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A Team of members from different Universities of Korea visited DSVV

Tuesday, February 27 2018

A Team of members from different Universities of Korea visited DSVV

Home | A Team of members from different Universities of Korea visited DSVV A Team of members from different Universities of Korea visited DSVV February 27, 2018 Visits Comments Off on A Team of members from different Universities of Korea visited DSVV A team comprising of members from different Universities of Korea visited the Dev Sanskriti Vishwavidyalaya . The main purpose of the team was to know Indian culture and understand its various elements. The entire coordination of this team was done by the Korean branch of Ritanveshi Institute. According to the group members the environment of the university is prepared in such a manner that one is inspired to carry out various experiments on one’s life. The effect of lifestyle, food and drink etc. can be vividly seen in the life of the university. The team met with the teachers and students and satisfied their curiosity by putting up various questions. They also met the Pro Vice-Chancellor of the University, who apprised them of the various creative and educational programs being carried out by the University for the Growth of the Indian Culture. He said that the elements of Indian Culture can be lively seen in the University. Continuous innovative experiments are being done in the University to make yoga an integral part of life. The necessity of the time is to carry out fresh researches on its creative aspects for its renovation. कोरिया के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए दल ने का भ्रमण किया एवं भारतीय संस्कृति की जानकारी प्राप्त की। दल का मुख्य उददेश्य भारतीय संस्कृति को जानना एवं इसके तत्वों को समझना था। इस दल का सम्पूर्ण समन्वय रितन्वेशी संस्थान कोरिया ब्रांच द्वारा किया गया था। दल समूह के अनुसार देव संस्कृति का वातावरण इस प्रकार निर्मित किया गया है कि यहाँ आकर अपने जीवन पर विभिन्न प्रयोग करने हेतु प्रेरणा मिलती है इसके साथ ही यहाँ की जीवनशैली, खानपान इत्यादि को यहाँ के जीवन में घुलामिला देखा जा सकता है। दल द्वारा शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से भी मुलाकात की गयी। विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को पूछकर दल की जिज्ञासा शांत हुई। भ्रमण उपरांत मा. द्वारा सभी को शांतिकुंज व रचनात्मक कार्यक्रमों एवं भारतीय संस्कृति के विकास हेतु विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों से अवगत कराया गया। प्रतिकुलपति डाॅ.पण्डया के अनुसार में भारतीय संस्कृति के तत्वों का जीवंत रूप देखा जा सकता है इसी कारण योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाने हेतु विश्वविद्यालय में निरंतर अभिनव प्रयोग होते रहते है, आवश्यकता इस बात की है कि इसके नए-नए रचनात्मक पहलुओं पर नए सिरे से शोधकार्य किए जाए।

The Vice-Rector of Kazimierz Wielki University, Poland visited DSVV

Tuesday, February 27 2018

The Vice-Rector of Kazimierz Wielki University, Poland visited DSVV

Home | The Vice-Rector of Kazimierz Wielki University, Poland visited DSVV The Vice-Rector of Kazimierz Wielki University, Poland visited DSVV February 27, 2018 Visits Comments Off on The Vice-Rector of Kazimierz Wielki University, Poland visited DSVV Prof. Marek Macko, t he Vice-Rector of the Kazimierz Wielki University, along with his three member team, is visiting the Dev Sanskriti University (DSVV) . The team participated in the research meeting held at DSVV. It is to be noted that the teachers of DSVV have visited the Kazimierz Wielki University in the past. Besides this two students of DSVV are also participating in the process of academic exchange under Erasmus Mundus Scholarship program there. Through their better coordination, communication ability, concentration, presentation, etc. the girl students have left a deep impression at the Kazimierz Wielki University. The Honorable Pro-Vice Chancellor of DSVV, told in the meeting that research is a discipline which opens up new paths in every dimension of life. Through research, new works can be done even with the oldest of the ideas, while new ideas can be molded into suitable forms. In the second phase of the program, Prof. Macko , briefly introduced his University and spoke about all the disciplines running there. Sharing his point, he said that there are numerous programs on Music, Humanity, Tourism, Mathematics, Health, Sports, Psychology, Computers, etc. Working and researching in these areas with DSVV, new ways will open up in many other areas. Yoga and Health programs running in DSVV were also praised by him. Speaking about her University, Prof. Aniela Bekier- Jasińska, another member of the visiting team, said that the goal of her University is to impart good communication skills to children, promote polish language besides promoting self-development and provide quality education. The other two professors of the visiting team also shared their views. The team was very much impressed by the hospitality of DSVV. They were invited by the Pro-Vice Chancellor to visit the Dev Sanskriti University from time to time. This program was attended by the Heads of all the departments, the deans and all other teachers of the University. पोलेन्ड के कंजिमेडर्ज वेन्की विश्वविद्यालय के वाइस टेक्टर प्रो.मोरक मैको के साथ 3 सदस्यीय दल आया हुआ है। दल द्वारा में हो रहे शोध समागम में हिस्सा लिया गया। विदित हो कि इस विश्वविद्यालय में शिक्षकों का पूर्व में भ्रमण हो चुका है साथ ही वर्तमान में इरेस्मसपस के अंतर्गत विश्वविद्यालय की दो छात्राऐं वहाँ शैक्षणिक आदान-प्रदान की प्रक्रिया में हिस्सा ले रही है। इन छात्राओं ने बेहतर तालमेल, संवाद क्षमता, एकाग्रता, प्रस्तुतिकरण इत्यादि के माध्यम से कंजिमेडर्ज वेन्की विश्वविद्यालय में गहरी छाप छोड़ रही है। मा. ने इस समागम में बताया कि शोध एक विद्या है जिससे जीवन के हर आयाम में नए रास्ते खुलते हैं। शोध के द्वारा प्राचीन से प्राचीन विचार को लेकर नया काम हो सकता है तो वहीं नये विचारों को भी उपयुक्त साँचे में ढाला जा सकता है। कार्यक्रम के दूसरे चरण में वाईस रेक्टर ने अपने विश्वविद्यालय का परिचय दिया, इसके बाद वहाँ चलने वाली सभी विद्याओं के बारे में भी बताया। अपनी बात को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि संगीत, मानवीकी, पर्यटन, गणित, स्वास्थ्य, खेल, मनोविज्ञान, कम्प्यूटर इत्यादि पर बहुत से कार्यक्रम हंै। इन कार्यक्रमों में साथ मिलकर शोध एवं संस्कृति पर नए-नए कार्यों से अन्य बहुत से क्षेत्रों में मार्ग खुलेंगे। योग एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भी उनके द्वारा ख्ूाब सराहा गया। अपने विश्वविद्यालय के बारे में बताते हुए प्रो.अनीला जेसिंस्का ने कहा कि बच्चों से अच्छा संवाद, पोलिस भाषा को बढ़ाना, स्वयं का विकास, गुणवत्ता से परिपूर्ण शिक्षा देना ही उनके विश्वविद्यालय का लक्ष्य है। साथ में आए दोनों प्रोफेसर ने भी अपनी-अपनी बातों को बताया। आवाभगत से समस्त सदस्य प्रभावित थे। प्रतिकुलपति डाॅ. पण्ड्या द्वारा उन्हें समय-समय पर आने का न्योता दिया गया। इस कार्यक्रम में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्षों के साथ-साथ शिक्षकगण भी उपस्थित थे।

श्रीदेवी के शव का हुआ Body Embalmed, रामायण जितना पुराना है शवों को सुरक्षित रखने का ये तरीका..

