Health and Fitness

ज्‍यादा पानी पीने से भी होते हैं ये नुकसान, पढ़ कर देख लें

Saturday, March 10 2018

ज्‍यादा पानी पीने से भी होते हैं ये नुकसान, पढ़ कर देख लें

तंदुरुस्‍ती » ज्‍यादा पानी पीने से भी होते हैं ये नुकसान, पढ़ कर देख लें ज्‍यादा पानी पीने से भी होते हैं ये नुकसान, पढ़ कर देख लें Wellness Updated: 14:12 मनुष्य के शरीर का 70 प्रतिशत अंग पानी से मिलकर बना होता है। इसमें आश्यर्च की कोई बात नहीं है कि हमारे जीवन के लिए पानी बहुत जरूरी है। शरीर के सभी अंगों के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए और इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन को दूर करने के लिए नियमित पर्याप्त पानी पीना आवश्यक होता है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि आवश्यकता से अधिक पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। तो अगर आप यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर शरीर के लिए कितनी मात्रा में पानी पीना जरूरी होता है तो आइये जानते हैं कि हमें कितना पानी पीना चाहिए और अधिक पानी पीने के क्या परिणाम होते हैं। वाटर इनटॉक्सिकेशन क्या है? अधिक पानी पीने की लत से क्या होता है, यह बताने से पहले आपको पानी के पीछे के विज्ञान के बारे में बताते हैं। जब किशमिश को पानी में रातभर भिगोकर रखते हैं तो किशमिश सुबह तक एकदम फूल जाती है। इसी प्रकार खीरे के टुकड़े को सांद्र नमक के विलयन में डालकर रखते हैं तो यह रातभर में सिकुड़ जाता है और स्वाद में पूरी तरह नमकीन लगने लगता है। इस प्रक्रिया को ऑस्मोसिस कहते हैं। यह विलयन अर्ध-पारगम्य झिल्ली से कम सांद्रता से अधिक सांद्रता की ओर स्थानांतरित होता है जबतक कि दोनों संतुलन की अवस्था में न आ जायें। इस तरह सामान्य तौर पर जानें कि जब आप आवश्यकता से अधिक पानी पीते हैं तो यह शरीर के कोशिकाओं के भीतर की सांद्रता की तुलना में ब्लड के सोडियम की सांद्रता को अधिक पतला कर देता है। इससे जल कोशिकाओं में चला जाता है जिसकी वजह से यह खुल जाता है और विशेषरूप से मस्तिष्क के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसे वाटर प्वॉयजनिंग कहते हैं। वाटर प्वॉयजनिंग के लक्षण क्या हैं। वाटर इनटॉक्सिकेशन के कारण दिमाग की कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। तब वे खोपड़ी के आंतरिक सतह पर दबाव डालती हैं जिसकी वजह से सिरदर्द, मिचली, और उल्टी आने लगती है। इसके अन्य लक्षण हैं- ब्लड प्रेशर, आंखों से दोहरी चीजें दिखना, झटके एवं मसंपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ। वास्तव में यदि वाटर इनटॉक्सिकेशन ज्यादा हो जाता है तो इसकी वजह से इंसान कोमा में जा सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है। इसकी वजह से एथलीट और सैनिकों की मौत ज्यादा होती है क्योंकि वे वाटर इनटॉक्सिनेशन को डिहाइड्रेशन समझ बैठते हैं। अधिक पानी पीने की वजह से उनकी मौत हो जाती है। कितना पानी पीना बहुत अधिक होता है? कितना पानी पीना बहुत अधिक हो जाता है, वास्तव में यह दो कारकों पर निर्भर करता है और ये कारक हैं- आपके किडनी की निस्पंदन क्षमता और वह समय अवधि जिस दौरान आप पानी पीते हैं। सर्वप्रथम एक स्वस्थ मनुष्य की किडनी प्रति घंटे 1 लीटर पानी को फिल्टर करने की क्षमता रखती है। इसलिए यदि आप प्रति घंटे इससे ज्यादा पानी पीते है तो वाटर इनटॉक्सिकेशन के खतरे की संभावना बढ़ जाती है। और यह खतरा उन व्यक्तियों में ज्यादा बढ़ जाता है जो कि किडनी की समस्या से जूझ रहे हों या जिनकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हो। इसके अलाव पानी पीने की समय अवधि भी ज्यादा मायने रखता है। उदाहरण के तौर पर कुछ ही घंटों में 10 से 20 लीटर पानी पीने से वाटर इनटॉक्सिनेशन का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन इतना ही पानी 24 घंटे के भीतर पीने से यह खतरा नहीं होता है। हमें कितना पानी पीना चाहिए? आपको प्रतिदिन कितना पानी पीना चाहिए यह आपके शरीर के काया, आपकी सेहत की स्थिति और आपके परिश्रम के स्तर पर निर्भर करता है। लेकिन एक पुरुष को प्रतिदिन औसतन 3.7 लीटर पानी पीना चाहिए जबकि एक महिला को प्रतिदिन 2.7 लीटर पानी पीना चाहिए। Related Articles

1 नहीं 10 बीमारियों को दूर करे लौकी और अदरक का जूस

Friday, March 9 2018

1 नहीं 10 बीमारियों को दूर करे लौकी और अदरक का जूस

Published: 17:05 हर इंसान के जीवन मे एक ऐसा समय आता है जिसमे वो यह महसूस करता है कि उसे अपनी लाइफ को बेहतर बनाने के किये कुछ उपाय करना चाहिए। उसके इस विचार से उन्हें कई तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं क्योंकि वो अपने अन्दर एक पॉजिटिव लाइफस्टाइल बदलाव लाना चाहते हैं। आपको बता दें कि बिना बढ़िया सेहत के आपकी लाइफ कठिन हो जाती है चाहे आपके पास कितने भी पैसे हों या फिर आपके कितने भी व्यक्तिगत सम्बंध क्यो ना हों। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप अपनी लाइफ को स्वस्थ और बढ़िया बनाने के किये हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज को फॉलो करें। हम सभी के घरों में ऐसी बहुत सी प्राकृतिक चीजें होती हैं जिसके ढेरों स्वास्थ्य लाभ होते हैं। जानिए कैसे लौकी का जूस में अदरक मिलाकर सुबह पीने से क्या स्वास्थ्य लाभ होते हैं लेकिन सबसे पहले इसके बनाने के तरीके के बारे में बात करते हैं। बनाने का तरीका: सबसे पहले आप एक कप कटे हुए लौकी को थोड़े से पानी के साथ ग्राइंड कर लें और इसे एक गिलास में इकट्ठा कर लें फिर इसमें एक चम्मच अदरक का पेस्ट मिला दें और सुबह में नाश्ते से पहले इसका सेवन करें। इस जूस को पीने से आपको कई सारे फायदे होते हैं जिन्हें हम आपको नीचे बताने जा रहें हैं। 1- बॉडी हीट कम करता है: अक्सर मौसम के गर्म होने, हार्मोनल बदलाव होने और मेटाबोलिक क्रियाओं के असामान्य होने से व्यक्ति की बॉडी गर्म हो जाती है जिससे अपच, सिर दर्द आदि होने लगते हैं। ऐसे में आपको लौकी और अदरक के मिश्रण का जूस पीने से इससे आराम मिलता है। 2- अपच ठीक करता है: अक्सर खराब लाइफस्टाइल की वजह से लोगों को अपच की समस्या हो जाती है। ऐसे में इस जूस को पीने से अपच की दिक्कत दूर होती है क्योंकि लौकी में फाइबर अधिक मात्रा में होता है। 3- वजन कम करता है: इस जूस को पीने से आपकी मेटाबोलिक क्रियाएं तेज़ होती हैं और इसमें कम कैलोरी भी होती है। इस जूस के साथ आपको संतुलित डाइट और एक्सरसाइज भी फॉलो करना है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। 4- ब्लडप्रेशर कम करता है: आजकल हाई ब्लड प्रेशर एक आम समस्या बन चुकी है। इसलिए अगर आप लौकी और अदरक के जूस को पीते हैं तो इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कम करता है। 5- यूटीआई ठीक करता है: यूटीआई में आपके ब्लैडर में इन्फेक्शन हो जाता है, जो इस जूस का सेवन करने से दूर हो जाता है क्योंकि लौकी एक नैचुरल डाइयूरेटिक होता है जो यूरीनरी ट्रैक्ट के बैक्टीरिया को बाहर निकालता है। 6- लीवर की सूजन को ठीक करता है: ज्यादा अनहेल्दी खाना खाने, ज्यादा ड्रिंक करने और कुछ इन्फेक्शन के साथ साथ कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स की वजह से आपके लिवर में सूजन हो जाती है। ऐसे में अगर आप लौकी और अदरक का जूस पीते हैं तो इससे आराम मिलता है। 7- मांसपेशियों की मरम्मत करता है: कभी कभी ज्यादा एक्सरसाइज करने से आपकी मांसपेशियां थक जाती हैं और उन्हें पोषण की जरूरत होती है। ऐसे में आपको लौकी और अदरक के जूस का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद एन्टीआक्सीडेन्ट आपके मसल्स को रिलैक्स करता है। 8- हार्ट को स्वस्थ रखता है: हर साल भारत मे लगभग 60% लोग हृदय की बीमारी से ग्रसित होते हैं जोकि खतरनाक हो सकती है। अगर आप रोजाना लौकी और अदरक के जूस का सेवन करते हैं तो इसमें मौजूद विटामिन k और एन्टीआक्सीडेन्ट ब्लड फ्लो को बढ़िया रखता है जिससे आपका हृदय स्वस्थ रहता है। 9- मॉर्निंग सिकनेस को कम करता है: आपको बता दें कि गर्भवती महिलाओं को होने वाले मॉर्निंग सिकनेस से यह लौकी और अदरक का जूस बहुत आराम देता है क्योंकि यह जूस पेट के एसिड को उदासीन करता है और उनमें होने वाले हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित करता है। फिर भी इस जूस का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। Related Articles

