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फ़ूड कॉम्बिनेशन जिसने हो सकती है गैस की समस्या

Wednesday, March 14 2018

फ़ूड कॉम्बिनेशन जिसने हो सकती है गैस की समस्या

» फ़ूड कॉम्बिनेशन जिसने हो सकती है गैस की समस्या फ़ूड कॉम्बिनेशन जिसने हो सकती है गैस की समस्या Wellness Published: 10:22 क्या आप अपने आहार में सही फूड कॉम्बिनेशन शामिल करते हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फूड कॉम्बिनेशन का सही होना बेहद जरूरी है।क्योंकि गलत फूड कॉम्बिनेशन सेहत के लिए कई समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। ज्यादातर लोग बीमारियों की वजह से बीमार नहीं पड़ते बल्कि वे गलत फूड कॉम्बिनेशन का सेवन करके बीमार पड़ जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ज्यादातर लोगों को सही फूड कॉम्बिनेशन के बार में जानकारी नहीं होती है और वे कोई भी गलत आहार लेकर बीमार पड़ जाते हैं। गलत फूड कॉम्बिनेशन खाने से गैस की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गैस की समस्या ज्यादातर लोगों में बहुत आम होता है लेकिन वे इस बात से कभी जागरूक नहीं हो पाते हैं कि गैस के पीछे मुख्य वजह क्या है। इसलिए सही फूड कॉम्बिनेशन के बारे में जानना बेहद जरूरी है ताकि आप खाते समय सही खाद्य पदार्थों को एक साथ खा सकें। इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे फूड कॉम्बिनेशन के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है। भोजन के बाद फल खाने से हम सभी जनते हैं कि फल हमारे आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन यदि इसे कुछ अन्य आहार के साथ लिया जाये तो यह हमें नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि भोजन करने के तुरंत बाद फल खाने से बचना चाहिए। क्योंकि भोजन के तुरंत बाद फल खाने से यह भोजन के अवशोषण एवं पाचन की क्रिया को रोक देता है। फल में फाइबर की मात्रा होती है जो भोजन के पाचन को गड़बड़ कर देता है जिसकी वजह से पेट में सूजन और गैस की समस्या हो जाती है। डेयरी और स्टार्च आमतौर पर डेयरी उत्पादों को पचने में अधिक समय लगता है लेकिन यदि डेयरी उत्पादों को स्टार्च के साथ खाया जाये तो इसे पचने में और लंबा समय लगता है जिसकी वजह से सूजन और गैस की समस्या हो जाती है। डेयरी प्रोडक्ट के साथ ब्रेड का सेवन एक गलत फूड कॉम्बिनेशन माना जाता है। एसिडिक फ्रूट और स्टार्च एसिडिट फ्रूट और स्टार्च एक साथ खाने से बीमार पड़ने की संभावना अधिक होती है क्योंकि स्टार्च पाचन की क्रिया में अधिक समय लगाता है और इसकी वजह से गैस एवं अपच की समस्या हो सकती है। स्टार्च और शुगर आमतौर ज्यादातर लोग जैम, जेली के साथ ब्रेड खाने के आदी होते हैं। लेकिन स्टार्च और शुगर को एक साथ खाने से किण्वन हो सकता है जिसकी वजह से गैस और सूजन की समस्या हो सकती है। बीन्स और पनीर डेयरी उत्पाद पनीर या चीज के साथ बीन्स का सेवन करने से पेट में अनचाहे गैस की समस्या उत्पन्न हो सकती है और पेट में सूजन के साथ अपच जैसी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए बीन्स के साथ पनीर का सेवन करने से परहेज करें। फल और सब्जियां फल औऱ सब्जियां हमारे आहार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं लेकिन फल और सब्जियों को एक साथ खाने का विचार गलत है क्योंकि इसकी वजह से गैस की समस्या और पेट में सूजन हो सकता है। मीट और आलू मीट और आलू का कॉम्बिनेशन पेट के लिए अच्छा नहीं होता है। इसका कारण यह है कि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट एक साथ खाने से पेट में गैस की समस्या सहित अन्य पेट की परेशानियां हो सकती हैं। भोजन के बाद तरल पदार्थ लेने से भोजन के तुरंत बाद पानी या कोई अन्य तरल पदार्थ पीने से यह पाचन क्रिया में भाग लेने वाले एंजाइम को पतला कर देता है। इसलिए भोजन के बाद कुछ देरी से पानी या अन्य तरल पदार्थ लेना चाहिए। पेट में गैस की समस्या और सूजन से बचने के लिए हमें उचित पोषण से युक्त भोजन करना चाहिए और फूड कॉम्बिनेशन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। Related Articles

यूपी के इस गांव में है इंग्लिश देवी का मंदिर, मत्‍था टेकते ही बोलने लग जाओगें फ्लूएंट इंग्लिश...