Wednesday, February 28 2018

श्रीदेवी के शव का हुआ Body Embalmed, रामायण जितना पुराना है शवों को सुरक्षित रखने का ये तरीका..

Life » श्रीदेवी के शव का हुआ Body Embalmed, रामायण जितना पुराना है शवों को सुरक्षित रखने का ये तरीका.. श्रीदेवी के शव का हुआ Body Embalmed, रामायण जितना पुराना है शवों को सुरक्षित रखने का ये तरीका.. Life Updated: Thursday, March 1, 2018, 11:04 Sridevi की India आने से पहले Body Emblaming, जानें क्या है Process | Boldsky अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन के 70 घंटे के बाद लम्‍बी कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उनका शव मुंबई लाया गया। उनके शव को भारत लाने से पहले दुबई में एम्बामिंग की गई तााकि शव को सही सलामत तक अंतिम संस्‍कार के लिए घर तक पहुंचाया जाएं। बताया जा रहा है कि उनके दाह संस्‍कार से पहले भी एक खास प्रकार का केमिकल मेकअप किया जाएगा। लेकिन क्‍या आप जानते है कि लेकिन शव पर लेप लगाने की प्रक्रिया यानी एम्बाममेंट या एम्बामिंग क्या है, इसमें क्या किया जाता है और ये क्यों ज़रूरी है यानी अगर लेप न किया जाए तो शव के साथ क्या दिक्कतें हो सकती हैं? वैसे तो यह एक‍ तरह की केमिकल कोटिंग होती है जो शव को सड़ने या बदबू मारने से कुछ दिनों तक रोकता हैं। आपको जानकर हैरत होगी कि ये रामायणकाल में भी एम्‍बामिंग या एम्बाममेंट के बारे में उल्‍लेख मिलता हैं। आइए जानते हैं इस बारे में। कितने दिन तक सुरक्षित रहता है शव? एम्बामिंग से शव को अच्छी हालत में रखने के लिए शव पर किस रसायन का कितनी मात्रा में इस्तेमाल किया गया है, ये जरुरी होता हैं। आम तौर पर जो तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं, उनकी मदद से शव को तीन दिन से लेकर तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बिना एम्‍बामिंग के क्‍या? मुत्‍यु के बाद शव से अलग-अलग तरह की गैसें निकलती हैं, बैक्टीरिया का संक्रमण होता है, शव से मीथेन और हाइड्रोजन सल्फ़ाइड जैसी गैस निकलती हैं जो ना सिर्फ़ विषैली हैं और बदबू भी इन्हीं की वजह से आती है। इसके अलावा जो बैक्टीरिया निकलते हैं, वो दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर जब कभी शव को ट्रांसपोर्ट किया जाता है तो बहुत जरुरी होता है कि शव को पहले मेडिकल निगरानी में एम्बामिंग की जाएं। दो तरीकों से होता है शव लेपन विधि शव के लेपन के दो तरीके प्रचलित हैं। एक आर्टिरियल और दूसरा कैविटी। आर्टिरियल प्रक्रिया के तहत शव से खून को निकालकर कुछ विशेष तरल पदार्थ भरा जाता है। वहीं, कैविटी प्रक्रिया के तहत पेट और सीने के हिस्से को साफ करके उसमें तरल डाला जाता है। शव का लेपन करने से पहले उसे पहले कीटाणुनाशक तरल से धोया जाता है। इसके बाद, शरीर पर मसाज किया जाता है ताकि मृत्यु के बाद शव में आने वाले अकड़न को खत्म किया जा सके। एम्बामिंग मेकअप एम्बामिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को कॉस्मेटिक आधार पर तैयार किया जाता है ताकि लोग उसके अंतिम दर्शन कर सकें। इसमें एक बार फिर शव को नहलाया जाता है, कपड़े पहनाए जाते हैं, बाल ठीक किए जाते हैं और मेकअप भी किया जाता है। मिस्‍त्र है बहुत बड़ा उदाहरण शव का लेपन मृत्यु के बाद शरीर को सड़ने से बचाने के लिए किया जाता है। इसके कई तरीके हैं, जिनका इंसानी इतिहास में हजारों सालों से इस्तेमाल हो रहा है। मिस्‍त्र की पिरामिड में पाई जाने वाली मम्‍मी (सदियों से ताबूत में गड़े हुए मुर्दे )को शव लेपन विधि या एम्बामिंग के द्वारा केमिकल कोटिंग करके सुरक्षित रखा जाता था ताकि ये शव सालो साल सड़े नहीं और इंफेक्‍शन न फैलाएं। इसलिए हजारों सालों पहले ताबूत में दफन किए गए शव आज भी सुरक्षित मिलते हैं। रामायण में मिलता है उल्‍लेख रामायण में भी एम्बामिंग या शव लेपन विधि के बारे में उल्‍लेख मिलता है कि जब राम, सीता और लक्ष्‍मण के साथ अयोध्‍या छोड़ वनवास के लिए निकल जाते हैं तो राजा दशरथ की वियोग में मुत्‍यु हो जाती हैं। उस समय नगर में कोई भी राजा उपस्थित नहीं होता हैं। ऐसे में ऋषि विशिष्‍ट राजकुमार भरत के लौटकर आने और अंतिम संस्‍कार की विधि पूरी करने के तक कड़ाही के तेल से दशरथ के शव पर लेप करके शव को सुरक्षित रखने का फैसला लेते हें। Related Articles

अचानक से क्‍यूं अधिक होने लगता हैं महिलाओं को व्‍हाइट डिस्‍चार्ज?

Tuesday, February 27 2018

अचानक से क्‍यूं अधिक होने लगता हैं महिलाओं को व्‍हाइट डिस्‍चार्ज?