OMG! ये लड़का 2 साल से दे रहा है अंडे, डॉक्टर्स भी हुए हक्‍के बक्‍के...

Friday, March 9 2018

OMG! ये लड़का 2 साल से दे रहा है अंडे, डॉक्टर्स भी हुए हक्‍के बक्‍के...

Life » OMG! ये लड़का 2 साल से दे रहा है अंडे, डॉक्टर्स भी हुए हक्‍के बक्‍के... OMG! ये लड़का 2 साल से दे रहा है अंडे, डॉक्टर्स भी हुए हक्‍के बक्‍के... Life Updated: 14:37 आपने मुर्गी, पक्षियों और कई जानवरों को अंडे देने की बात सुनी होगी, लेकिन कोई आपसे कहें कि कोई लड़का भी अंडे दे सकता हैं। फिर क्‍या कहेंगे आप.. सुनकर हंसी आ रही होगी लेकिन यह सच है एक 14 साल के लड़के के अंडे देने की बात सामने आई। जी हां ये बिल्‍कुल सही बात है, ये लड़का पिछले 2 साल से अंडे देता आ रहा हैं। फिलहाल वो डॉक्‍टर की निगरानी में हैं, डॉक्‍टर भी समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर कैसे एक लड़का अंडा दे सकता हैं। आइए जानते है इस पूरे मामले के बारे में। इंडोनेशिया का है ये मामला.. इंडोनेशिया के एक कस्बे में 14 साल का लड़का अकमल 2 सालों से अंडे दे रहा है और ये देख डॉक्टर्स भी परेशान हैं। हाल ही में एक हैरान कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें अकमल डॉक्टर्स के सामने अंडे दे रहा है। अकमल और उसके परिवार का दावा है कि पिछले 2 सालों में वो 20 अंडे दे चुका है। डॉक्टर्स भी हुए हक्‍के बक्‍के... अपनी आंखों के सामने अकमल को अंडे देते हुए देख डॉक्टर्स भी भौंचक्के रह गए। हालांकि, डॉक्टर्स का मानना है कि किसी इंसान के शरीर में ऐसे अंडे बनना नामुमकिन है। कुछ लोगों का कहना है कि ये एक ट्रिक और अकमल अपने शरीर के अंदर पहले से ही अंडे रख लेता है। एक्‍स रे तक में दिखाई दिया अंडा अकमल और उसका परिवार अपने इस दावो के साथ एक हॉस्पिटल भी पहुंचे जहां अकमल का एक्स-रे भी करया गया, एक्स-रे में अंडा भी नज़र आ रहा है, लेकिन डॉक्टर्स को अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा है। पिता ने बताई ये बातें अकमल के पिता ने डॉक्टर्स को बताया कि इससे पहले वो 18 अंडे दे चुका था। वहीं डॉक्टर्स के सामने उसने 2 अंडे और दिए। अकमल के पिता ने कहा, हमने जब पहले अंडे को फोड़कर देखा, तो पाया कि वो पूरी तरह से पीला था। जब हमने दूसरे अंडे को फोड़कर देखा तो वो पूरी तरह से सफेद था उसके अंदर कोई पीला भाग नहीं था। image source अब डॉक्टर्स कर रहे निगरानी परिवार ने बताया कि अंडे निकलने की अजीब बीमारी से उनका बेटा बहुत परेशान है। अब गावा के शेख यूसुफ हॉस्पिटल में डॉक्टर्स की एक टीम अकमल पर नजर बनाए हुए है। Related Articles

क्‍या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन की वजह से मर्दों को आता है हार्ट अटैक?

Friday, March 9 2018

क्‍या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन की वजह से मर्दों को आता है हार्ट अटैक?

