। इसके लिए 'शोधकर्ताओं ने 140 से अधिक स्वस्थ पूर्व- रजोनिवृत महिलाओं का सर्वेक्षण किया। हूटन का कहना है कि 'जिन महिलाओं ने अपने पानी का सेवन औसत रुप से बढ़ाया है उनमें यूटीआई का औसत 1.6 गुना है, जबकि जो महिलाएं कम पानी का सेवन करती हैं उनमें यूटीआई होने की संभावना 3.1 गुना है। ऐसे में संक्रमण रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करना चाहिए। ' अगर आपको हर वक्‍त यूटीआई की समस्‍या रहती है तो आप जौ का पानी, नारियल पानी और मठ्ठा भी पी सकती हैं। जौ का पानी पेट में एसिड की मात्रा को घटा कर पेट को शांति देता है और जलन को कम करता है। सही तरह के खान-पान से आप यूटीआई यानि की मूत्र मार्ग संक्रमण की समस्‍या को काफी हद तक ठीक कर सकती हैं। अगर आप स्‍ब्‍जियां खाने की शौकीन हैं तो, पालक को सलाद के साथ ताजा खाया जा सकता है या फिर जूस निकालकर और कैप्सूल के रूप में भी लिया जा सकता है। पालक के जूस और नारियल पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर इस मिश्रण को दिन में 3 बार पिये। क्‍या आप जानते हैं कि जिन लोगों को डायबटीज की समस्‍या होती है उन्‍हें भी यूटीआई की प्रॉब्‍लम बहुत ज्‍यादा होती है, इसलिये अपनी डायबिटीज को हमेशा संतुलित कर के रखें।

ये होममेड जूस इस बदलते मौसम में आपके लिए है बहुत जरूरी

Monday, October 23 2017

ये होममेड जूस इस बदलते मौसम में आपके लिए है बहुत जरूरी

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते है। अपने शरीर को फिट रखने के लिए वो की तरह की चीजों का समवन करते है। आपको हमेशा अपने शरीर का ख्याल रखने के लिए बताया जाता है। बदलते मौसम में खुशनुमा मौसम होने के साथ ही बीमारियों का आगमन भी होने लगता है। आप चाहे खुद को कितना भी बचा कर रखें, बीमारियां अपनी चपेट में ले ही लेती हैं। गुड़हल के फूल की चाय है आपकी सेहत के लिए जरूरी, जानिए 10 फायदे मौसम बदलने पर संक्रमण होने के साथ ही कई गंभीर बीमारियों के होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। जिन लोगेां का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, वो संक्रमण सहित अन्य बीमारियों की चपेट में जल्दी आते हैं। इसलिये बदलते मौसम में जरुरी है कि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाया जा सके। हरी मटर खाने से होते है ये 10 लाभ, क्या जानते है कुछ खास फलों व सब्जियों के जूस के सेवन से आप अपनी इम्यूनिटी को बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं इस बदलते मौसम में कौन से जूस हैं सेहत के लिए फायदेमंद। आज आपको बताते है कुछ ऐसे जूस के बारे में जो आपके शरीर के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। इनको पीने आपका शरीर हमेशा स्वस्थ रहेगा। आइए जानते है....

कद्दू का जूस

आपने अक्सर देखा होगा की खाने में लोग कद्दू का सेवन कम ही करते है क्योंकि ये बहुत कम लोगों को पसंद होता है। ऐसे में आपसे कहा जाए कि आपको कद्दू का जूस पीना है तो आपको अजीब लगेगा। लेकिन आपको बता दे कि बदसूरत दिखने वाला कद्दू शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। कद्दू शरीर में इम्युनिटी बढ़ाता है आपको बता दें कि कद्दू का रस पीने से शरीर में कई तरह के बदलाव आते है। जैसे ये भले ही स्वाद में अच्छा ना हो, लेकिन ये इम्यूनिटी को बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होता है। जो हमें कई बीमारियों की चपेट में आने से बचाता है।

लौकी का जूस

लौकी खाना शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। अक्सर डॉक्टर भी लौकी खाने की सलाह देते रहते है।लौकी का जूस पेट के लिए रामबाण माना जाता है। इसको पीने के इतन ने फायदे है कि इनको जानकर आप इसका रोज सेवन करने लगेंगें। पेट के रोगो को भगाती है लौकी का जूस आपके शरीर के मुख्य भाग पेट को सही रखती है। रिसर्च में पता चला है कि लगभग 90 प्रतिशत बीमारियां पेट से ही जन्म लेती हैं। यानि कि अगर किसी व्यक्ति का पेट सही है तो बीमारियां उसके आसपास भी नहीं फटक सकती है। इसलिए आजकल के बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए आप लौकी का जूस भी पी सकते हैं। इससे आपको शरीर को निरोग रहने और फिट रहने की ताकत मिलेगी। इन चीजों का करें मिश्रण अगर आपको कई सारी चीजों को एक साथ मिलाकर जूस बनाने को कहा जाए तो जाहिर उन चीजों मे मौजूद बेहतरीन तत्व आपके शरी में एक साथ जाएंगे और अच्छा फल देंगें। जी हां आप सर्दियों के फेमस और पसंदीदा सब्जियां गोभी, पालक और अजमोद की पत्तियों को पीसकर भी घर में जूस बनाया जा सकता है। सेहत रहती है फिट इन तीनो चीजों आप बराबर भागों में बांट ले और जूसर के प्रयोग से इसका जूस बना लें। आपको बता दें कि ये आरपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसका रोजाना सेवन आपके सेहत को फिट रखेगा।