महिलाएं » अचानक से क्‍यूं अधिक होने लगता हैं महिलाओं को व्‍हाइट डिस्‍चार्ज? अचानक से क्‍यूं अधिक होने लगता हैं महिलाओं को व्‍हाइट डिस्‍चार्ज? Women Updated: 11:09 महिलाओं में अत्यधिक व्‍हाइट डिस्चार्ज एक साधारण बात है लेकिन कभी कभी किसी स्थितियों में यह गंभीर भी हो सकती है। कई बार महिलाएं इससे घबरा जाती है लेकिन एक बात महिलाओं की जानकारी के लिए जरुरी है कि व्‍हाइट डिस्चार्ज एक नार्मल बात है, ये कोई बीमारी नहीं है। ये वजाइना और सर्विक्स में मौजूद ग्लैंड्स एक फ्लूइड बनाती हैं, जो डिस्चार्ज के रूप में बाहर आता है - ये डिस्चार्ज डेड सेल्स व बैक्टीरिया को बॉडी से बाहर निकालने का काम करता है, जिससे युटेरस व पेल्विस सुरक्षित रहते हैं जो दर्शाता है कि शरीर के अंदर मौज़ूद ग्लैंड अच्छी तरह काम कर रहे हैं और हार्मोन्स बनने की प्रक्रिया भी साधारण तरीके से चल रही है। लेकिन अधिक वजाइनल डिस्चार्ज कई बार किसी इंफेक्शन या किसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है। आइए जानते है कि किन शारीरिक बदलावों के कारण व्हाइट डिस्चार्ज होता है। ऐसे ही कुछ कारण हैं- ओव्युलैशन ओव्युलैशन के समय शरीर में प्रोजेस्टरोन का स्तर बढ़ जाता है जिसकी वजह से वजाइना से भारी और लगातार डिस्चार्ज होता रहता है। प्रजनन करने के लिहाज से यह एक स्वस्थ और साधारण प्रक्रिया है। इसी वजह से पीरियड्स से कुछ दिनों पहले महिलाओं को पारदर्शी डिस्चार्ज दिखायी पड़ता है जो कई दिनों तक होता रहता है। सेक्सुअल उत्तेजना अच्छे इंटरकोर्स के लिए प्राकृतिक रुप से वजाइना डिस्चार्ज के रुप में एक लुब्रिकेंट का निर्माण किया जाता है। सेक्स के लिए उत्तेजित करने वाले हार्मोन्स ही इस सफेद डिस्चार्ज का निर्माण करते हैं। कई बार यह डिस्चार्ज बहुत अधिक हो सकता है। प्रेगनेंसी प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाले हार्मोनल बदलावों के कारण यह डिस्चार्ज काफी अधिक भी हो सकता है। भले ही आपको यह अच्छा न लगे लेकिन इसका एक अनजाना-सा फायदा भी है। जी हां, यही डिस्चार्ज आपको मूत्र विकारों से बचाता है जिनकी संभावना प्रेगनेंसी के दौरान काफी बढ़ जाती है। यह अच्छे बैक्टेरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है। यही नहीं लेबर से पहले डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ भी सकती है जो नॉर्मल डिलिवरी में मददगार होता है। बस प्रेगनेंसी के दौरान यह चिंता का कारण तब बनता है जब डिस्चार्ज के साथ आपको खून के धब्बे और धक्के दिखायी दें। तनाव स्‍ट्रेस के कारण भी व्‍हाइट डिस्‍चार्ज की समस्‍या होती है। जिसका सेहत पर असर पड़ता है। तनाव हमारे शरीर में हार्मोन्स के असंतुलन का एक बड़ा कारण बनता है जिसकी वजह से वजाइना डिस्चार्ज हो सकता है। इन स्थितियों में डॉक्‍टर से मिलें। अगर लडकी के सफेद पानी का कलर ब्राउन, हरा या पिंक हो या फिर या इसके बनावट में क्लम्पी, फोमी, चीसी हो या स्मेल कर रहा हो, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि ये किसी इन्फेक्शन (बैक्टीरिया, यीस्ट, एस.टी.डी. इत्यादि ) का संकेत होता है। Related Articles

Holi 2018: होली पर ना लें रिस्‍क, घर पर ऐसे बनाएं होली के हर्बल कलर

Tuesday, February 27 2018

Holi 2018: होली पर ना लें रिस्‍क, घर पर ऐसे बनाएं होली के हर्बल कलर

Published: 10:19 होली के त्‍योहार को बिना रंगों के सोंचना मानो पाप समान है। होली पर लोग अपनी खुशी जताने के लिये ढेर सारे रंगों का इस्‍तेमाल करते हैं जो कभी - कभी उनके साथ-साथ उनके प्रियजनों पर भी भारी पड़ जाता है। होली के रंगों में इतनी खतरनाक मिलावट होने लगी है कि यह ना सिर्फ इंसान की स्‍किन पर ही बल्‍कि शरीर के नाजुक अंगों पर भी अपना जहर छोड़ देते हैं। यदि अप बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंग से त्योहार सेलिब्रेट करते हैं तो यह सेहत बिगाड़ सकता है। आंख, नाक और मुंह में केमिकल और कलर जाने से परेशानी पैदा हो सकती है। होली में सिंथेटिक और केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल करने की बजाय हर्बल रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। हर्बल रंग त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और एक बार पानी से धोने पर साफ हो जाते हैं। अक्सर सूखे गुलाल में एस्बेस्टस या सिलिका मिलाई जाती है जिससे अस्थमा, त्वचा में सक्रंमण और आंखों में जलन की शिकायत हो सकती है। गीले रंगों में आम तौर पर जेनशियन वायोलेट मिलाया जाता है जिससे त्वचा का रंग प्रभावित हो सकता है और डर्मेटाइटिस की शिकायत हो सकती है। चमकीले गुलाल में एल्युमिनियम ब्रोमाइड मिलाया जाता है जो कैंसर उत्पन्न कर सकता है। हम सब की यही कोशिश होनी चाहिए कि हम खुद ही ऐसे रंगों को न खरीदते हुए घर पर ही प्राकृतिक रंग तैयार कर लें। होली आने में कुछ ही दिन रह गए हैं, ऐसे में आप चाहें तो घर पर ही कुछ सामग्रियां इकठ्ठी करना शुरु कर दें जैसे चुकंदर, मेहंदी और रंग-बिरंगी सब्‍जियां तथा फूल आदि। जी हां दोस्‍तों इन रंगों को बनाने में बिल्‍कुल भी समय नहीं लगता है तथा इसमें लगने वाली सामग्री भी आसानी से घर में ही मिल जाती है। चलिए जानते हैं इनको बनाने की विधी- 1. पीला रंग पीला रंग बनाने के लिए आपको दो चम्‍मच हल्‍दी पाउडर में दोगुना बेसन मिलाने की जरुरत है। यह तो हम सब जानते हैं कि हल्‍दी और बेसन त्‍वचा के लिए बहुत लाभकारी हैं। इसको नहाते समय उबटन के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा हल्‍दी को आप आंटा, मैदा, आरा रोट पाउडर, मुल्‍तानी मिट्टी और टेल्‍कम पाउडर के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। 2. नारंगी रंग इसको बनाने के लिए 12 बड़े प्‍याजों को आधे लीटर पानी में उबाल लें और छील लें। आप देखेगें की पानी नारंगी रंग का हो चुका होगा। इसके अलावा टेसू के फूलों को रात भर पानी में भिगोएं रखने पर पीला-नारंगी रंग उपलब्‍ध होगा। 3. हरा रंग इस रंग को बनाने के लिए हरें रंग की पत्‍तियों की जरुरत पडेगी। पालक, धनिया, पुदीना, टमाटर या फिर ऐसी ही कुछ हरी पत्‍तियों का पानी के साथ पेस्‍ट बना कर उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा चार चम्‍मच मेंहदी को दो लीटर पानी के साथ मिला कर गीला रंग बनाया जा सकता है। 4. मैजेंटा रंग मैजेंट रंग बनाने के लिए चुकंदर के कुछ टुकड़ों को एक कप पानी में उबाल लीजिए और फिर अगले दिन इससे होली खेलें। इसके साथ ही पानी में 10-15 प्‍याज़ के छिलकों को उबाल लें और जब आपको पिंक या नांरगी रंग मिल जाए तो पानी में से प्‍याज के छिलकों को निकाल लें। 5. सूखा रंग कैसे बनाएं अगर आपको अबीर या गुलाल जैसा टेक्‍सचर चाहिये तो चावल के आटे में फूड कलर मिला लीजिए और इसमें दो छोटा चम्मच पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इसे सूखने के लिए छोड़ दें और फिर इसे मिक्सर में पीस लीजिए, इससे यह पाउडर बन जाएगा और इससे होली खेलें। 6. लाल रंग दो छोटे चम्मच लाल चन्दन पावडर को पांच लीटर पानी में डालकर उबालें। इसमें बीस लीटर पानी और डालें। अनार के छिलकों को पानी में उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है। 7. नीला रंग जामुन को बारीक पीस लें और पानी मिला लें। इससे बहुत ही सुन्दर नीला रंग तैयार हो जाएगा। Related Articles