Tuesday, March 13 2018

यूपी के इस गांव में है इंग्लिश देवी का मंदिर, मत्‍था टेकते ही बोलने लग जाओगें फ्लूएंट इंग्लिश...

Life » यूपी के इस गांव में है इंग्लिश देवी का मंदिर, मत्‍था टेकते ही बोलने लग जाओगें फ्लूएंट इंग्लिश... यूपी के इस गांव में है इंग्लिश देवी का मंदिर, मत्‍था टेकते ही बोलने लग जाओगें फ्लूएंट इंग्लिश... Life Updated: 12:55 फ्लूएंट और विदेशी एक्‍सेंट के साथ इंग्लिश सीखने के लिए आप कई अंग्रेजी क्‍लासेज में एडमिशन लेने की सोचते हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां की देवी इंडियन नहीं बल्कि फॉरेनर है, साथ ही अगर आपने देवी के दर पे मत्था टेकतें ही आप किसी फॉर्रेनर से कम फ्लूएंट इंग्लिश बोलते हुए नजर नहीं आएंगे। आपको ये पढ़कर हंसी आ रही होगी, लेकिन हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के बनका गांव की जहां पर दलित समाज के लोगों द्वारा इंग्लिश शिक्षा का महत्‍व समझते हुए अक्‍टूबर 2010 में इंग्लिश देवी का मंदिर स्थापित किया गया था। ऐसी दिखती है इंग्लिश देवी इंग्लिश देवी की शक्ल किसी विदेशी मेम की तरह है जिनके एक हाथ में बड़ी सी कलम और दूसरे हाथ में एक किताब है। देवी ने सिर पर हैट लगा रखी है जो ये बताती है कि आज दौर अंग्रेजी का ही है। ये मूर्ति लिबर्टी ऑफ स्‍टेच्‍यू से प्रेरित हैं। और इनके मूर्ति पर बना धर्म चक्र बौद्ध धर्म का प्रतीक हैं। ये थी सोच.. इंग्लिश देवी इंलिश देवी की इस मूर्ति को यहां के एक स्कूल में स्थानीय दलित नेता के द्वारा स्थापित कराया गया है। यहां के लोगों का मानना है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में पुरुषों के पास पढ़ने के ढेरों अवसर है मगर बात जब स्त्रियों की हो तो स्थिति सोचने वाली है। इस मूर्ति का उद्देश्य ये है कि महिलाऐं भी देवी को देख मॉडर्न बने और अपने अंदर शिक्षा का संचार करें। सीखनी होगी इंग्लिश लखीमपुर खीरी जिले के बनका के एक स्कूल में स्थापित ये मंदिर और ये मूर्ति दिखने में भी बड़ी विचित्र है। ये मूर्ति 20 किलो वजनी है और और पीतल की बनी हुई है। असल मकसद अंग्रेजी देवी मंदिर की स्थापना का मूल उद्देश्य दलित समाज को यह संदेश देना है कि उनका उद्धार इस भाषा के ज्ञान से ही हो सकता है। इस मंदिर के निर्माण की वजह भी बड़ी दिलचस्प है, यहां के दलितों का मानना है कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने हमेशा से ही अंग्रेजी शिक्षा और उसके प्रचार प्रसार पर बल दिया था और कहा था कि यदि दलितों को उन्नति करनी है और आगे बढ़ना है तो उन्हें इंग्लिश सीखनी ही होगी स्‍थानीय लोगों की मान्‍यता.. यहां के स्थानीय लोगों का ये भी मानना है कि शिक्षा के हिसाब से आज दलित पुरुषों के पास काफी विकल्प है परन्तु महिलाओं की हालत ख़राब है और शिक्षा के क्षेत्र में वो ज्यादा ही पिछड़ी हैं, तो यदि इलाके में मंदिर होगा और ये महिलाऐं जब वहां मत्था टेकने जाएंगी तो इंग्लिश देवी उनमें शिक्षा ख़ास तौर से इंग्लिश भाषा का संचार करेंगी और वो इंग्लिश सीख जाएंगी। लखीमपुर खीरी जिले के बनका के एक स्कूल में स्थापित ये मंदिर और ये मूर्ति दिखने में भी बड़ी विचित्र है। मन्‍नते मांगने भी आते है लोग लोगों की मानें तो इस मंदिर में आसपास के गांव के पिछड़े हुए लोग यहां इंग्लिश देवी के मंदिर यह मन्‍नत लेकर आते हैं कि उनके बच्‍चों का एडमिशन सबसे अच्‍छी इंग्लिश स्‍कूल में हो जाएं और उनके बच्‍चें भी इंग्लिश में महारत हासिल करें, यहीं आस लिए वो आते हैं। Related Articles