गाजर का जूस

आपको पता ही होगा की जाकर खाने खून बढ़ता है। की बार आपको घर के लोगों ने भी बताया होगा। गाजर में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। गाजर के जूस के फायदे अगर आप गाजर का रोजाना सेवन करेंगें तो आपके शरीर में बीमारियां नही आ पाएंगी। आप गाजर, सेब और नाशपाकती को मिलाकर भी जूस बना सकते हैं। ये न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहतमंद भी होता है। इन चीजों को मिलाकर जूस बनाकर पीने से आपका शरीर स्वस्थ और निरोग रहेगा।

टमाटर का जूस

अगर आप टमाटर खाने के शौकीन है तो आपके लिए खुश खबरी है। टमाटर का जूस या सूप पीने से भी सेहत को कफी लाभ होता है। इसके जूस या सूप में विटामिन सी या ए प्रचुर मात्रा में होता है। इसलिए ये आपके शरीर के लिए लाभदायक होता है। शरीर के इम्यूनिटी सिस्टम स्वस्थ रखता है अगर आप चमाटर के जूस का सेवन या इसके सूप का सेवन करेंगें तो आपका इम्यूनिटी सिस्टम ठीक रहेगा। इससे आपके शरीर में संक्रमण से बचाव होता है और आप तमदुरुस्त रहते है।

जानें, शंख बजाने से हमारे शरीर को होते हैं कौन से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

Monday, October 23 2017

जानें, शंख बजाने से हमारे शरीर को होते हैं कौन से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

भारतीय हिंदू परिवार में शंख बजाना एक सुंदर प्राकृतिक कला का प्रतीक है और यह भगवान कृष्ण के साथ जुड़ा हुआ है। इसकी आवाज पर्यावरण में हानिकारक तत्वों को नष्ट करने और सकारात्मक ऊर्जा लाने में मदद करती है। कोई भी पूजा एक शंख के बिना बिना अधूरी है। शंख के आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ इसके कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हैं। हम आपको बता रहे हैं कि आपको रोजाना शंख क्यों बजाना चाहिए। गुदाशय की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं शंख बजाने से मूत्र पथ, मूत्राशय, निचले पेट, डायाफ्राम, छाती और गर्दन की मांसपेशियों के लिए बेहतर है, इससे इन अंगों की एक्सरसाइज होती है। सबसे बड़ी बात कि इससे आपके गुदे की मांसपेशियों एक्सरसाइज़ होती है। यानि इससे गुदाशय की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं आपको कई समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है, जो गुदा की मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण हो सकती हैं। प्रोस्टेट स्वास्थ्य चूंकि यह प्रोस्टेट क्षेत्र पर दबाव डालता है, यह प्रोस्टेट स्वास्थ्य में सुधार करता है और प्रोस्टेट वृद्धि को रोकने में मदद करता है। जब आप शंख बजाते हैं, तो आपके फेफड़े की मांसपेशियों का विस्तार होता है, उनकी हवाई क्षमता में सुधार होता है। थायरॉयड ग्रंथियों में सुधार शंख बजाने से आपकी थायरॉयड ग्रंथियों और वोकल कोड्स की एक्सरसाइज होती है और किसी भी स्पीच की समस्याओं को ठीक करने में मदद मिलती है। चेहरे की झुर्रियां दूर होती हैं जब आप एक शंख बजाते हैं, तो आपका चेहरे की मांसपेशियां में खिंचाव आता है, इसलिए आपको शंख बजाने से फाइन लाइन्स को अपनेआप दूर करने में मदद मिलती है। स्‍किन के रोग दूर होते हैं रात में शंख में पानी भरकर रखें और सुबह उसे अपनी त्वचा पर मालिश करें। इससे त्वचा संबंधी रोग दूर हो जाएंगे। तनाव दूर करे जिन लोगों को किसी वजह से तनाव रहता है, उन्हें भी शंख बजाना चाहिए। शंख बजाते समय दिमाग से सारे विचार चले जाते हैं। इससे तनाव काम करने में मदद मिलती है। नकारात्मकता दूर रहती है जिन घरों में शंख बताया जाता है, वहां कभी नकारात्मकता नहीं आती है। कहते हैं कि जब शंख बजाया जाता है तो ओम की ध्वनि निकलती है। दिल के दौरे से रहेंगे हमेशा दूर नियमित शंख बजाने वाले को कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा। शंख बजाने से सारे ब्लॉकेज खुल जाते हैं। इसी तरह बार-बार श्वास भरकर छोड़ने से फेंफड़े भी स्वस्थ्य रहते हैं। हकलाने वाले बच्चों से शंख बजवाया जाए, तो उनकी हकलाहट दूर हो सकती है। इन बातों का रखें ध्यान

1)

सुनिश्चित करें कि आप एक विशेषज्ञ से शंख बजाना सीखें क्योंकि लापरवाह से बजाने से कभी कभी आपके कान और आंख की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है और आपका डायाफ्राम भी टूट सकता है।

2)

एक आम गलती जो कि अधिकांश लोग करते हैं, यह है कि वे अपने नाक के बजाय उनके मुंह से श्वास डालते हैं। जब आप अपने मुंह से श्वास डालते हैं जो हवा को बरकरार रखने के लिए नहीं है, तो पेट पेट में जाता है। तो सुनिश्चित करें कि शंख बजाते समय आप हमेशा अपने नाक से श्वास डालें। ध्‍यान रखें

3)