'बागी 2' में इस फिटनेस मंत्रा से टाइगर श्रॉफ ने पाई फिट बॉडी और टोंड मसल्‍स

Tuesday, February 27 2018

'बागी 2' में इस फिटनेस मंत्रा से टाइगर श्रॉफ ने पाई फिट बॉडी और टोंड मसल्‍स

डाइट-फिटनेस » 'बागी 2' में इस फिटनेस मंत्रा से टाइगर श्रॉफ ने पाई फिट बॉडी और टोंड मसल्‍स 'बागी 2' में इस फिटनेस मंत्रा से टाइगर श्रॉफ ने पाई फिट बॉडी और टोंड मसल्‍स Diet Fitness Published: 13:00 हाल ही में बागी 2 का ट्रेलर रिलीज हुआ हैं, जिसमें टाइगर श्रॉफ की फिट बॉडी और बेहतरीन मसल्‍स की काफी तारीफ हो रही हैं। टाइगर जितना अपनी एक्टिंग स्किल्‍स पर काम करते हैं, उतना ही वो अपनी फिटनेस के लिए काफी सजग हैं। टाइगर खुद को फिट रखने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाने के साथ ही संतुलित फूड डाइट को भी फॉलो करते हैं। इस फिल्‍म में अपनी शानदार बॉडी को फ्लॉन्‍ट करने के लिए उन्‍होंने 5 किलो वजन भी बढ़ाया हैं। टाइगर अपनी फिट बॉडी और टोंड मसल्‍स के लिए हफ्ते के सातों दिन बॉडी के अनुसार अलग अलग तरह की एक्‍सरसाइज करते हैं। आइए जानते हैं कि बागी 2 में इतनी बेहतरीन फिजिक्‍स पाने के लिए उनका फिटनेस और डाइट प्‍लान। Day 1 सोमवार को वह 85 किलो वजन के साथ पुल-अप्स और पुल डाउन का अभ्यास करते हैं। इसके अलावा पीठ के वर्कआउट के लिए वह वन-आर्म डंबल रोल्स (100 kg) की प्रैक्टिस करते हैं। Day 2 मंगलवार का दिन चेस्ट वर्कआउट के लिए होता है। इसमें फ्लैट बेंच, इनक्लाइन बेंच, डंबल प्रेस जैसे एक्सरसाइजेज शामिल हैं। Day 3 बुधवार को वह पैरों के लिए एक्सरसाइज करते हैं। इसके लिए वह स्क्वाट्स, हैमस्ट्रिंग्स, स्टेप-अप्स और बेयरबॉल्स का अभ्यास करते हैं। Day 4 बाहों के लिए लिए टाइगर वृहस्पतिवार को एक्सरसाइज करते हैं। इस दिन वह ओलंपिक बेयरबेल कर्ल्स, डंबल कर्ल्स, रिवर्स कर्ल्स, क्लोज कर्ल्स, क्लोज ग्रिप बेयरबेल्स, प्रेस डाउन्स और स्कल क्रैशर्स का अभ्यास करते हैं। Day 5 टाइगर कंधों के लिए शुक्रवार को वर्कआउट करते हैं। इसमें नी एंड शोल्डर प्रेस, मिलिट्री प्रेस, डंबल्स का इस्तेमाल करते हुए लेटरल रेजिंग आदि एक्सरसाइज शामिल होते हैं। Day 6 शनिवार को वह डेड लिफ्ट्स, स्क्वाट्स, पुशअप्स जैसे वर्कआउट करते हैं। Day 7 एब्स के वर्कआउट के लिए रविवार का दिन निश्चित होता है। इसके लिए टाइगर क्रंचेज, हैंगिंग रिवर्स क्रंचेज, वजनदार रिवर्स क्रंचेज जैसे वर्कआउट करते हैं डाइट प्‍लान टाइगर सिगरेट और एल्‍कोहल से दूर रहते हैं। प्रोटीन डाइट के लिए वो चिकन और अंडा जरुर खाते हैं। नाश्ते नें टाइगर 8 एग व्हाइट्स ओटमील के साथ लेते हैं। लंच से पहले स्नैक्स में वह ड्राइ फ्रूट्स और प्रोटीन शेक लेते हैं। उनके लंच में ब्राउन राइस, चिकन और उबली हुई सब्जियां शामिल होती हैं। वहीं डिनर में वह मछली और ब्रोकली खाते हैं। ताइक्‍वांडो और किक बॉक्सिंग टाइगर ब्रूस ली के बहुत बड़े फैन हैं वह उन्हें फॉलो करते हुए ताइक्वांडो की ट्रेनिंग भी ले चुके हैं। वह रोजाना किक बॉक्सिंग और फुटबॉल की भी प्रेक्टिस करते हैं। इसके साथ ही वो अपनी डाइट का खास ख्‍याल रखते हैं। Related Articles

Holi 2018 : ब्रांडेड कपड़ों में लग गया होली का रंग! टेंशन नॉट इन घरेलू तरीकों से हटाएं..

Monday, February 26 2018

Holi 2018 : ब्रांडेड कपड़ों में लग गया होली का रंग! टेंशन नॉट इन घरेलू तरीकों से हटाएं..