हृदय-रोग » क्‍या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन की वजह से मर्दों को आता है हार्ट अटैक? क्‍या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन की वजह से मर्दों को आता है हार्ट अटैक? Heart Updated: 11:35 इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन या स्‍तंभन दोष, पुरुषों में पाई जाने वाली एक यौन समस्‍या का प्रकार हैं। जिसमें संभोग के दौरान पुरुष ज्‍यादा देर तक लिंग को उत्‍तेजित रखने में असफल रहते हैं। लेकिन आपको नहीं मालूम इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन सेक्‍सुअल प्‍लेजर में बाधा बनने के साथ ही पुरुषों के लिए एक ओर तरीके से घातक है। अक्‍सर देखा गया है कि इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन हद्धय से जुड़े रोगों का प्रारम्भिक संकेत होता हैं। जो आगे चलकर हार्टअटैक का रुप भी ले सकता हैं। उसी तरह जो लोग हद्धय रोग से पीडि़त हैं वो सही उपचार की मदद से इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन का ईलाज भी करवा सकते हैं। 10 ऐसी बुरी आदतें जो जल्‍दी बूढ़ा करती हैं आपके दिल को ये दोनों समस्‍याएं आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं क्‍यों‍कि कमांसपेशियों और रक्‍तवाहिकाओं के भीतरी परत में शिथिलता के वजह से हद्धय को रक्‍त की अपर्याप्‍त आपूर्ति होती है और लिंग में रक्‍त प्रवाह कम होता हैं। आइए जानते है कि आखिर कैसे इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन और हद्धय रोग एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन और हद्धय रोग इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन शायद हमेशा हद्धय रोग की तरफ संकेत का काम नहीं करें। हालांकि जो लोग इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन की समस्‍या से पीडि़त होते हैं उन्‍हें हद्धय रोग की जांच करने की सलाह दी जाती हैं। Healthy Drinks जो आपके दिल को रखे दुरुस्‍त कुछ पुरुषों को अधिक होता है खतरा इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन और हृदय रोग होने की प्रकिया सामान्य होती है। और इसके साथ ही इनके जोखिम कारक भी एक जैसे ही होते हैं। ये जोखिम कारक बताते हैं कि स्तंभन दोष, अर्थओस्कलेरोसिस और हृदय रोग के लिए उत्तरदायी हो सकता है। डायबिटीज जिन पुरुषों को डायबिटीज होती है, उन्हें स्तंभन दोष, हृदय रोग और रक्त प्रवाह कम होने से होने वाले कई रोगों के होने की आशंका बहुत अध‍िक होती है। उच्च कोलेस्ट्रॉल बुरे कोलेस्ट्रॉल यानी लो-डेंसिटी-लिपोप्रोटीन या एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के कारण भी अर्थओस्कलेरोसिस होने की आशंका बहुत ज्यादा होती है। धूम्रपान धूम्रपान करने से भी अर्थओस्कलेरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही यह आदत संभोग के दौरान लिंग उत्तेजना पर भी असर डालती है। उच्च रक्तचाप समय के साथ लंबे समय तक बने रहने वाला उच्च रक्तचाप धमनियों और नसों को नुकसान पहुंचाता है। इससे अर्थओस्कलेरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है। टेस्टोस्टेरोन का स्‍तर कुछ पुरुषो में टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर कम पाया जाता हैं, इन पुरुषों में इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन और हद्धय रोग होने की सम्‍भावना, सामान्‍य टेस्‍टोस्‍टेरोन स्‍तर वाले पुरुषों की तुलना में अधिक होती हैं। पारिवारिक इतिहास यदि आपके परिवार में किसी को हृदय रोग है, तो इस बात की आशंका बहुत बढ़ जाती है कि आपके स्तंभन दोष के तार भी दिल की बीमारियों तक जाते हों। यह आशंका और बढ़ जाती है यदि आपके सहोदर या माता-पिता में से किसी को कम उम्र में ही हृदय रोग तो ऐसा माना जाता है कि आपके स्तंभन दोष और हृदय रोग का कारण यह पारिवारिक इतिहास हो सकता है। बढ़ती उम्र कम उम्र में स्तंभन दोष होने के पीछे बड़ी वजह हृदय रोग हो सकता है। 50 वर्ष की आयु से कम के पुरुषों में यदि ऐसा पाया जाता है तो यह दिल की बीमारी का संकेत हो सकता है। वहीं 70 वर्ष की आयु से अध‍िक के पुरुषों में स्तंभन दोष का संबंध हृदय रोग से होने की आशंका कम होती है। अध‍िक वजन मोटापा और अध‍िक वजन दिल की बीमारियों और स्तंभन दोष दोनों की आशंका को बढ़ा देती है। अध‍िक वजन के कारण अर्थओस्कलेरोसिस और अन्य बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे आपके लिंगोत्तेजना पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। अवसाद ऐसे शोध भी सामने आए हैं, जिनमें कहा गया है कि अवसाद हृदय रोग और स्तंभन दोष होने की आशंका को बढ़ा देता है। Related Articles

क्‍या आपको भी सुबह खाली पेट चाय पीने की आदत है तो यह खबर आपके लिए हैं..

Friday, March 9 2018

क्‍या आपको भी सुबह खाली पेट चाय पीने की आदत है तो यह खबर आपके लिए हैं..

डाइट-फिटनेस » क्‍या आपको भी सुबह खाली पेट चाय पीने की आदत है तो यह खबर आपके लिए हैं.. क्‍या आपको भी सुबह खाली पेट चाय पीने की आदत है तो यह खबर आपके लिए हैं.. Diet Fitness Published: 12:30 सुबह-सुबह की चाय भला कौन मिस करना चाहता है। जब तक चाय का एक सिप ना पियो तब तक मानों दिन की शुरुआत ही नहीं होती। देश की करीब 80 से 90 फीसदी जनसंख्या सुबह उठने के साथ ही चाय पीना पसंद करती है। चाय पीना गलत नहीं है लेकिन सुबह सुबह खाली पेट चाय की आदत आपको कई समस्‍याओं का शिकार बना सकती है। हाल में हुए कुछ अध्ययनों की मानें तो खाली पेट चाय पीना एक बहुत बुरी आदत है, खासतौर पर गर्मियों में। चाय में कुछ मात्रा में कैफीन होती है और साथ ही इसमें एल-थायनिन, थियोफाइलिन भी होता है जो उत्तेजित करने का काम करते हैं। चाय अगर अत्यधिक उबाली गई हो, तो यह सेहत के लिए और भी अधिक नुकसानदायक होती है, क्योंकि इसमें कैफीन की मात्रा कहीं अधिक होती है, और यह खाली पेट सीधा प्रभाव डालती है। कई लोगों का ऐसा मानना है कि सुबह में खाली पेट ब्लैक टी पीने से सेहत अच्छी रहती है और शरीर स्वस्थ होता है लेकिन हम आपको बता दें ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये अवधारणा बिल्कुल गलत है। खाली पेट ब्लैक टी पीना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसा करने से आप मोटापे जैसी भयंकर बीमारी को निमंत्रण देतें हैं। हां, अगर आपको चाय की इतनी ही आदत है तो आप इसे सुबह के नाश्‍ते के बाद पी सकते हैं लेकिन खाली पेट चाय पीना बिल्‍कुल छोड़ दीजिये। अब आइये जानते हैं उन समस्‍याओं के बारे में जो सुबह खाली पेट चाय पीने से होती है। बिगड़ सकता है आपका मेटाबॉलिज्‍म सुबह खाली पेट चााय पीने से आपके मेटाबॉलिज्‍म पर बुरा असर पड़ सकता है क्‍योंकि इससे पेट में एसिडिक और अल्‍कलाइन तत्‍व का बैलेंस बिगड़ सकता है। जिससे आपका मेटाबॉलिज्‍म गडबड़ा सकता है और आपके बॉडी को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। एसिडिटी खाली पेट चाय पीने का सबसे बढ़ा नुकसान है एसिडिटी। खाली पेट गर्म चाय का सेवन पेट में एसिडिटी पैदा करता है और पाचक रसों पर प्रभाव डालता है। पाचन तंत्र कमजोर होता है पाचन तंत्र का कमजोर होने का एक बड़ा कारण है खाली पेट गर्म चाय का सेवन। हालांकि यह एक या दो बार नहीं बल्कि रोजाना खाली पेट चाय पीने पर होता है। दांतों में सड़न सुबह खाली पेट चााय पीने से दांतों का इनेमल घिस जाता है। यह तब होता है जब मुंह के बैक्‍टीरिया शक्‍कर को तोड़ देते हैं और इससे मुंह का एसिड लेवल बढ़ जाता है। तभी जा कर दांतों पर बुरा असर पड़ता है। बॉडी हो जाती है डीहाइड्रेट चाय पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। और अगर आप इसे रोज खाली पेट पिएंगे तो यह और भी ज्‍यादा नुकसान पहुंचाएगी। वे लोग जो सुबह उठ कर 8 घंटे खाली पेट के बाद तुरंत ही चाय पी लेते हैं उनके शरीर में इसके चलते परेशानी हो सकती है। पेट में गैस और ब्‍लोटिंग सुबह दूध वाली चाय पीने के बाद बहुत से लोग महसूस करते हैं कि उनका पेट ब्‍लोट हो चुका है। ऐसा इसलिये क्‍योंकि खाली पेट दूध में मौजूद लैक्‍टोज़ काफी ज्‍यादा प्रभावित करता है। जिससे कब्‍ज और गैस की भी शिकायत देखने को मिलती है। मिचली आना आपका पेट रातभर से पूरा खाली रहता है इसलिये सुबह उठकर खाली पेट चाय पीने से बाइल जूस की प्रक्रिया अनियमित हो जाती है। जिसके चलते आपको मिचली आ सकती है और घबराहट महसूस हो सकती है। सुबह दूध की चाय पीने के नुसान अध्‍यन के अनुसार पाया गया है कि जो लोग खाली पेट बहुत अधिक दूध वाली चाय पीते हैं, उन्‍हें थकान का एहसास होता है। चाय में दूध मिलाने से एंटीऑक्‍सीडेंट का असर खतम हो जाता है। ब्‍लैक टी भी नहीं होती अच्‍छी अगर चाय में दूध ना मिलाया जाए तो वह काफी फायदा पहुंचाती है, जैसे मोटापा कम करना। पर अगर अधिक ब्‍लैक टी का सेवन किया जाए तो वह सीधे पेट पर असर करती है। कैफीन से हो सकती है परेशानी माना जाता है कि कैफीन से आपके शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। हांलाकि खाली पेट चाय पीने से काफी सारे साइड इफेक्‍ट होते हैं जैसे मचली आना, चक्‍कर आना और मन में अजीब सा लगना। घबराहट खाली पेट चाय पीने से शरीर पर उल्‍टा असर पड़ता है। इससे सोने की दिक्‍कत तो बढती बढती है साथ में मन में घबराहट भी होने लगती है। अगर आपको फिर भी सुबह चाय पीने का मन करे तो इसे ब्रेकफास्‍ट करने के बाद पिएं। Related Articles