यदि आप उच्च रक्तचाप, हर्निया या मोतियाबिंद से पीड़ित हैं, तो शंख आपको शंख बजाने से बचना चाहिए क्योंकि यह अंगों पर दबाव डाल सकता है।

दुबलेपन से परेशान है तो इन 10 चीजों का करें सेवन

Monday, October 23 2017

दुबलेपन से परेशान है तो इन 10 चीजों का करें सेवन

आपका शरीर अगर दुबला है तो आपको की तरह की परेशानिचों से गुजरना पड़ता होगा। कभी कभी तो आपको अपने दुबले शरीर के वजह से शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती होगी। ज्यादातर लोगो को आपने वजन काम करने की बात करते देखा होगा। लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो वजन बढ़ाने की बात करते हैं। ये होममेड जूस इस बदलते मौसम में आपके लिए है बहुत जरूरी ये वे लोग हैं जिन्हे भूख बहुत कम लगती है। इसलिए उनका वजन कम है या जो लोग जरूरत से ज्यादा पतले हैं। वजन बढ़ाने के लिए बाजार में कई तरह की दवाईयां आती हैं। लेकिन वजन बढ़ाने के लिए किसी प्रकार की दवाई का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे उल्टा फायदे की बजाय नुक्सान हो जाता है। इमली टेस्टी होने के साथ होती है एक औषधि, जानिए इसके फायदे प्राक़तिक आयुर्वेदिक विधि का ही प्रयोग करना चाहिए. वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाने से किसी तरह को कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। आज आपको बताएंगे कि कुछ तरीके अपनाकर आप अपना दुबला पतला शरीर स्वस्थ कर सकते है।

कार्बोहाड्रेट की मात्रा बढ़ाएं

अगर आप खाना खाने के दौरान ये ध्यान नहीं देते है कि आप क्या खा रहे है और क्या नहीं तो ये सबसे बड़ा कारण आपके शरीर के दुबले होने का। आपको खाना खाने के दौरान डायट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं। अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट, राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं। ऐसा करते हुए आप दिन में कई बार थोड़ी थोड़ी डायट ले सकते है।

नाश्ते में खाएं ये चीजें

अगर आपको अपना शरीर स्वस्थ बनाना है तो आपको नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा। इन चीजों को खाने से आपके शरीर से दुबलापन खत्म हो जाएगा और आप स्वस्थ बनेगें।

प्रोटीन की बढ़ाएं मात्रा

अगर आपको अपना दुबलापन कम करना है तो आपको शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन करते समय आपको प्रोटीनव की मात्रा बढ़ानी है। आप इसके लिए अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। बादाम,काजू का नियमित सेवन करें ऐसा करने से आपके शरीर से दुबलापन गायब हो जाता है।

च्यवनप्राश का करें सेवन

आपने देखा होगा कि घर के लोग जो काम काज करतें है वो च्यवनप्राश का सेवन जरूर करते है। इससे शरीर में ऊर्जा रहती है और शरीर से दुबलापन गायब हो जाता है। ध्यान रहे कि आपको दूध के साथ इसका सेवन करना है।

अश्वगंधा है फायदेमंद

आपने देखा होगा कि कई लोग और आयुर्वेद के जानकार अश्वगंधा को कई तरह से उपयोग करने के बारे में बताते है। आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है। 3 ग्राम दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। ऐसा करने से आपका दुबलापन कम हो जाएगा सुबह सुबह घूमना जरूरी है सुबह सुबह घूमना शरीर के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। इसलिए अगर अपना शरीर स्वस्थ रखना चाहते है ये सेहतमंद बनाना चाहते है तो आपको सुबह घूमना जरूरी है। रोज सुबह 4 किलोमीटर घूमने का नियम बनाएं। ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म भी ठीक रह्र्गा और भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये।

किशमिश खाने के फायदे

आपको अपने शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए और इससे दुबलापन हटाने के लिए किशमिश का सहारा भी लेना है। 50 ग्राम किशमिश रात को पानी में भिगो दे। सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं। दो तीन माह के प्रयोग से वजन बढेगा। आपको बता दें कि किशमिश में कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।

मलाई मिल्क क्रीम का उपयोग

आपको बता दें कि मलाई मिल्क क्रीम फैटी होती है और इसका सेवन करने से शरीर का फैट बढ़ता है। इसके साथ आप पास्ता का सेवन भी कर सकते है।

अखरोट का करें सेवन

अगर आपको अखरोट खाना अच्छा लगता है तो आपके लिए ये बहुत अच्छी बाता है। अखरोट खाने आपका फैट जरूर बढ़ेगा। ये फैट को बढ़ाने के लिए अच्छी डायट है।

केला और दूध का करें सेवन

अगर आप ये चाहते है कि आपका वजन जल्दी से बढ़ जाए तो आपको केले और दूध का सेवन करना चाहिए। आपको बता दें कि अगर आप केला खाते है तो आपका पाचनतंत्र अच्छा हो जाता है।

मोटापा घटाने वाली इन महिलाओं से जानें इनका वेट लॉस सीक्रेट

Monday, October 23 2017

मोटापा घटाने वाली इन महिलाओं से जानें इनका वेट लॉस सीक्रेट

क्या आपको पता है कि हल्का भोजन करने से आप आपने वजन को कम कर सकते हैं। जी हाँ वजन कम करने के लिए आपको खाना खाना छोड़ना नहीं है। बस सही तरीके और सही मात्रा में भोजन करना जरुरी है। अक्सर लोग वजन कम करने के चक्कर में खाना खाना बंद कर देते हैं जिसके चलते जब उनके सामने खाना आता है तो वे भूख से ज्यादा खाना खाते हैं।