Updated: Tuesday, February 27, 2018, 9:27 [IST] Subscribe to Boldsky अगर होली में रंग नहीं तो कुछ भी नहीं हैं, बिना रंगों का कैसा त्‍योहार? होली के पर्व पर रंग न लगे तो त्यौहार का मजा नहीं आता, लेकिन कई बार यह रंग आपके लिए समस्या का कारण बन जाते है। रंग होली का मजा दोगुना कर देते हैं, लेकिन होली के बाद कपड़ों से होली का रंग उतारना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता हैं। खासकर अगर गलती से रंग नए और सफेद रंग के कपड़ों पर गिर जाए तो। होली खेलते समय कोई भी रंगों के दुष्प्रभावों के बारे में नहीं सोचता। जिसका जहां मन करता है, जैसे मन करता है वहीं रंग लगा देता, लेकिन ये रंग जब महंगे और ब्रांडेड कपड़े में गिरता है तो मजा दोगुना की जगह मंहगा पड़ जाता हैं। अगर इस होली में अगर आपके साथ कुछ ऐसा हो जाए कि आपको कपड़ों से रंगों को छुड़ाने में दिक्‍कत आ रही है तो ज्‍यादा परेशान न हों यहां हम आपको कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं जिनसे आप आराम से होली के रंग को छुड़ाकर रंग में भंग नहीं पड़ने देंगी। टूथपेस्ट अगर किसी कपडे पर रंग लग गया हो तो आप उसके लिए टूथपेस्ट का भी इस्तेमाल कर सकते है। यह हर प्रकार के दाग और रंग निकालने के लिए काफी आसान उपाय है। इसके लिए कोई बिना जेल वाला टूथपेस्ट लें और उसे कपड़े पर उस जगह लगाएं जहां रंग लगा है, अब इसे सूखने दें। सूखने के बाद कपड़े को डिटर्जेंट से साफ़ कर लें। दाग साफ़ हो जाएगा। नेल-पेंट रिमोवर क्या आप जानते है की इसकी मदद से भी कपड़ों से दागों व् रंगों को छुड़ाया जा सकता है। यह उपाय पेन की इंक हटाने के लिए अधिक कारगर होता है। इसके लिए रुई में थोडा सा नेल पेंट रिमोवर डालें और उसे दाग वाली जगह पर रगड़ें। अब इस कपड़े को सर्फ़ और पानी से साफ़ कर लें। दाग चला जाएगा। खट्टा दही या मट्ठा पान का दाग हो या होली के रंग, कपड़े को खट्टे दही या मट्ठे में भिगो दें। कुछ देर तक हलके हाथों से दाग वाली जगह को रगड़ें। देखें दाग हल्का हुआ या नहीं। हल्का होने के बाद पानी से कपड़े को साफ़ कर लें। सैंड पेपर कपड़ों पर लगे रंगों को हटाने के लिए सैंड पेपर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए कपडे पर लगे दाग़ को सैंड पेपर से रगड़ें। फिर इस कपड़े को धो दें। कपडे का दाग पूरी तरह साफ हो जाएगा। कॉर्न स्टार्च कॉर्न स्टार्च को दूध में अच्छे से मिक्स कर लें और इस पेस्ट को कपड़े पर लगाएं। कुछ देर पेस्ट कपड़ों पर लगे रहने दें और उसके बाद ब्रश से कपडे को घिसे। ऐसा करने से दाग अपने आप साफ हो जाएगा। दूध जिस कपड़े में दाग लगा हो उसे रातभर के लिए दूध में भिगो दें। अगली सुबह कपडे तो डिटर्जेंट से धो लें। धीरे-धीरे दाग हल्का हो जाएगा। बर्तन धोने वाला साबुन अगर आप चाहे तो रंग हटाने के लिए बर्तन धोने वाले साबुन का इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए रंग वाले कपड़ों को डिशवाश बार से साफ करें। उसके बाद उसे ऐसे ही रहने दें। कुछ देर बाद पानी से कपड़ा साफ़ कर लें। सभी रंग तुरंत हट जाएंगे। एल्‍कोहल एल्‍होकल पीने के अलावा दूसरे कामों में इसका उपयोग किया जा सकता हैं। आपको करना कुछ नहीं हैं बस जहां कपड़ों में होली के रंग या जहां कलर के दाग लगे हो, वहां एल्‍कोहल की कुछ बूंदे लगाकर वहां थोड़ा रगड़े और फिर डिटरर्जेंट से धो लें। Related Articles

चाहे जिस तरह की भी खुजली हो, इन 13 नुस्‍खों से तुरंत मिलेगी राहत

Monday, February 26 2018

चाहे जिस तरह की भी खुजली हो, इन 13 नुस्‍खों से तुरंत मिलेगी राहत

तंदुरुस्‍ती » चाहे जिस तरह की भी खुजली हो, इन 13 नुस्‍खों से तुरंत मिलेगी राहत चाहे जिस तरह की भी खुजली हो, इन 13 नुस्‍खों से तुरंत मिलेगी राहत Wellness Published: Monday, February 26, 2018, 15:00 क्या आप अपनी स्किन में होने वाले सूखेपन और खुजली से दिक्कत महसूस करते हैं? अगर हाँ तो आपको पता होना चाहिए कि यह कई लोगों की समस्या है। अपनी रूखी और खुजली वाली त्वचा की वजह से आप अपने रोजाना के काम से भी दूर होते हैं। त्वचा में खुजली और सूखापन कई कारणों से होता है उनमे से एलर्जी, कीड़ा काटने , स्किन इन्फेक्शन, ड्राई मौसम, दवाइयां, और कुछ डिटर्जेंट आदि मुख्य हैं। यदि आपकी त्वचा में खुजली की समस्या है तो आपको सूजन, लाल निशान पड़ना आदि जैसी दिक्कतें भी होंगी। इससे आपकी त्वचा खराब हो सकती है जो आपके लिए खतरनाक हो सकता है। अपनी त्वचा को ऐसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाने के लिए आप घरेलू उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं जिन्हें हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहें हैं। 1- बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडा त्वचा की खुजली दूर करने का सबसे आम उपाय है क्योंकि इसमें एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होता है। इसके लिए आपको एक कप बेकिंग सोडा को नहाने के पानी में मिलाकर आधा घंटे के लिए अपने ड्राई स्किन को भिगोना है। 2- नारियल तेल: नारियल तेल सदियों से त्वचा के सूखेपन को दूर करने में इस्तेमाल होता रहा है। ड्राई स्किन पर इस तेल का मसाज करने से आपको तुरंत आराम मिलता है। 3- ओटमील पाउडर: ओटमील पाउडर में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होने की वजह से यह त्वचा के सूखेपन को दूर करता है। इसके लिए एक कप ओटमील पाउडर को थोड़े से पानी में मिलाकर पेस्ट बनाएं और रोजाना ड्राई स्किन पर लगाएं। 4- तुलसी पत्ता: तुलसी पत्ता स्किन के सूखेपन और खुजली को दूर करने में आपकी मदद करता है। इसके लिए 6 तुलसी के पत्तों को पीसकर नारियल तेल में मिलाकर ड्राई स्किन पर लगाएं। 5- नींबू: नींबू में एंटी-सेप्टिक और एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होते हैं जिससे यह त्वचा की खुजली को दूर करता है। इसके लिए आप नीम्बू के रस को प्रभावित जगह पर लगाएं और फिर गुनगुने पानी से धो लें। 6- नीम का पत्ता: नीम के पत्ते में एंटी-इन्फ्लामेट्री गुण होने की वजह से यह स्किन की खुजली और सूखेपन को दूर करता है। इसके लिए आप नीम के पत्ते को पीसकर ड्राई स्किन पर रोजाना लगाएं। 7- सेब का सिरका: इसमें एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जिससे यह त्वचा के सूखेपन को दूर करता है। इसके लिए सेब के सिरके कोे नहाने के पानी में मिलाकर रोजाना अपनी स्किन को 30 मिनट तक भिगोएं। 8- सीसम के बीज का तेल: यह तेल आपकी त्वचा को पूरा पोषण देता है जिससे उसकी खुजली दूर होती है। इसके लिये इस तेल को ड्राई स्किन पर लगाकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें। 9- मिंट: मिंट में एंटी-इन्फ्लामेट्री और एंटी-सेप्टिक गुण होने के कारण यह त्वचा के सूखेपन को दूर करता है। इसके लिए इसे पीसकर प्रभावित जगह पर लगाएं। 10- ऐलोवेरा: ऐलोवेरा में एंटी-बैक्टीरियल गुण होने की वजह से यह स्किन की खुजली को दूर करता है। इसके लिए ऐलोवेरा के पत्ते से उसका जूस निकालकर अपनी स्किन पर लगाएं और इसे लगभग 15 मिनट तक 11- पुदीना का तेल: त्वचा के सूखेपन को दूर करने लिए पुदीने का तेल भी फायदेमंद होता है। इसके लिए आप इस तेल की कुछ बूंदों को नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं या फिर एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर ड्राई स्किन पर लगाएं। 12- शहद: शहद के इस्तेमाल से भी आप अपनी त्वचा की खुजली और सूखेपन को आसानी से दूर कर सकते हैं। इसके लिए आप शहद को ऑलिव ऑयल के साथ मिलाकर ड्राई स्किन वाली जगह पर लगाएं, बहुत आराम मिलेगा। 13- ऑलिव ऑयल: ऑलिव ऑयल स्किन में होने वाली उलझन को दूर करता है क्योंकि इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लामेट्री और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं। इसके लिए आप इस आयल को प्रभावित जगह पर लगाएं आपको कुछ ही दिनों में आराम मिलेगा। Related Articles