WOW! women's day पर सरकार ने लड़कियों के लिये लॉन्‍च किये बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी पैड

Friday, March 9 2018

WOW! women's day पर सरकार ने लड़कियों के लिये लॉन्‍च किये बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी पैड

महिलाएं » WOW! women's day पर सरकार ने लड़कियों के लिये लॉन्‍च किये बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी पैड WOW! women's day पर सरकार ने लड़कियों के लिये लॉन्‍च किये बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी पैड Women Published: 15:43 मुबारक हो! क्रेंद सरकार ने इस वर्ष के महिला दिवस पर सच मुच हमारी बहनों को जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। तोहफा यह है कि उन्‍होंने महिलाओं के लिए 100% बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी नैपकिन लॉन्च किया है। यह सेनेट्री नैप्‍किन हमारे पास मार्केट में 28 मई तक उपलब्‍ध होंगे। आपको यह जान कर बेहद खुशी होगी कि यह सैनिटरी पैड उन महिलाओं के बड़े काम आएंगे जो काफी गरीब तबके ही हैं और महंगे पैड नहीं खरीद सकती। सरकार ने बायॉडिग्रेडिबल सैनिटरी पैड की कीमत 2.50 रुपए रखी है जो कि एक पैड की कीमत है। केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने इस बात को अपने अपने twitter handel पर ट्वीट कर के शेयर की है। जिसमें उन्‍होंने बताया कि सरकार ने इस 100% बायॉडिग्रेडिबल पैड्स को उन देश की महिलाओं को स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुविधाओं से जोड़ने के लिये लॉन्‍च किया है जो गरीब होने की वजह से अभी भी गंदे कपड़े का इस्‍तेमाल पैड के रूप में करती आ रही हैं। यही नहीं महिला दिवस के मौके पर भारतीय रेलवे के रेलवे वुमेंस वेलफेयर सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन की ओर से भी एक बहुत ही अच्‍छी खबर है। अब जो महिलाएं पीरियड्स के दिनों में रेल यात्रा कर रही होंगी उन्‍हें भी वहां सेनेट्री पैड की मशीन लगी हुई मिलेगी। कल यानी बुधवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सेनेट्री पैड की मशीनें लगाई गई है। आपको इन मशीनों में पांच रुपये का सिक्का डाल कर सेनेट्री पैड प्राप्त किया जा सकेगा। इन मशीनों में एक बार में लगभग 45 सेनेट्री पैड डाले जा सकते हैं। आपको बता दें कि जब से बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' रिलीज़ हुई है तभी से महंगे सैनिटरी पैड को लेकर देश कि महिलाओं ने सरकार से नाराजगी जताना शुरु कर दिया है। सेनेटरी नैपकीन पहले से ही महंगा था, महंगाई के दौर में हर महिला नैपकीन आसानी से नहीं खरीद पाती थीं। नए कर लग जाने से तो वह और भी महंगा हो गया है। ऐसे में सेनेटरी नैपकीन का उपयोग मध्यवर्ग की महिलाएं तक नहीं कर पाएंगी, गरीब परिवार की महिलाएं तो इसे खरीदने की सोच भी नहीं सकतीं। खैर अब खुशखबरी सभी को मिल गई है इसलिये महिलाओं में इस बात को ले कर काफी उमंग है। अगर आप भी गंदे पैड का इस्‍तेमाल करती हैं या फिर साफ सफाई का बिल्‍कुल भी ख्‍याल नहीं रखती हैं तो आज से ही सावधान हो जाएं। मासिक धर्म में बहने वाला खून शरीर से बाहर निकलते वक्त शरीर के सहज जीवों से दूषित हो जाता है। कम बहाव वाले दिनों में पसीने व आपकी योनि के जीवों के कारण आपका पैड नम रहता है। लंबे समय पर नम एवं गर्म स्थान में रहने से इन बैक्‍टीरिया की संख्या बढ जाती है। जिस वजह से आपकी त्वचा पर लाल चकत्ते तथा आपको यूरीनल इंफेक्‍शन व योनि संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अतः Periods के दौरान हर 6 घंटों में अपना पैड बदलें व टैम्पान को हर 2 घंटों में बदलें। यह नियम अधिक व कम बहाव दोनों प्रकार के दिनों पर लागू होता है। Related Articles

National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication”

Wednesday, March 7 2018

National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication”