1 महीने में घट जाएगा 5 किलो वजन अपनाएं ये डायट

इससे वे वजन घटाने के चक्कर में अपना वजन और बढ़ा लेते हैं। हल्का भोजन करने का यह भी मतलब नहीं है कि आप तला भुना खाने लग जाएँ। ज्यादा ऑयली खाने से भी वजन बढ़ता है। तो अब क्या किया खाया जाए जिससे पेट भी भर जाए और वजन भी ना बढे। इसके लिए आपको यह पता होना चाहिए कि एक दिन में आपको कितनी कैलरी खानी है। और आपके लिए कौन सा फैट अच्छा है और कौनसा बुरा। आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिये यह बातएंगे कि आपको क्या खाना है और क्या नहीं। आये जानते हैं कुछ महिलाओं के दृारा अपनाए गए वजन घटाने के नुस्खे।

300 कैलोरी के अंदर खाएं:

जितना हो सके 300 कैलोरी के अंदर खाएं और अपने आहार में प्रोटीन, फैट और कार्बोहाईड्रेट की बनाये रखें। यही नहीं अपने खाने के बीच में 3-4 घंटे का अंतर रखें।

फैट खाने से डरे नहीं:

आपके भोजन में कॉटेज चीज़ और फल या घर में बनी काबुली चने की चटनी, सेब के साथ बादाम का मक्खन यह सब होना चाहिए। आहार में फैट के होने की वजह से आपके शरीर में पूरा दिन फुर्ती रहती है और आप अच्छे से काम कर पाते हैं।

जंक फ़ूड ना खाएं:

जब हल्का भोजन खाने की बात आती है तो जंक फ़ूड बिलकुल ना खाएं। इसकी बजाये अपने भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें। इससे आपका पेट भी भर जाएगा साथ ही आपके शरीर में ऊर्जा भी बनी रहेगी।

वह भोजन खाएं जो पौष्टिक हो:

पैक किया हुआ भोजन ना खाएं इसके बदले में ऐसा भोजन करें जिसमें पौष्टिक तत्व हों। इसमें आप दोपहर में सलाद खा सकते हैं साथ ही शाम को बादाम और फल खा सकते हैं। यही नहीं रात में आप डार्क चॉकलेट चाय के साथ खा सकते हैं।

कम कम खाएं:

दिन कई बार खाएं लेकिन कम खाएं। जैसे दिन में छह बार थोड़ा थोड़ा भोजन करें, इससे आपको वजन घटने में मदद मिलेगी। साथ खाने से पहले पानी जरूर पीएं। खाने में आप प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें।

अधिक और अधिक फाइबर खाएं:

फलों और सब्जियों को खाने से आपके शरीर में ना सिर्फ पानी की कमी पूरी होगी बल्कि इससे शरीर में फाइबर भी पहुंचेगा। फाइबर पाचन क्रिया को ठीक रखता है। यही इससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है। फाइबर की सही मात्रा न मिल पाने से शरीर मोटापे का शिकार हो जाता है। इसीलिए अपने नाश्ते में ओट्स, केला और दलिया शामिल करें। दिन में भूख लगने पर स्नैक्स की जगह फ्रूट्स के स्नैक्स को मिप्राथकता दें। फल या सब्जी का जूस लेने के बजाए उसे साबूत ही खाएं तो ज्यादा अच्छा रहता है।

मलेरिया के प्रकोप से अपने बच्‍चे को बचाइये, जानें कैसे

Saturday, October 21 2017

मलेरिया के प्रकोप से अपने बच्‍चे को बचाइये, जानें कैसे

विश्‍व मलेरिया रिपोर्ट 2014 के अनुसार लगभग 22% भारतीय जनता मलेरिया फैलने वाली जगह पर रहती है। हमारे देश में करोड़ों की सख्‍ंया में मलेरिया से पीडित लोग रोज़ हॉस्‍पिटल में भर्ती होते हैं। जिसमें छोटे बच्‍चे जिनकी उम्र 5 से कम है, उन्‍हें सबसे ज्‍यादा खतरा होता है। ये डाटा सच मुच में दिल दहला देना वाला है।

ये जड़ी बूटियां मलेरिया से लड़ने में करेंगी आपकी मदद

मलेरिया एक गंभीर बीमारी है जो सर्दी और बुखार लगने के साथ होती है। मलेरिया बिना इलाज के जानलेवा हो सकता है। मच्छर के काटने से जहाँ से हमारी नींद खराब होती है वहीं यह पीड़ायुक्त भी होती है। मलेरिया काफी पुराना रोग है। अनेक वैज्ञानिकों ने रोग फ़ैलाने में मच्छर की भूमिका तलाशने में काफी समय लगाया। कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है।

मलेरिया के लक्षण

मलेरिया होने पर ज्यादा देर तक बुखार आता है। यह बुखार तीन-चार घंटे तक आता है। मलेरिया में सिर दर्द और उल्टी भी होती है। बुखार उतरने के बाद रोगी कमजोर महसूस करता है। अगर आपके घर में छोटे बच्‍चे हैं तो उनका ख्‍याल केवल आपको ही रखना होगा। ऐसे में वे अगर शाम को खेलने के लिये पार्क आदि में जाते हैं तो उन्‍हें मलेरिया होने का खतरा सबसे ज्‍यादा हो सकता है। आइये जानते हैं कि बच्‍चों को मच्‍छरों से कैसे बचाया जा सकता है जिससे उन्‍हें मलेरिया ना हो।