पेट में हुए अल्सर को ठीक करने के लिए खाएं ये 16 चीजें

Monday, February 26 2018

पेट में हुए अल्सर को ठीक करने के लिए खाएं ये 16 चीजें

» पेट में हुए अल्सर को ठीक करने के लिए खाएं ये 16 चीजें पेट में हुए अल्सर को ठीक करने के लिए खाएं ये 16 चीजें Diet Fitness Published: Monday, February 26, 2018, 12:00 पेट का अल्सर एक बड़ी समस्या है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। इसमें पेट के लाइनिंग के आस पास संक्रमण हो जाता है और कुछ दिनों तक इलाज न करवाने के बाद यह समस्या काफी गंभीर हो जाती है। हेलिकोबैक्टर पाइरोली नामक बैक्टीरिया के कारण पेट का अल्सर होता है। अगर आपको भी पेट का अल्सर है तो इन 16 तरह के भोजन से पेट के अल्सर से आपको राहत मिल सकती है। 1. फूलगोभी फूलगोभी में सल्फोराफेन होता है जो पेट में अल्सर उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया एच पाइलोरी को नष्ट करता है। सात दिन तक दिन में दो बार फूल गोभी खाने से पेट के अल्सर के बैक्टीरिया का प्रभाव कम हो जाता है। 2. पत्ता गोभी गोभी में एस-मेथिल मेथियोनिन होता है जो पेट के पीएच लेवल को संतुलित रखता है और पेट की लाइनिंग में सूजन की समस्या को खत्म कर पेट के अल्सर से बचाव करता है। 3. मूली मूली में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर करता है और जिंक एवं खनिज को अवशोषित करता है। नियमित सफेद मूली खाने से पेट का सूजन कम होता है और कब्ज की समस्या नहीं होती है और पेट के अल्सर में भी यह प्रभावी होता है। 4. सेब नियमित एक सेब खाने से पेट के अल्सर से प्रभावित होने की समस्या कम हो जाती है। सेब में फ्लैवोनॉयड होता है जो एच पाइलोरी नामक पेट के अल्सर के बैक्टीरिया को रोकता है। 5. ब्लूबेरी नियमित सुबह ब्लूबेरी खाने से पेट के अल्सर में यह फायदेमंद होता है। यह पोषक तत्वों से युक्त होता है जो प्रतिरक्षा तंत्र को बेहतर बनाता है और अल्सर को तेजी से ठीक होने में मदद करता है। 6. ब्लैक बेरी ब्लैक बेरी में उच्च मात्रा में फिनोलिक यौगिक होता है और यह फाइबर का भी बढ़िया स्रोत होता है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और अल्सर से बचाता है। 7. स्ट्राबेरी स्ट्राबेरी में एंटीऑक्सीडेंट होता है जो पेट की लाइनिंग को मजबूत करता है और पेट के अल्सर से सुरक्षा प्रदान करता है। नियमित एक कप स्ट्राबेरी दोपहर में स्नैक्स के रूप में खाएं। 8. शिमला मिर्च शिमला मिर्च पेट के अल्सर को दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है। शिमला मिर्च को नियमित सलाद के रूप में कच्चा खाने से यह पेट के अल्सर को ठीक करने में मदद करता है। 9. गाजर गाजर पेट की लाइनिंग को मजबूत करने के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। इसमें विटामिन ए पाया जाता है जो पेट के अल्सर से बचाता है। 10. ब्रोकली रिसर्च में पाया गया है कि ब्रोकली में कुछ ऐसे रसायन पाये जाते हैं जो पेट का अल्सर उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया को मारते हैं। ब्रोकली में सल्फोराफेन पाया जाता है जो पेट के अल्सर से बचाता है। 11. दही दही शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें प्रोबायोटिक्स, लैक्टोबैसिलस और एसिडोफिलस पाया जाता है जो पेट के अल्सर को ठीक करने में मदद करता है। 12. ऑलिव ऑयल स्टडी में पाया गया है कि ऑलिव ऑयल में फिनॉल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। यह पेट के अल्सर के बैक्टीरिया एच पाइलोरी को नष्ट कर पेट को अल्सर से बचाता है। 13. शहद शहद सिर्फ त्वचा पर निखार ही नहीं लाता बल्कि यह पेट के अल्सर के इलाज में भी बहुत प्रभावी होता है। यह पेट की लाइनिंग के पोर को खोलता है और पेट के अल्सर के बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है। 14. लहसुन पेट के अल्सर के बैक्टीरिया एच पाइलोरी को मारने में लहसुन बहुत ही फायदेमंद है। रोजाना लहसुन की दो-तीन कलियां खाने से यह पेट के अल्सर में फायदेमंद होता है। 15. ग्रीन टी बिना कैफीन के ग्रीन टी में ईसीजीसी नामक उच्च मात्रा में कैटेकिन पाया जाता है। नियमित सुबह ग्रीन टी पीने से इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट पेट के अल्सर से बचाता है। 16. लिकोरिस लिकोरिस में एंटी इंफ्लैमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होता है जो पेट की सूजन, पेट के अल्सर और पेट के कब्ज को दूर करने में मदद करता है। Related Articles

एक ही जगह पर बार बार मुंहासे क्‍यूं हो जाते हैं?