Home | National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication” National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication” March 7, 2018 Camps / Workshops / Seminars Comments Off on National Workshop on “Indian Language, Literature and Mass Communication” A two day National Seminar on “ Indian Language, Literature and Mass Communication ” and a Student Study Tour were inaugurated jointly by the Central Hindi Directorate , Higher Education Department, Human Resource Development Ministry, New Delhi and the (DSVV) . The seminar was organized free of charge in which students from National Institute of Culture, Dev Prayag , Gurukul Kangri University, Haridwar , Uttarakhand Sanskrit University, DSVV and from seven other universities participated. The objective of the program was to promote Hindi language. The program on Indian Language began with the enkindling of the lamp by the Chief Guest and the Honorable Shri Sharad Pardhy . Guiding the youth, he said that instead of looking in the outside world, we should promote and spread our own culture for which promotion of Hindi is the easiest medium. We must be proud of our culture. The responsibility of maintaining the beauty and structure of our language is ours and we must carry this out honestly, said the Vice Chancellor. The Director of Central Hindi Directorate, Mrs. Gandhari , apprised the students of various activities being run by the Centre to promote Hindi. Read More... Dr. Narendra Pratap Singh , the coordinator of the Centre of Hindi (Indian Language) in DSVV, spoke that Hindi is the only language which unites everyone. Out of the total population of India of 125 crores, almost 90 crores understand Hindi. There are approximately 6000 languages ​​in the world, of which around 3000 ​​resemble Hindi. Speaking on the topic, Professor Abhay Saxena , the Dean of the University, said that language is a bridge that connects everyone. Professor Suresh Barnwal , spoke about the life of Revered Master Pandit Shriram Sharma Acharya and said that the Master’s entire life was dedicated to literature. Acharya Shree considered Hindi as the only language of the common masses, because of which he wrote more than 3200 books in Hindi. In the next phase of the program, Shri Virendra Singh , the Hindi lecturer from the Sanskrit Institute, Dev Prayag , said that language is a simplest means of expressing thoughts. Words are the only enemies or friends of a human being. Hindi (Indian Language), he said, has the ability to express ideas with much simplicity. Expressing his concern, Mr. Singh said that due to the changing nature of the present time, it is necessary to look into the fact that today we are paralyzing literature and poetry. Hindi is variable in nature; that is its beauty, he further said. Thereafter, other researchers from various universities presented their views. Shri Pankaj Kumar of the National Sanskrit Institute spoke on ‘ Communication Revolution in Young India ‘, Ms. Mona Sharma of Gurukul Kangri University presented her views on ‘ Utility of Hindi in the Advertising World ‘, and Ms. Artee from Uttarakhand University expressed on ‘ Development of Hindi in Mass Communication ‘. Besides this, various researchers presented their research papers on their subjects. Students were taken for a trip around DSVV campus and other areas of Haridwar . The entire program was conducted under the guidance of Dr. Narendra Pratap Singh. केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली एवं के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं छात्र अध्ययन यात्रा का शुभारम्भ हुआ। यह दो दिवसीय संगोष्ठी भारतीय भाषा (Indian Language), साहित्य और जनसंचार विषय पर निःशुल्क आयोजित की गई। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में राष्ट्रीय संस्कृति संस्थान देव प्रयाग, गुरूकुल कांगड़ी हरिद्वार, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं समेत सात अन्य विश्वविद्यालय से आए छा़़़त्र-छात्राआंे ने प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार रहा। देसंविवि के माननीय कुलपति श्री शरद पारधी जी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया। उन्होंने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि हमें कहीं बाहर न देख कर अपनी ही संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहिए, हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार ही इसका सबसे सरल माध्यम है, हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के सौंदर्य और संरचना को संभाल कर रखने कि जिम्मेदारी हमारी है और इसे हमें निष्ठापूर्वक निभाना होगा। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय कि निदेशिका श्रीमति गांधारी जी ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न गतिविधियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया। देसंविवि के हिन्दी केन्द्र के समन्वयक डाॅ. नरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिन्दी ही एक मात्र ऐसी भाषा है जो सबको एक सूत्र में पिरोती है। भारत के 125 करोड़ लोगों में से लगभग 90 करोड़ को हिन्दी समझ आती हैं। विश्व में कुल लगभग 6000 कुल भाषाऐं हैं जिनमें 3000 भाषाएँ हिन्दी से मिलती-जुलती है । देसंविवि के सह संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर अभय सक्सेना ने भाषा के विषय में बताते हुए कहा कि भाषा वह कड़ी है जो सभी को जोड़ती है। प्रोफेसर सुरेश वर्णवाल ने आर्चाय पंडित श्रीराम शर्मा के जीवन के विषय में बताते हुए कहा कि आचार्य जी का संपूर्ण जीवन ही साहित्य को समर्पित रहा। आचार्यश्री हिन्दी को ही जनसमान्य कि भाषा मानते थे जिस कारण 3200 से अधिक पुस्तकें उन्होंने हिन्दी भाषा में ही लिखीं। कार्यक्रम के अगले चरण में संस्कृत संस्थान देव प्रयाग से आए हिन्दी के प्रवक्ता श्री वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि भाषा, विचारों को व्यक्त करने का सबसे सरल माध्यम है, शब्द ही मनुष्य के शत्रु एवं मि़त्र हैं, उन्होंने कहा कि हिन्दी एक मात्र ऐसी भाषा है जो भावों को सरलता से व्यक्त करती है, श्री वीरेन्द्र सिंह ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते स्वरूप कि वजह से आज हम साहित्य एवं कविताओं कि टांग तोड़ते जा रहे हैं इस पर गौर करने कि आवश्यकता है, साथ ही उन्होंने कहा कि हिन्दी परिवर्तनशील है और यही उसकी सुंदरता है। इसके उपरान्त विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों ने अपने विषयों पर प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्री पंकज कुमार ने ‘युवा भारत में संचार क्रांति‘, गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय कि सुश्री मोना शर्मा ने ‘विज्ञापन जगत में हिन्दी की उपयोगिता‘, उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय कि आरती ने ‘जनसंचार रूप में हिन्दी का विकास‘ पर अपने विचार व्यक्त किए, इनके साथ-साथ सत्राह अन्य शोधार्थियों ने अपने विषयों पर शोधसार भी प्रस्तुत किये। साथ ही विद्यार्थियों को देसंविवि परिसर एवं हरिद्वार क्षेत्र का भ्रमण कराया गया। डाॅ0 नरेन्द्र प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन हुआ।

A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life”

Wednesday, March 7 2018

A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life”