1. उचित कपड़े और जूते पहनें

मानसून के मौसम में, यह सुनिश्चित करना सर्वोत्तम है कि आपके बच्चे लंबी बांह की शर्ट और लोअर पहते हैं या नहीं। खास तौर पर तब जब वे बाहर खेलने जा रहे हों। मच्छर सबसे ज्‍यादा पैरों पर ही काटते हैं। ऐसा करने से मच्छर के काटने से बचा जा सकता है। सुनिश्चित कर लें कि आपके बच्‍चे हल्के, सूती कपड़े पहनें जो कि बहुत तंग ना हों और स्‍किन सांस ले सके।

2. अपने घर में दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें

देर शाम तक दरवाज़े और खिड़कियां खुली ना छोड़े क्‍योंकि ऐसा ना कर के आप मच्छरों और अन्य कीड़ों को अपने घर में आमंत्रित कर सकते हैं। जिससे आपके बच्चों को मलेरिया हो सकता है। या फिर आप जाली वाली खड़कियां घर में लगा सकते हैं। इससे मच्‍छर घर में नहीं आएंगे और आप आराम से बाहर की नेचुरल हवा में सांस ले पाएंगे। ऐ.सी. और पंखों का इस्तेमाल करें, ताकि मच्छर एक जगह पर न बैठें।

3. एकत्र पानी निकालें

चाहे आपके घर के बाहर या फिर घर के अंदर अगर पानी इकठ्ठा हो रहा हो तो उसे निकाल दें। पानी अगर गंदा है तो उस जगह पर मच्‍छर पनपने के चांस बहुत ज्‍यादा हो सकते हैं। नियमित रूप से vases और कूलर से पानी को बाहर निकालें और अपने आस पास की जगह को साफ रखें।

4. शाम को बाहर ना जानें दें

जितना हो सके अपने बच्‍चे को घर के अंदर ही रहने को बोलें। खासतौर पर शाम को उन्‍हें बाहर जाने से रोकें। ऐसी जगह पर मत जानें दें, जहाँ झाड़ियाँ हों क्योंकि वहाँ बहुत मच्छर होते हैं।

5. घर के अंदर मच्छर मारनेवाली दवा छिड़कें

मच्‍छर को दूर भगाने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि आप अपने घर में मच्‍छर मारने वाली दवा छिड़कें। बाहाज में कई तरह की चीजें उपलब्‍ध हैं जैसे क्‍वाइल, कार्ड या लिक्‍विड इलेक्‍ट्रिक लें, जो आपके घर को बेस्‍ट सूट करे। वहीं अगर आप कहीं बाहर जा रहे हैं तो अपने साथ स्‍प्रे या क्रीम ले कर जाएं।

6. अतीत में आपके बच्चे को मलेरिया होने पर भी सावधानी बरतें

ऐसा नहीं होता कि अगर आपको कभी पहले भी मलेरिया हो चुका है तो दुबारा आपको मलेरिया होने के चांस कम हो जाएंगे। इसलिये अगर आपके बच्‍चे के कभी मलेरिया हुआ है तो उसे अब भी सुरक्षित रखें।

तुरंत चाहिए धन और प्रसिद्धि, तो अंगूठे में पहनें चांदी का छल्ला in Hindi

Wednesday, October 18 2017

तुरंत चाहिए धन और प्रसिद्धि, तो अंगूठे में पहनें चांदी का छल्ला in Hindi

1 अंगूठा और शुक्र ग्रह

अंगूठे के नीचे का हिस्सा शुक्र का क्षेत्र माना जाता है, इसलिए अंगूठा भी शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। यह भौतिक सुख-सुविधाओं और व्यक्तिगत संबंधों को नियंत्रित करता है। इसलिए अगर आपको लग्जरी लाइफस्टाइल और खुशहाल रिलेशनशिप चाहिए तो शुक्र का शुभ स्थिति में होना आवश्यक है। एक चांदी का छल्ला आपके शुक्र को शुभ बनाने में चमत्कार कर सकता है।

2 अशुभ शुक्र के कारक

शुक्र का मित्र ग्रह बुध (बुद्धि और छ्ठी इंद्रीय), शनि (आर्थिक) और राहु (स्वास्थ्य और बीमारियां) है जो क्रमश: बुद्धि, आर्थिक स्थिति और बीमारियों का कारक होता है। इसके अलावा शत्रु ग्रहों में चंद्रमा और सूर्य भी हैं। हालांकि मंगल और गुरु के इसके साथ सामान्य संबंध हैं।

3 अशुभ शुक्र के कारक

इसलिए शुभ शुक्र के लिए इसके मित्र ग्रहों का शुभ फल में होना आवश्यक है, वहीं शत्रु ग्रहों का भी इसके साथ संतुलित भाव में होना जरूरी है। लेकिन... अगर ये सभी अच्छे भाव में हों और शुक्र अति उच्च अवस्था में हो, तो व्यक्ति का जीवन नर्क के समान हो जाता है। जी हां, सही सुना.... उच्च अवस्था का शुक्र ही सबसे बुरा फल देता है।

4 शुभ शुक्र की स्थिति

ज्यादातर ग्रह अपनी उच्च अवस्था में शुभ और नीच स्थिति में अशुभ फल फल देते हैं, लेकिन शुक्र के साथ ऐसा नहीं है। ज्योतिष के जानकारों के लिए यह नई बात नहीं होगी, लेकिन सामान्य लोगों को यह जानकर आश्चर्य होता है कि शुक्र सबसे बुरा फल अपनी उच्च अवस्था में ही देता है। इसकी भी एक खास वजह है।