Monday, February 26 2018

एक ही जगह पर बार बार मुंहासे क्‍यूं हो जाते हैं?

» एक ही जगह पर बार बार क्‍यूं निकल आते है मुंहासे? एक ही जगह पर बार बार क्‍यूं निकल आते है मुंहासे? Wellness Updated: Monday, February 26, 2018, 13:07 क्‍या आप मुंहासों की समस्‍सा से परेशान हैं, क्‍या आपको हर चौथे दिन चेहरे पर मुंहासे निकल आते हैं और वो ही एक जगह पर बार बार! अगर आपके साथ ऐसा है तो आपकी स्किन बहुत ही संवेदनशील है और आपको अपने चेहरे की सफाई पर गौर करना चाहिए। मुहांसे अक्‍सर ज्‍यादात्‍तर तैलीय चेहरे पर ज्‍यादा होते है, इसलिए अपने खानपान में बदलाव लाकर भी आप मुहांसों की समस्‍याओं से निजात पा सकते हैं। लेकिन इसके अलावा हार्मोनल अनबैलेंस और चेहरे के पोर्स में जमी धूल मिट्टी और बैक्‍टीरिया के कारण भी चेहरे में एक जगह ही बार बार मुंहासे होते हैं। आइए जानते है इस बारे में। प्रेगनेंसी में पिम्‍पल प्रेंगनेंसी में भी हार्मोनल अनबैलेंस की वजह से चेहरे पर कई बार एक ही जगह बार बार मुंहासें हो जाते हैं। वैसे यह प्रेगनेंसी में सामान्‍य सी बात हैं। बार बार छूने के कारण? अगर आपको अपने हाथ से बार-बार चेहरे को छूने की आदत है, तो हो सकता है कि आपको बार-बार एक ही जगह पर एक्ने और पिम्पल हो सकते हैं। बार-बार छूने से त्वचा पर गंदगी और तेल रोमछिद्रों या पोर्स में जमा होने लगता है और परिणाम पिम्पल के रुप में दिखाई देने लगते हैं। तनाव की वजह से आपके चेहरे पर एक ‘स्ट्रेस एरिया' हो सकता है- एक ऐसा हिस्सा, जहां लगातार पिंपल निकलते हैं, खासकर तब, जब तनाव या किसी बीमारी के कारण आपका इम्यून सिस्टम थोड़ा कमजोर हो जाएं। ऐसा हार्मोंस की वजह से भी हो सकता है- कई बार महिलाओं को इस स्ट्रेस एरिया में हर बार उनकी मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान भी मुंहासे होते हैं। बार बार नहीं खरोंचे अगर आपको पिम्पल्स को फोड़ने,दबाने या नोंचने की आदत है तो जान ले कि उससे मुंहासे तो पूरी तरह बाहर नहीं आएंगे लेकिन बार बार मुंहासे को खुरचने से त्वचा की सूजन और बढ़ जाएगी और मुंहासें बड़े दिखाई देने लगते हैं। अपने पोर्स को दोबारा ब्लॉक होने से रोकने के लिए सैलिसिलिक एसिड ट्रीटमेंट करा सकते हैं। जिसकी मदद से एक्स्ट्रा तेल साफ करके पोर साफ रखे जा सकते हैं। इसी तरह बेंजोईल पेरोक्साइ वाले किसी उत्पाद के इस्तेमाल से त्वचा में छुपे उन बैक्टेरिया को मारा जा सकता है जिनकी वजह से पिम्पल होते हैं। अंदरुनी मुंहासें के वजह से इसके अतिरिक्त त्वचा पर उभरे मुहांसे की वजह कोई अंदरूनी मुंहासा भी हो सकता है। इन मुहांसों का केवल ऊपरी सिरा ही त्‍वचा के ऊपर दिखाई देता है और बाकी हिस्सा त्वचा के नीचे रहता है। ऐसा तब होता है जब Pores के कई हिस्से हो जाते है और वहां मौजूद ऑयल एक कोण के आकार में ऊपर उठ जाता है। Related Articles