Home | A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life” A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life” March 7, 2018 Camps / Workshops / Seminars Comments Off on A National Seminar on “Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary Life” On 23 rd February a National Seminar on “ Vedic Knowledge, Cultural Heritage and Contemporary life ” was organized jointly by the Department of Yoga and Health, the Centre for Scientific Spirituality Studies and ICPR (Indian Council of Philosophical Research) at (DSVV). Students from different universities of the country including DSVV, Gurukul Kangri University, Patanjli University, Uttarakhand Sanskrit University , etc. attended the Seminar. The program began with the enkindling of the lamp jointly by Mr. Rajneesh Kumar Shukla, the chief Guest of the program and the honorable Secretary of ICPR, and Dr. Chinmay Pandya , the Pro-Vice Chancellor of DSVV. Presiding over the program, Hon’ble Pro-Vice Chancellor, Dr. Chinmay Pandya , said that the seminar was held to assimilate critical thinking. The present time is different from the ancient times. Enemy in olden days was without and declared, while today, it is within and has penetrated into our ideas, character and lifestyle, with which we have to struggle, continuously, throughout the day. It is much like the inner battle of Dev-Asur (Gods and Demons). It is only when we dive deep into the Vedic Knowledge, Upanishads and other books of our culture with faith that we find a solution to this problem. Read More... Hon’ble Chief Guest, Mr. Rajneesh Kumar Shukla , the Secretary, ICPR said that there is no peace today despite so much development of science and technology. This is because we have totally neglected the fundamental elements of Vedic knowledge, Vedic Science, Shastras and our culture. It is really necessary for us to make them a part of our life with intense-contemplation and mutual discussion. The is performing this task very well. Mr. Shukla said that India has never fought a battle for the expansion of its empire, but to uproot evil powers and to safeguard our divine culture and religion. Vedic knowledge is one of the traditions of holistic knowledge in which all contradictions dissolve. We find complete solution to today’s problems and challenges vested in them. Honorable Shri Sharad Pardhy said that Vedas are not just Volumes or books, but are also a symbol of knowledge that reveal in the pure heart making our thoughts, character and behavior pure and intense. The welcoming speech of the program was delivered by Dr. Suresh Lal Baranwal , the Head of the Department of Yoga and Health. Dr. Jaidev Vedalankar , in the second session of the Seminar, described the importance of the Vedas highlighting the eternal concept of Vedic knowledge. He also spoke about the congregations of the Universe described in the Vedas, mathematical experiments of the Vedas, mathematical astrology, planetary conditions and calculation of solar years. Researcher Lokesh Chaudhary presented his views on ‘ Elements of Yoga from Yajur Veda ’ while Researcher Rohit Kumar spoke on ‘ Environment from the Vedas ’. Dr. Govind Prasad Mishra from the University of Patanjali, and Dr. Indu Sharma presented their views on ‘ Religion and Sects inherent in Yoga ’ and ‘ Education in Vedas ’, respectively. On this occasion, an e-processing of Research papers by a Researcher was also released. The program was attended by Dr. Ishwar Bharadwaj , the Head of the Yoga Department of Gurukul Kangri University, Prof. Sukhanandan Singh, Dr. Gyanendra Pandey, Dr. Vandana Srivastava, Dr. Piyush Trivedi , teachers, researchers, and students from different universities. Vote of thanks was extended by Dr. Piyush Dwivedi. 23 फरवरी को में योग विभाग, वैज्ञानिक अध्यात्मवाद विभाग व आईसीपीआर (इण्डियन काउन्सिल आॅफ फिलोसफिकल रिसर्च) के संयुक्त तत्वावधान से ‘वैदिक ज्ञान (Vedic Knowledge), सांस्कृतिक विरासत एवं समकालीन जीवन‘ विषय पर ‘राष्ट्रीय संगोष्ठी‘ का शुभारम्भ हुआ। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में , गुरूकुल कांगड़ी वि.वि., पतंजली वि.वि., उत्तराखंड संस्कृति वि.वि., सहित देश के अन्य विश्वविद्यालयों के शोधार्थी, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थिति रहे। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे इंडियन काउन्सिल आॅफ फिलोसफिकल रिसर्च के माननीय सचिव श्री रजनीश कुमार शुक्ला एवं देसंविवि के माननीय प्रति कुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय प्रति कुलपति डाॅ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि गंभीर चिंतन को आत्मसात करने के लिए हम सब यहाँ एकत्र हुए हैं। वर्तमान समय प्राचीन समय से अलग है, पहले शत्रु बाहर था, घोषित था पर आज वह व्यक्ति के चिंतन, चरित्र एवं जीवनशैली में घुस गया है जिससे हमें चैबीसों घंटे जूझना होता है, यह अंदर के देवासुर संग्राम की तरह है, यदि हम अपनी संस्कृति वैदिक ज्ञान (Vedic Knowledge), उपनिषद् आदि में विश्वास के साथ गहराई से उतरेंगे तो ही इसका समाधान मिलेगा। माननीय मुख्य अतिथि आईसीपीआर के सचिव श्री रजनीश कुमार शुक्ला ने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक के इतने विकास के बावजूद शांति नहीं है क्योंकि हम वैदिक ज्ञान-विज्ञान, शास्त्र, संस्कृति आदि के मूल तत्व को भूल बैठे हैं, वर्तमान समय में इन विषयों पर गहन-चिंतन, चर्चा-परिचर्चा के साथ इसे अपने जीवन का अंग बनाने की आवश्यकता है। इस कार्य को बखूबी निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध कभी भी अपने सम्राज्य के विस्तार के लिए नहीं लड़ा, वरन सदैव आसुरी अक्षेदन, देव संस्कृति एवं धर्म की रक्षा के लिए ही युद्ध हुआ। वैदिक ज्ञान समग्र ज्ञान की परंपरा है जिसमें सारे विरोधाभास तिरोहित हो जाते हैं। आज की समस्याओं, चुनौतियों का पूर्व समाधान इसमें निहित है। देसंविवि के माननीय कुलपति श्री शरद पारधी ने कहा कि वेद सिर्फ ग्रंथ या किताब नहीं है यह ज्ञान का प्रतीक भी है जो शुद्ध निर्मल हदय में प्रकट होता है और व्यक्ति के चिंतन-चरित्र एवं व्यवहार को पवित्र एवं प्रखर बनाता है। कार्यक्रम के आरंभ में ही अतिथियों का स्वागत योग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश लाल बर्णवाल के माध्यम से हुआ। संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में वेदो की महत्ता के बारे बताते हुए डाॅ जयदेव वेदालंकार ने वैदिक ज्ञान-विज्ञान की सनातन अवधारणा पर प्रकाश डाला। वेदो में उल्लेख ब्रह्माण के मण्डलों, वेदों के गणितीय प्रयोग, गणितीय ज्योतिष, ग्रहों की स्थिति एवं सौर वर्षों की गणना के विषय में भी बताया। शोधार्थी लोकेश चैधरी ने यजुर्वेद में वर्णित योग के तत्व, रोहित कुमार ने वेदों में पर्यावरण, पतंजलि विश्वविद्यालय से आये डाॅ. गोविन्द प्रसाद मिश्र ने योग में निहित धर्म सम्प्रदाय, डाॅ. इन्दु शर्मा ने वेदों में शिक्षण विषय पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर शोधार्थी के शोधपत्र की ई प्रोसिडिग का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में गुरूकुल कांगड़ी विवि के योग विभागाध्यक्ष डाॅ. ईश्वर भारद्वाज, प्रो. सुखनन्दन सिंह, डाॅ. ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, डाॅ. वन्दना श्रीवास्तव, डाॅ. पीयूष त्रिवेदी, विभिन्न विवि से आए शिक्षक, शोधार्थी, एवं देसंविवि के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. पीयूष द्विवेदी ने किया।

The Lithuanian Education Ministry sanctions Scholarship for DSVV Students

Wednesday, March 7 2018

The Lithuanian Education Ministry sanctions Scholarship for DSVV Students

Home | The Lithuanian Education Ministry sanctions Scholarship for DSVV Students The Lithuanian Education Ministry sanctions Scholarship for DSVV Students March 7, 2018 International News Comments Off on The Lithuanian Education Ministry sanctions Scholarship for DSVV Students The Centre for Baltic Culture and Studies of the prestigious institute, , has been officially recognized by the Ministry of Education of the Government of Lithuania, in the Baltic States, through an important recommendation letter. In this letter the Lithuanian Government has approved scholarship for about forty students of DSVV to study in different educational institutions located in Lithuania for cross-cultural studies. It is to be noted that due to curiosities for the cultures of other nations in Latvia, Estonia and Lithuania (countries located near the green Baltic Sea) that the opening of the first Baltic Centre for Cultural Studies in Asia was being looked at with great expectations by the respective nations. This Centre was established in the Divine land of Uttarakhand State in the campus of the prestigious . The centre was jointly inaugurated by the three Ambassadors, Mr. Aivars Groza , H.E. Ambassador, Embassy of Latvia in India , Mr. Riho Kruv , H.E. Ambassador, Embassy of Estonia in India , and Mr. Laimonas Talat-Kelpša , H.E. Ambassador, Embassy of Lithuania in India, along with Professor Ina Druviete , the Vice-Rector, University of Latvia, the Governor of Uttarakhand , H.E. Dr. Krishna Kant Paul and the Hon. Chancellor of DSVV, Dr. Pranav Pandya . Mr. Laimonas Talat-Kelpša , H.E. Ambassador, Embassy of Lithuania in India , had said that the launching of the first Baltic Centre in Asia was a good sign for Lithuania. Giving importance to the research on the cultures of India and Baltic Countries, Dr. Chinmay Pandya , the Pro- had expressed that the new research on cultural dialogue can only give new direction to the world. This Centre has further been developed to promote cultural activities of both India and the Baltic nations. At present, new research works are being done by the Centre on cultural activities through elemental research works, project works, workshops etc. बाल्टिक राष्ट्रों में लिथुआनिया देश की सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक महत्त्वपूर्ण संस्तुति पत्र जारी किया गया जिसके अनुसार भारत के प्रतिष्ठित दे०सं०वि०वि० के बाल्टिक संस्कृति एवं अध्ययन केंद्र को अधिकृत रूप से मान्यता प्रदान की गयी है जिसके अंतर्गत लिथुआनिया सरकार द्वारा दे०सं०वि०वि० के लगभग चालीस विद्यार्थियों को लिथुआनिया देश में स्थित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में परस्पर सांस्कृतिक समानता सम्बन्धी अध्ययन हेतु छात्रवृत्ति की मंजूरी प्रदान की गयी है | अवगत हों की हरे समुद्र के निकट बसे लात्विया, एस्टोनिया एवं लिथुआनिया देशों में अन्य संस्कृतियों के प्रति जिज्ञासा होने के कारण एशिया में सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र के आरंभ को सम्बंधित राष्ट्रों द्वारा आशाभरी नजरों के देखा जा रहा था। जिसके अंतर्गत भारत की देवभूमि उत्तराखण्ड में प्रतिष्ठित में एशिया के प्रथम बाल्टिक केंद्र की स्थापना की गयी जिसमें लात्विया के राजदूत माननीय एवरिस ग्रोजा, एस्टोनिया के राजदूत माननीय रिहोक्रुव, लिथुआनिया के राजदूत माननीय लेमोनासतलतकेल्प्सा एवं लात्विया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. इनाद्रुविते एवं उत्तराखण्ड के महामहिम राज्यपाल डॉ. के. के. पॉल, दे०वि०वि०वि० के मा० कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्डया द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित बाल्टिक सेंटर का संयुक्त उदघाटन किया गया था। लिथुआनिया के राजदूत माननीय लैमोनासतलत – केल्प्सा ने बाल्टिक केंद्र के शुभारंभ को लिथुआनिया के लिए शुभ संकेत कहा था साथ ही मा० प्रतिकुलपति डॉ० चिन्मय पण्ड्या ने बाल्टिक केंद्र व भारतीय संस्कृति के ऊपर प्राचीन शोध को महत्व देते हुए कहा था कि सांस्कृतिक संवाद के नए शोधों से ही विश्व को नई दिशा मिल सकेगी। यह केंद्र भारत और बाल्टिक दोनों ही देशों की सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है। वर्तमान में इस केंद्र द्वारा संस्कृति के विभिन्न तत्व सम्बन्धी शोध कार्य, प्रोजेक्ट कार्य, कार्यशाला इत्यादि के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियों व क्रियाकलापों के ऊपर नए- नए शोधकार्य किए जा रहे हैं।