5 शुभ शुक्र की स्थिति

लग्जरी लाइफ से जुड़ा होने के कारण शुक्र जब अपनी उच्च अवस्था में हो तो व्यक्ति को भोग-विलास की ओर उन्मुख करता है, बहुत अधिक उच्च होने पर यह व्यक्ति को कई बार व्यभिचार की ओर भी धकेल देता है। ऐसे में उसकी नैतिकता का पतन होता है और वह धीरे-धीरे गर्त में चला जाता है। पैसे होने के बावजूद उसे सम्मान और पारिवारिक सुख नहीं मिल पाता।

6 शुभ शुक्र की स्थिति

अपनी नीच अवस्था में भी शुक्र मिलजुला फल ही देता है और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीच का शुक्र ही सबसे अधिक शुभ फलदायी होता है। इसलिए तमाम भौतिक सुविधाओं के साथ उसका सही प्रकार से भोग कर पाने के लिए और उसके साथ खुशहाल जीवन जीने के लिए इसका सम स्थिति में होना अति आवश्यक है।

7 चांदी का छल्ला

चांदी का छल्ला जब आप अंगूठे में पहनते हैं तो यह शुक्र की हर स्थिति को नियंत्रित करता है। इसलिए अंगूठे में अगर इसे पहना जाए तो शुक्र ना अधिक उच्च और ना ही अधिक नीच अवस्था में रहता है। इस प्रकार शुक्र अपनी संतुलित या कहें सम अवस्था में रहता है और इसकी नकारात्मकता हमेशा आपसे दूर रहती है। ऐसे से आप हर प्रकार से वैभवपूर्ण और खुशहाल जीवन जीते हैं।

8 चांदी का छल्ला

लेकिन इसे पहनते हुए यह हमेशा ध्यान रखें कि बिना अभिमंत्रित किए चांदी का छ्ल्ला पहनना आपके किसी काम का नहीं होगा। मंत्र ही ग्रहों के प्रभावों को नियंत्रित करते हैं, अभिमंत्रित छल्ले में मंत्रों की शक्ति आने से ही वह अपना प्रभाव दिखा पाता है।

9 चांदी का छल्ला

इसलिए इसे पहनने से पहले हमेशा किसी जानकार ज्योतिषि से इसे अभिमंत्रित कराना ना भूलें, वरना यह कोई लाभ नहीं देगा। चांदी के अलावा अंगूठे में पहना गया अभिमंत्रित प्लैटिनम का छल्ला भी शुक्र को नियंत्रित करने में उतना ही प्रभावकारी है।