पेट की जलन को कम करने के लिए अपनाएं ये 11 घरेलू उपाय

Saturday, February 24 2018

पेट की जलन को कम करने के लिए अपनाएं ये 11 घरेलू उपाय

Published: Saturday, February 24, 2018, 13:15 आमतौर पर ज्यादातर लोगों को पेट में जलन की समस्या होती है और फिर वे परेशान हो जाते हैं। इसके पीछे कई कारण होते हैं लेकिन पेट में अधिक अम्लता के कारण पेट में जलन शुरू हो जाती है और फिर यह जलन सीने तक पहुंच जाती है। इसके कारण सीने और पेट में व्यक्ति को परेशानी महसूस होने लगती है। पेट में जलन की समस्या कब्ज, भोजन से एलर्जी, बैक्टीरियल सिंड्रोम, अल्सर आदि के कारण होती है। इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा, तनाव, शराब पीने और खराब भोजन से भी पेट में जलन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। पेट में जलन की समस्या उत्पन्न होने पर इसके कई लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे कि सीने में जलन, कब्ज, जी मिचलाना और उल्टी, सूजन, खट्टी डकार, कफ, हिचकी आदि लक्षणों का सामना करना पड़ता है। हम आपको इस समस्या से निजात पाने के लिए कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं। 1. एप्पल साइडर विनेगर एप्पल साइडर विनेगर पेट की जलन से निजात दिलाने के लिए एक अच्छा घरेलू उपाय माना जाता है। यह पेट में अम्ल के स्तर को संतुलित करता है। दो चम्मच कच्चे साइडर एप्पल विनेगर को एक गिलास गर्म पानी में मिलाएं और इसमें शहद मिलाकर इसका सेवन करें। जरूर लाभ होगा। 2. एलोवेरा एलोवेरा पेट की जलन में ठंडक पहुंचाता है और यह सीने के जलन को भी कम करता है। भोजन से पहले आधा कप एलोवेरा जूस का सेवन करने से पेट से संबंधित समस्या नहीं होती है और यह पेट के जलन को शांत कर देता है। 3. दही दही में प्रोबायोटिक्स और हेल्दी बैक्टीरिया होता है जो अच्छे पाचन के लिए अच्छा होता है। इसलिए पेट के जलन को कम करने के लिए भोजन में दही जरूर शामिल करें। यह पेट की जलन में ठंडक पहुंचाने का कार्य करता है। 4. कोल्ड मिल्क कोल्ड मिल्क एसिडिटी में पेट को राहत प्रदान करता है और पेट के जलन को कम करता है। इसलिए ऐसी समस्या होने पर भोजन के बाद ठंडा दूध पीएं। नियमित ठंडा दूध पीने से पेट में जलन की समस्या नहीं होती है। 5. ग्रीन टी ग्रीन टी या पिपरमिंट टी में एंटी इंफ्लैमेटरी गुण होता है जो पेट को शांत रखता है। इसलिए पेट में जलन होने पर ग्रीन टी या पिपरमिंट टी का सेवन करें। यह पेट की जलन को शांत करने में मदद करता है। 6. अदरक अदरक पोषक तत्वों को अच्छी तरह अवशोषित करता है और पाचन को मजबूत बनाता है। यह पेट के जलन को दूर भगाने में मदद करता है इसलिए अदरक का सेवन करना चाहिए। 7. फल केला, पपीता और सेब में पेट की जलन को दूर भगाने के प्राकृतिक गुण पाये जाते हैं। रोजाना इनमें से एक फल खाने से पेट को राहत मिलती है। 8. कैमोमाइल टी कैमोमाइट टी में पेट की जलन को शांत करने के गुण पाये जाते हैं। दो चम्मच सूखे कैमोमाइल के फूल को गर्म पानी में मिलाएं और पांच मिनट उबालकर चान लें और शहद मिलाकर पी जाएं। 9. बादाम बादाम पेट के हानिकारक जूस को बेअसर कर देता है और पेट की जलन में राहत प्रदान करता है। भोजन के बाद पांच या छह बादाम का सेवन करने से इस समस्या में राहत मिलती है। 10. तुलसी तुलसी में औषधीय गुण पाये जाते हैं जो की जलन को तुरंत शांत कर देते हैं। बेसिल के पत्ते को पंद्रह मिनट तक उबालकर छान ले और इसमें शहद मिलाकर पीयें। 11. स्लिपरी एल्म हर्ब स्लीपरी एल्म हर्ब पेट की जलन को दूर करने का एक बेहतर घरेलू उपाय है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होता है। एक चम्मच स्लीपरी हर्ब को पानी में उबालकर दिन में दो बार पीने से राहत मिलती है। Related Articles

इन संकेतों से जाने कि आप आवश्‍कता से कम पानी पी रहें हैं..

Saturday, February 24 2018

इन संकेतों से जाने कि आप आवश्‍कता से कम पानी पी रहें हैं..

» इन संकेतों से जाने कि आप आवश्‍कता से कम पानी पी रहें हैं.. इन संकेतों से जाने कि आप आवश्‍कता से कम पानी पी रहें हैं.. Wellness Updated: Saturday, February 24, 2018, 13:34 Dehydration, डिहाइड्रेशन | पानी की कमी को ऐसे करें दूर | Expert Advice | Boldsky पानी हमारे स्वस्थ शरीर के लिए सबसे मुख्‍य तत्‍वों में से एक है जो हमें स्‍वस्‍थ बनाएं रखने के साथ बीमारियों से भी बचाता हैं। हमारा शरीर 50 से 70 प्रतिशत पानी के वजह से ही बना हैं। इसलिए हमारे शरीर में पानी की कमी के वजह से कई समस्‍याएं हमें घेर सकती हैं। आमतौर पर माना जाता है कि एक दिन में आठ गिलास के लगभग पानी पीना सेहत के लिए बेहतर जरूरी होता है, वैसे शरीर में पानी की कमी के साथ अधिकता भी अच्छी नहीं होती। हां पर पर्याप्‍त मात्रा में पानी की आपूर्ति शरीर को जरूर होनी चाहिए, जब शरीर में पानी की कमी होने लगती हैं, तो शरीर अपने आप ही कुछ संकेत देने लगता है। पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून भी साफ होता है तथा शरीर स्वस्थ रहता है। वहीं पानी की कमी हो तो डिहाइड्रेशन होता है। आइए जानते हैं कि किन संकेतों से मालूम चलता है कि हमारे शरीर में पानी की कमी हो गई हैं। कब्‍ज कुछ लोग पेट साफ न होने या फिर कब्ज के कारण परेशान रहते हैं। पानी की कमी का असर पेट पर भी पड़ता है। इससे पाचन क्रिया सही तरीके से नहीं हो पाती। इसके लिए जरूरी है कि भरपूर पानी पिएं। पानी के आभाव में आंतें साफ नहीं हो पाती है। इस वजह से कब्‍ज की समस्‍या हो जाती है। यूरिन अगर आपको यूरिन कम आता है, तो इसका मतलब यह है कि शरीर में पानी की कमी है। दिन में 6 से 7 बार यूरिन जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है, तो पानी ज़्यादा से ज़्यादा पिएं। ड्राई स्किन आप अच्छे से हर रोज़ मॉइस्चराइज़र लगाते हैं, लेकिन फिर भी आपकी स्किन ड्राई है। हाइड्रेड स्किन के लिए बहुत जरुरी है कि आप ज्‍यादा से ज्‍यादा पानी पीएं। बैचेनी या सिरदर्द अगर आपको बहुत ज़्यादा सिरदर्द होता है, खासकर की तब जब आप हिलते हैं, तो इसका मतलब यह है कि आपके शरीर में पानी की कमी हो गई हैं। मुंह का सूखापन कई लोगों का मुंह बार-बार सूखता है और फिर ही वो पानी पीते हैं। दरअसल, यह संकेत शरीर में पानी की कमी का है। इसीलिए, खुद को हाइड्रेटेड रखें। मुंह से बदबू आना पानी नहीं पीने से सांसो से बदबू आनी शुरु हो जाती है इसका असर आपकी सांसों पर पड़ता है। पानी की कमी की वजह से मुंह में लार कम उत्पन्न होती है और मुंह शुष्क और बदबूदार हो जाता है। भूख लगना भूख को प्यास के साथ कभी मिक्स ना करें। अगर आपको खाना खाकर भी भूख लगता है, तो पहले 1 गिलास पानी पिएं और फिर खाना खाएं। चक्कर आना अगर आपको बार-बार चक्कर आ रहे हैं, तो इसका मतलब यह है कि डिहाइड्रेशन की वजह से ऐसा हो सकता है इसलिए समय समय बार पानी पीएं। ज्‍वाइंट पेन पानी न पीने या शरीर में पानी की कमी के कारण अक्‍सर घुटनों और जोड़ों में दर्द की समस्‍या बनी रहती है। विशेषज्ञों की मानें तो हर व्‍यक्ति को पानी की भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए। मसल्‍स में दर्द शरीर में पानी की कमी होने से मांसपेशियों में दर्द की समस्‍या हो जाती है। अक्‍सर जिम के बाद लोग पानी सही मात्रा में नहीं पीते हैं, जिसके कारण मसल्‍स में दर्द होने लगता है। Related Articles