कभी भी भूलकर भी न खाएं केला और दूध एक साथ, जानिए क्‍यूं..?

Wednesday, March 14 2018

कभी भी भूलकर भी न खाएं केला और दूध एक साथ, जानिए क्‍यूं..?

Published: 13:29 अक्‍सर लोग जो दुबर्लता से परेशान चल रहे हैं, वो वजन बढ़ाने के लिए दूध और केला खाना शुरु कर देते हैं। इसके अलावा लोग गर्मियों में मिल्‍कशेक बनाकर बनाकर पीना बहुत पसंद करते हैं। हालांकि यह बहुत स्‍वादिष्‍ट लगता हैं परंतु केले और दूध का एक साथ करना स्‍वास्‍थय के लिए हानिकारक माना जाता हैं। आयुर्वेद के अनुसार भी केले और दूध को एकसाथ या मिक्स करके खाने से सेहत को हानि पहुंच सकती है। खाने से पहले अंतराल अगर आप दोनों का ही सेवन करना चाहते हैं तो आपको पहले दोध पी लें और उसके 20-25 मिनट के अंतराल के बाद ही केला खाएं। कभी भी साथ न खाएं दमा की परेशानी से ग्रस्‍त लोगों को कभी भी केले और दूध का एकसाथ सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये कफ बनाने का काम करता है, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी आ सकती है। हो सकती है एलर्जी केले और दूध का एकसाथ सेवन करने से एलर्जी की संभावना होती है, शरीर में जहरीले तत्व आ जाते हैं। पाचन क्रिया केले और दूध का एकसाथ सेवन करने से इनके सभी गुण नष्ट हो जाते हैं और यह पाचन क्रिया को खराब करने के साथ आंतों को भी नुकसान पहुंचाता है। ठंड भी.. केले और दूध, दोनों की ही तासीर ठंडी होती है, इनके एकसाथ सेवन करने या बनैना शेक पीने से सर्दी, खांसी और गला खराब की संभावना होती है। ढेर सारी बीमारियां हो सकती हैं यह पाचन की अग्नि को बुझा देता है और आंतों में बाधा पहुंचाता है। इसके कारण जकड़न, सर्दी, खांसी, रैशेस और एलर्जी जैसी समस्याएं होती हैं। यह शरीर में नकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है, अतिरिक्त पानी उत्पन्न करता है, शरीर के रास्तों को अवरुद्ध करता है, दिल की बीमारी की संभावना बढ़ाता है, इससे उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं। क्या कहता है आयुर्वेद? जहां तक आयुर्वेद का सवाल है, प्रत्येक खाद्य पदार्थ का अपना स्वाद (रस), पाचन के बाद परिणाम (विपाका) और गर्म और ठंडी उर्जा (वीर्य) होता है। अत: किसी व्यक्ति अग्नि या गैस्ट्रिक आग से यह निर्धारित होता है कि भोजन कितने अच्छे से या खराब तरीके से पचता है और खाद्य पदार्थों का सही संयोजन बहुत आवश्यक है। आयर्वेद के अनुसार केला और दूध सबसे असंगत खाद्य पदार्थों की सूची में आते हैं। Related Articles

कान में हो गया इंफेक्‍शन, इन 2 मिनट के घरेलू उपाय से भगाएं

Wednesday, March 14 2018

कान में हो गया इंफेक्‍शन, इन 2 मिनट के घरेलू उपाय से भगाएं

तंदुरुस्‍ती » कान में हो गया इंफेक्‍शन, इन 2 मिनट के घरेलू उपाय से भगाएं कान में हो गया इंफेक्‍शन, इन 2 मिनट के घरेलू उपाय से भगाएं Wellness Published: 11:22 कान का संक्रमण जिसे ओटिटिस मीडिया भी कहा जाता है, बच्चों और नवजातों में होने वाली एक आम समस्या है, लेकिन यह समस्या वयस्कों को भी हो सकती है | अमूमन 90% बच्चों में से कम से कम एक को तीन वर्ष की आयु तक कान का संक्रमण हो जाता है। कान हमारे शरीर की उन इन्द्रियों में से एक है, जो बहुत ही नाजुक होता है, इसलिए हमें इसकी देखभाल बहुत ही अच्छे तरीके से चाहिए, नहीं तो हमें बहुत सी भयानक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि कान में इन्फेक्शन हो जाना आदि। कान के इन्फेक्शन के कारण हमें सुनने में भी दिक्कत हो सकती है। ईयर इंफेक्शन के कारण कान हमारे शरीर के नाजुक इंद्रियों में से एक है। कान की रचना बहुत ही जटिल तरीके के साथ हुई है। कान में इंफेक्शन या संक्रमण होना बहुत ही आम बात है, लेकिन जब हम अपने कान का सही तरीके के से ध्यान नहीं रखते, तो हम गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं, साथ ही हमारे सुनने की शक्ति भी कम हो जाती है। ईयर इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि ... कारण.. कान में चोट का लगना। कान में कीड़े का जाना। कान की मल का बढ़ जाना। नहाते हुई कान में पानी चले जाना। शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना। सर्दी की वजह से तेज आवाज का लगातार सुनने से। श्वास संबंधी समस्या होना आदि कान के इंफेक्शन के मुख्य कारण हो सकते हैं। तेज आवाज में ईयरफोन से म्‍यूजिक सुनने से। ईयर इंफेक्शन के लक्षण बुखार का आना और बच्चो को ठीक से न सुनाई देना। कान को खींचने या रगड़ने से। बच्चा जब ठीक से खाना न खाएं और रोता रहें। कान में गंदगी जम जाने के वजह से दर्द होना। पीली या सफेद रंग का पस बाहर निकले। घरेलू उपचार जब भी कान में किसी भी तरह की कोई बीमारी बन जाती है, तब हम अक्सर डॉक्टर के पास चले जाते हैं और अधिकतर केस में डॉक्टर इन्फेक्शन की दवा देते हैं, लेकिन हम डॉक्टर के पास न जाकर कुछ घरेलू उपचार करें, तब भी हम इस बीमारी से आसानी से राहत पा सकते हैं, जैसे कि जब भी कान में दर्द हो, तो उससे राहत पाने के लिए गर्म पानी में भिगोकर कपड़ा कान पर रखें। इससे आप को राहत महसूस होगी। बच्चें को कभी भी सुलाकर दूध न पिलाएं। हाईड्रोजन पेरॉक्साइड कान में इन्फेक्शन होने पर हाईड्रोजन पेरॉक्साइड की कुछ बूंदे डालें और 2-3 मिनट के लिए इसे कानों तक घुलने दें। इसकी बूंदे दिन में दो बार कान में डालें। इसके लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नमक नमक को गर्म करके एक मोटे कपड़े में डालें और फिर इसे अच्छे से बांध लें, यह अधिक गर्म न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए इसे अधिक समय तक कान पर रखें। जितनी बार हो सकें इस प्रक्रिया को दोहरायें। लहसुन लहसुन को तेल में तब तक पकाएं जब तक यह काला न हो जाए। इसको कुछ देर ठंडा होने दें, फिर इसकी कुछ बूंदे कान में डाल लें। ऐसा करने से आपके कान के दर्द से राहत मिलेगी प्याज कान के इन्फेक्शन को दूर करने के लिए प्याज बहुत ही फायदेमंद होता है इसके लिए प्याज के छोटे-छोटे टुकड़ों को गर्म करें, फिर उसे दो- तीन मिनट तक ठंडा करें। ठंडा होने पर जो उसका रस बनता है, उसकी तीन बूंदें कान में डालें और दस मिनट बाद उस रस को कान से बाहर निकाल दें। जैतून का तेल जब भी कान में अधिक मैल जमा हो जाए, तो जैतून का तेल को गर्म करके उसकी कुछ बूंदों को कान में डालें, फिर आप साफ़ कपड़े से कान की मैल को बाहर निकाले। विटामिन सी का सेवन अगर आपके कान में इंफेक्‍शन हो जाएं तो विटामिन सी के स्‍त्रोत वाले फलों का सेवन करें। इससे आपके कानों में होने वाली संक्रमण इंफेक्‍शन कम हो जाएगी। लौंग का तेल कान के इन्फेक्शन को दूर करने के लिए लौंग भी बहुत ही फायदेमंद होता है, इसमें मौजूद एंटी बैक्‍टीरियल गुण कानों में जमें बैक्‍टीरिया निकालकर दर्द से निजात दिलाता है। लौंग को तेल में तब तक पकाएं जब तक यह काला न हो जाए। इसको कुछ देर ठंडा होने दें, फिर इसकी कुछ बूंदे कान में डाल लें। ध्‍यान रखें.. अगर आपके कान में इंफेक्‍शन हो जाए और आपके कानों में मवाद जम गया हो तो रात में सोने के पहले अपने कानों में रुई के टुकड़े डाल लें। सोने के समय कान को नीचे की और रख कर सोएं। सोने की समय कान से निकलने वाला मवाद धीरे धीरे उस रुई में जम जाएगां। सुबह उठकर उस रुई को कान से निकाल लें। स्विमिंग को अवॉइड करें अगर आपके कान में संक्रमण हुआ हो तो कानों में पानी को पहुंचने न दे स्विमिंग हो या फिर बरसात किसी भी वजह से भीगनें से बचें। ठंड मौसम में अपने कानों में ढ़क के रखें। Related Articles