आजादी के 70 वर्षों बाद भी दीपावली के पर्व पर नही रोशन होगा यह गॉव

Saturday, October 21 2017

आजादी के 70 वर्षों बाद भी दीपावली के पर्व पर नही रोशन होगा यह गॉव

जनपद का एक ऐसा गांव आज भी विकास से बहुत दूर है। यहॉ रहने वालो को विकास की मूलभूत सुविधाओ से वंचित होना पड़ रहा है। आजादी के 70 वर्षो बाद भी दिपावली के पर्व पर नही रोशन होगा यह गॉंव। हम बात कर रहे है जनपद के जामो विकास खण्ड के ग्राम पूरे हेमसिंह के पुरवा मजरे रेशी की जहॉ के निवासी आज दिपावली के प्रकाश पर्व पर दीपक से गॉव रोशन करेगे। वैसे तो इस क्षेत्र को सदियो से नेहरू गांधी परिवार कर्म भूमी रहा है। नेहरू गांधी परिवारय भी यहॉ के परिवारिक रिश्तो की दुहाई देता रहा है। नेहरू गांधी परिवार के वारिस कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी यहॉ से सांसद है। राहुल गांधी देश ही नही विदेश मे भी यहॉ के विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे किया करते है। विकास देखने के लिए लोगो को अमेठी आने के लिए अमंत्रित भी करते है। लेकिन उनके रणनीतकारो ने उन्हे नही बताया की अमेठी मे एक ऐसा गांव है जहॉ आम आदमी को मिलने वाली मूलभूत सुविधा भी नही मिल पा रही है ओैर उस गांव मे करीब आठ से दस वर्ष पहले राजीव गांधी विद्युतीकरण परियोजना के तहत लगाये गये विद्युत पोलो पर आाज भी तार नहीं खीचे गये। उस समय राहुल गांधी की माता कांग्रेस अध्यक्ष सांसद थी उनके कार्यकाल मे ही यहॉ विद्युत पोल लगाये गये। जिन पर राहुल के दो दसको के कार्यकाल मे भी तार नही खींचे जा सके है। वैसे तो सांसद निधि को ले कर भी विपक्ष के निशाने पर राहुल गांधी रहते हैं कि सांसद निधि के धन का उपयोग उनके द्वारा नही किया जाता है । अभी हाल मे ही कांग्रेस के लोगो ने भाजपा सरकार और जिलाधिकारी पर आरोप लगाये कि सांसद निधि के द्वारा कराये जा रहे विकास कार्यो मे धन अवमुक्त करने मे रोड़ा लगाया जा रहा है। लेकिन क्षेत्र मे सांसद निधि से कराया जा रहा विकास कार्य दिखाई देता नजर नही आ रहा है। अभी हाल मे राहुल गांधी अपने सांसदीय क्षेत्र अमेठी मे भाजपा नेताओं पर कांग्रेस के द्वारा कराये गये विकास कार्यो का श्रेय लेने का आरोप लगाया। विकास कार्यो की रणनीत बनाने वाले उनके रणनीतकारो को क्यां क्षेत्र के इस गांव की याद अभी तक नही आयी। बेटी होने का दावा करने वाली केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी लोकसभा चुनाव के बाद करीब साढ़े तीन वर्ष से अमेठी मे राहुल गांधी को विकास कार्यो पर घेरती रही है और विकास कार्यो को कराने मे राहुल को फेल करार दिया है। हेम सिंह के पुरवा मजरे रेशी की महिलाओ ने स्मृति ईरानी के द्वारा चुनाव मे इस गांव के विकास करने व विद्युतीकरण कराये जाने के वादे के बाद यहॉ की समस्याओ पर ध्यान न देने के आरोप लगाये है। जबकी भाजपा नेत्री श्रीमती ईरानी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को घेरने और कांग्रेस के किले को ध्वस्त करने के लिए अभी हाल मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्य नाथ व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ अमेठी के कौहार मे एक दर्जन परियोजनाओ के लोकार्पण का कार्यक्रम किया। कार्यक्रम की रूपरेखा तय करने और विकास कार्यो की कार्ययोजना तैयार करने वालो को उक्त गांव की समस्या क्यो नहीं दिखायी पड़ी? जिससे उक्त ग्राम सभा को योजना मे शामिल नही किया गया। जबकि भाजपा नेत्री श्रीमती ईरानी का चुनावी वादा भी इस ग्राम सभा को विकास तक पहुॅचाने का रहा है, पूरा नही रेशी ग्राम सभा के पूरे हेमसिंह के पुरवा मे लगभग 300 सौ से अधिक की जनसंख्या निवास करती है। इस गांव मे पासी समाज के लोग रहते है। सुरेश पासी के राज्य मंत्री बनने के बाद लोगो आशा हुई कि शायद इस क्षेत्र का भी विकास हो, लेकिन अभी तक विकास की लौ जलती यहॉ के लोगो को नही दिखाई दी है। गांव मे प्रवेश करने के तीन रास्ते है तीनो रास्ते कच्चे है। बरसात के दिनो मे यहॉ पानी भर जाता है। यहॉ के रास्ते मे बड़ी-बड़ी झाड़ियॉ है जिनमे विषैले जन्तुओ के द्वारा काटने से कई मौते भी हो चुकी है। गांव मे जल भराव से यहॉ के लोग बरसात के दिनो मे अनेक बीमारियो से पीड़ित हो जाते है। इस गांव की समस्याओ से उब कर कई परिवार गांव से पलायन कर गये है। बचे हुए परिवार भी पलायन करने की स्थित मे है। गांव मे मिली महिलाओं ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या विद्युत न होने से बच्चो की पढ़ाई मे होती है साथ ही मोबाईल को चार्ज करने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। यहॉ के लोगो का यह भी आरोप है कि अतिपिछडे जातियों के लोग यहॉ रहते है जिसके कारण कोई नेता या अधिकारी कार्यवाही कर समस्याओ से निजात दिलवाने की कवायद नहीं करता है। आजादी के 70 दसक बीत जाने के बाद भी यहॉ के लोग दीपक की रोशनी से गांव को रोशन करने का प्रयास प्रकास पर्व पर करेगे। कांग्रेस और भाजपा अपनी आपसी लड़ाई के बजाय इस क्षेत्र के विकास के लिए कब कार्य करेगे? पार्टीयां चुनावी वादे के बजाय क्षेत्र के विकास पर कब ध्यान देने लगेगी? अमेठी के विकास के बजाए दोनो राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप- प्रत्यारोप ही करते-रहते है। विकास कार्यो से कोई सरोकार नहीं दिखई पड़ता है। आखिर कब दिपाली के पर्व पर यह गांव भी विद्युत से जलने वाले उपकरण प्रयोग कर सकेगे? जैसे अनेक प्रश्न का कोई जबाब मिलता नही दिखाई दे रहा है।

एक गाय जो अपने बच्चे की मौत का बदला लेना चाहती है, 4 साल से एक बस का कर रही है पीछा

Friday, October 20 2017

एक गाय जो अपने बच्चे की मौत का बदला लेना चाहती है, 4 साल से एक बस का कर रही है पीछा