पेट के अल्‍सर वाले मरीज़ बिल्‍कुल ना खाएं ये 8 चीज़ें

Wednesday, March 14 2018

पेट के अल्‍सर वाले मरीज़ बिल्‍कुल ना खाएं ये 8 चीज़ें

डाइट-फिटनेस » पेट के अल्‍सर वाले मरीज़ बिल्‍कुल ना खाएं ये 8 चीज़ें पेट के अल्‍सर वाले मरीज़ बिल्‍कुल ना खाएं ये 8 चीज़ें Diet Fitness Published: 12:00 पेट के अल्‍स को पेप्‍टिक अल्‍सर भी कहते हैं, जो कि पेट की परत पर या फिर छोटी आंत के ऊपरी पोर्शन पर छाले कर रूप ले लेते हैं। शोध के हिसाब से भारत में 90 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। पेप्टिक अल्सर या गैस्ट्रिक अल्सर अमाशय या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में होता है। यह तब बनता है, जब भोजन पचाने वाला अम्ल अमाशय या आंत की दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है। पेप्टिक अल्सर पेट या ड्यूडिनल में होता है। यह दो प्रकार का होता है, पहला गैस्ट्रिक अल्सर और दूसरा ड्यूडिनल अल्सर। अल्सर होने पर पेट दर्द, जलन, उल्टी और उसके साथ ब्लीडिंग होने लगती है। कुछ समय बाद अल्सर के पकने पर यह फट भी जाता है। इसे परफॉरेशन कहते हैं। अल्‍सर की वजह से पेट में जलन, दांत काट ने जैसा दर्द आदि होता है। अगर आप खाना खाने के बाद कई घंटों तक अपना पेट खाली रखते हैं तो आपको यह दर्द हो सकता है। यह दर्द रात और सुबह के समय ज्‍यादा हेाता है। यह दर्द कुछ मिनट तक रह कर कई घंटो तक रहता है। क्‍या हैं इसके लक्षण- जी मिचलाना भूख ना लगना वजन कम होना आज आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बता रहे हैं जिनका आपको सख्ती से परहेज करना है। स्वस्थ खान-पान और तनावमुक्त जीवनशैली आपके स्वास्थ में बहुत अंतर ला सकती है। फिर भी अगर आपकी तकलीफ बढती जा रही है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ज़रूरी इलाज करवाएं जिससे यह बीमारी और ना बढ़े। 1. कॉफ़ी: कैफीन के सेवन से आपके पेट में एसिड की मात्र बढती है। इस कारण पेट के अलसर के मरीज को कॉफ़ी से परहेज़ करना चाहिए ताकि आपके पेट में एसिड की मात्र ना बढ़े। साथ ही आपके स्वास्थ में जल्दी सुधार हो। ना सिर्फ कॉफी बल्‍कि जिस चीज में कैफीन होती है जैसे साफ्ट ड्रिंक या चॉकलेट आदि आपकी हालत खराब कर सकती है। 2. मिर्च-मसालेदार भोजन: कई शोधों से यह पता चला है कि मसलेदार भोजन से अलसर बढ़ते हैं और स्थिति और खराब हो जाती है। छालों में जलन होती है। अतः मसालेदार भोजन से परहेज़ करें। 3. बेक किये हुए खाद्य पदार्थ: बेक किये हुए खाद्य पदार्थों में ट्रांस वसा की मात्रा बहुत होती है इस कारण यह पेट के एसिड को बढाता है। इसे अलसर में जलन होती है। अतः ऐसे पदार्थों से परहेज़ ज़रूरी है। 4. सफ़ेद ब्रेड: यह भी एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिससे अलसर की स्थिति और बिगड़ सकती है। अतः अपने भोजन से सफ़ेद ब्रेड को पूरी तरह से हटा देना स्वास्थकर होता है। 5. लाल मांस: जिन लोंगो को अल्‍स है उन्‍हें लाल मांस नहीं खाना चाहिये। रेड मीट में काफी सारा फैट और प्रोटीन होता है जो कि पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। यह जितनी देर पेट में रहता है उतनी देर एसिड रिलीज करता है और पेट की लाइननिंग को खराब करता है। अतः हर हाल में लाल मांस से परहेज़ ज़रूरी है। 6. शराब: शराब पीने से आपको अल्‍स हो सकता है लेकिन वहीं जिन्‍हें अल्‍स पहले से ही है उनके लिये शराब जहर के समान है। शराब का अत्यधिक सेवन आपके पाचन तंत्र को खराब कर देता है और एसिड का लेवल बढा सकता है। 7. डेयरी उत्पाद: डेयरी उत्पाद फैट से भरे होते हैं। इन्‍हें या तो पूरी तरह से हटा दें या फिर इनका थोड़ा कम सेवन करें। अलसर की स्थिति में हालत और भी बिगड़ सकती है। अतः जब तक अलसर ठीक ना हो जाये, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों से दूरी बना ले। 8. चावल, गेहूं और रोटी ये सभी स्‍टार्च से भरे आहार हैं जिसका सेवन बिल्‍कुल भी नहीं करना चाहिये। इन्‍हें पचाना काफी मुश्‍किल होता है जिससे पेट में एसिड की मात्रा बढा जाती है। Related Articles