आपने फिल्मों में या किसी के मुंह से हमेशा जानवरों के बदला लेने की कहानी जरूर सुनी होगी। कई फिल्में आपने देखी होंगी जिनमें सांप अपने दोस्त या मादा सांप के मरने के बाद मारने वाले से उसका बदला लेते है। लेकिन आप हम आपको एक ऐसे जानवर के बारे में बताएंगे जो कि हिंसात्मक नहीं है और हमारे देश में पूजा जाता है। जैसा की आप लोग जानते है कि मां-बच्चे का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल होता है। इंसान हो या जानवर अपना बच्चा सभी को प्यारा होता है। जरा सोचिए किसी मां के सामने कोई उसके बच्चे को मार डाले तो उसके दिल पर क्या गुजरेगी। यही हुआ उत्तरी कर्नाटक के एक जिले जहां एक बेकाबू बस ने गाय के बछड़े को उसके सामने ही रौंद दिया और अब ये गाय पिछले 4 सालों से हर रोज सिर्फ उसी बस का रास्ता रोकने के लिए सड़क के बीचों बीच खड़ी हो जाती है। आपको यकीन नहीं होगा पर ये सच है। उस गाय के बछड़े को इस बस ने कुचल दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी इस बात का बदला लेने के लिए ये गाय उस बस को फालो करती है। कर्नाटक की है ये घटना ये हैरान देने वाला मामला कर्नाटक के सिरसी का है जहां एक रोडवेज ने एक गाय के बछड़़े को कुचल दिया था। जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। तब देखने वालों ने बताया था कि वो गाय अपने मरे हुए बच्चे को मुंह से उठाने की नाकाम कोशिश करती रही थी। ये मामला कम से कम दो घंटे चला था। उसके बछड़़े के मौत के बाद वो गाय वहां पर बहुत देर तक बैठी रही। ऐसा लग रहा था जैसे उसको बहुत बड़ा सदमा लगा हो। मां की ममता का दुर्लभ नजारा वहां देखने को मिल रहा था और उसको देखने वाले परेशान और हैरान नजरों से उसके देख रहे थे। ऐसा लगता है कि वो गाय अपने बछड़े की मौत का बदला लेना चाहती है और इसी चक्कर में वो पिछले 4 सालों से उसी बस का पीछा करती है। बस वाले लोग और ड्राइवर भी इस बात को लेकर हमेशा हैरान रहते है कि कोई गाय भला ऐसी भी सकती है। इंसानो के लिए है एक सबक इस समय इंसानो की दुनिया में लोग एक दूसरे के प्रति इतनी नफरत भरकर जी रहें है। पर इस जानवर से इंसानो को सीखना चाहिए की प्रेम क्या होता है। अपने मां बाप को दुख पहुंचाने वाले लोग इस घटना से सबक ले सकते है। क्योंकि मां चाहे किसी की भी वो इस संसार में सबसे बड़ी होती है। इस गाय की ये सच्ची घटना लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है। इस घटना का वीडियो किसी ने बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया है तब से ये वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इसको करोड़ों लोगों ने अब तक देखा है।

उल्टी दिशा में 24 साल से चल रहा है ये आदमी, आखिर क्यों?

Friday, October 20 2017

उल्टी दिशा में 24 साल से चल रहा है ये आदमी, आखिर क्यों?

इस दुनिया में कई ऐसे लोग होते है जो अपनी अनोखी चीजों के लिए प्रसिद्ध होते है। आप भी जब इन लोगों को देखोगे तो आपको यकीन बिल्कुल भी नहीं होगा। कई बार तो कुछ लोग ऐसे काम तक करते है जिसको करने के लिए आप सोच भी नहीं सकते है। अगर हम आपसे पूछें की जब आप चलते हो तो आगे कि दिशा में चलते हो कि पीछे की दिशा में तो यकीनन आपको मेरे इस सवाल पर हंसी आएगी। क्योंकि लोग तो हमेशा आगे की तरफ ही चलते है। दुनिया में लोग ऐसे ऐसे कारनामे कर जाते हैं की उन पर यकीन करना असंभव हो जाता है कुछ लोग जन्म से ही ऐसी कला के मालिक होते है और कुछ लोग का पागलपन उनसे उल जुलूल हरकतें करवाता है। हर दिन दुनिया में कोई न कोई इंसान कुछ अलग करके रिकॉर्ड बनाता है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताएंगे जो कभी भी आगे की तरफ नहीं चलता है। जी हां चौकिए मत आइए जानते है इस अनोखे इंसान के बारे में तमिलनाडु का है ये मामला आपको बता दें कि ये अनोखा मामला तमिलनाडु का है। यहां पर रहने वाले मणि मणि थन ये कारनामा पिछले 24 साल से करते चले आ रहे है। इसको इस बात की कोई दिक्कत नहीं है कि वो ऐसा करते है। लेकिन ये सब किसी रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं किया गया है। क्या आप जानते है क्या इनके उल्के चलने का कारण तो आइए जानते है। विरोध में करना शुरु किया था ये काम आपको बता दें कि मणि मणि थन नें 1988 में हो रही आतंकवादी गतिविधियों से तंग आकर विश्व शांति के लिए यह तरीका अपनाया था उन्होंने विरोध जताने का और आतंकवादी गतिविधियों की निंदा करने का एक अनोखा ही कदम उठाया। तब से लेकर आज तक वो ऐसा करते आ रहे है। आतंकवादियों के विरोध में इन्होने ऐसा करने का फैसला लिया था। इन्होने इसके लिए तिरुपुर से चलना शुरु किया था और ऐसे ही उल्टे चलते हुए चेन्नई तक आए थे। उसके बाद से ही सुर्खियों में आए थे। मणि बताते है कि वो सफर 300 किमी का जब उन्होने तय किया था तो वो एक बहुत ही कठिन समय था और वो ये बात जानते है कि वो सफर आसान सफर नहीं था। इसके बारे में आगे बात करते हुए उन्होने बताया कि उस समय हो रही गतिविधियों से वो इतना दुखी हुए थे की उन्होने ये कदम उठाया था। ऐसा करके उनको काफी अच्छा लगा और उनको इस बात की खुशी भी है। तब से आज तक चलते है उल्टा 1988 में शुरु हुआ मणि का ये उल्टा चलने वाला सफर आज भी चल रहा है। वो बताते है कि वो विरोध में किया गया काम था जो अब आदत बन चुका है। ऐसा करने में ही उनको आसानी होती है। वो अब सीधे नहीं चल पाते है। हर काम ऐसे ही करते है मणि को ये आदत ऐसे लग चुकी है कि है कि वो अब हर काम ही उल्टा करते है। वो हमेशा बस में उल्टा चढ़ते है। सीढ़ियां भी हमेशा उल्टा ही चढ़ते है। 24 साल से वो इसी तरह से काम कर रहे है और इसी तरह से जिंदगी जी रहे है जो अपने आप में अनोखी बात है।