मूत्राशय में संक्रमण के 9 लक्षण और बचाव के 5 उपाय

Monday, March 12 2018

मूत्राशय में संक्रमण के 9 लक्षण और बचाव के 5 उपाय

Published: Monday, March 12, 2018, 9:49 [IST] Subscribe to Boldsky मूत्राशय अर्थात् यूरिनरी ब्लैडर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह गुब्बारे की तरह बढ़ता है और इसी में मूत्र इकट्ठा होता है। यह कोशिकाओं की परत से बनी होती है जो मूत्र को बाहर लीक होने से बचाती है और ब्लैडर में बैक्टीरिया उत्पन्न होने से भी बचाव करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक देर तक पेशाब रूकने से ब्लैडर या मूत्राशय में संक्रमण हो सकता है। क्या पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में संक्रमण की संभावना अधिक होती है? आइये जानें की मूत्राशय में संक्रमण होने के लक्षण क्या हैं और इससे बचने के उपाय क्या हैं। ब्लैडर इंफेक्शन क्या होता है? मूत्राशय में संक्रमण एक प्रकार का यूटीआई है जिसमें यूरिनरी ब्लैडर में रोगजन्य बैक्टीरिया अधिक मात्रा में उत्पन्न हो जाते हैं और मूत्राशय में संक्रमण पैदा करने लगते हैं। लेकिन अगर आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो यीस्ट जैसे साधारण से रोगाणु संक्रमण उत्पन्न कर सकते हैं। यह संक्रमण आमतौर पर ई-कोलाई नामक बैक्टीरिया के कारण होता है जो हमारे मल में बहुत अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं और यह किसी तरह मूत्रमार्ग के रास्ते यूरीनरी ट्रैक्ट से मूत्राशय में प्रवेश कर जाते हैं। महिलाओं में यह संक्रमण होना बहुत ही आम होता है क्योंकि महिलाओं के गुदा और मूत्रमार्ग के बीच की दूरी बहुत कम होती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ ही पुरुषों में भी ब्लैडर का का संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि भी बड़ी होती जाती है जोकि मूत्रमार्ग पर दबाव डालती है और जब वे मूत्र विसर्जन करते हैं तो मूत्र को रोकने का प्रयास करती है। मूत्राशय में संक्रमण होने के लक्षण क्या हैं? मूत्राशय में संक्रमण होने के सामान्यतः निम्न तरह के लक्षण पाये जाते हैं। -पेशाब करने में दर्द महसूस होना -पेशाब के रंग में परिवर्तन -पेशाब में खून आना -पेशाब से खराब गंध आना -अधिक तेजी से पेशाब करने की इच्छा -बुखार और कंपकंपी -मिचली और उल्टी आना -पेट के निचले हिस्से में दर्द मूत्राशय में संक्रमण से बचने के उपाय क्या हैं? ऊपर बताए गए लक्षणों से आप ब्लैडर के इंफेक्शन का आसानी से पता लगा सकते हैं। ब्लैडर में इंफेक्शन होना वास्तव में काफी खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन इन उपायों से ब्लैडर के संक्रमण से बचा जा सकता है। 1. कम से कम 8 गिलास पानी पीएं अधिक मात्रा में पानी पीने से पेशाब भी बार-बार जाना पड़ेगा और यह शरीर के लिए अच्छा होता है क्योंकि इससे ब्लैडर में उत्पन्न हो रहे बैक्टीरिया मूत्र के रास्ते शरीर से बाहर निकल आते हैं। इसके अलावा अधिक पानी पीने से यह मूत्र को पतला बनाता है। यह आवश्यक होता है क्योंकि मूत्र में तमाम तरह की अशुद्धियां मौजूद होती है और इससे पेशाब गाढ़ा हो जाता है और इसकी वजह से दर्द एवं जलन महसूस होता है। अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं तो आठ गिलास पानी पीने की आदत डाल लें। लेकिन पुरुष को औसतन 3.7 लीटर और महिला को औसतन 2.7 लीटर पानी पीना चाहिए। 2.अधिक पेशाब करना आप जितना अधिक पेशाब शरीर से बाहर निकालेंगे मूत्राशय में संक्रमण होने की संभावना उतनी ही कम होगी। वास्तव में आपको प्रत्येक चार घंटे में एक बार जरूर मूत्र त्यागना चाहिए। अधिक देर तक पेशाब रोकने पर निश्चित रूप से यूटीआई हो सकता है। 3. सेक्स के पहले और बाद में पेशाब करना सेक्स करने से महिला और पुरुष दोनों में ब्लैडर में इंफेक्शन की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इसलिए सेक्स करने से पहले और सेक्स करने के बाद अपने ब्लैडर खाली रखें। 4. चुस्त पैंट न पहनें जब आप चुस्त पैंट पहनते हैं तो यह अंडरवियर में नमी और गर्मी दोनों पैदा करता है जिसकी वजह से मूत्रमार्ग के पास बैक्टीरिया उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए स्वच्छता बनाए रखने और स्वस्थ रहने के लिए ढीले कपड़े पहने। 5.कॉटन के अंडरवियर पहनें कॉटन के अंडरवियर पहनने से नीचे की ओर हवा का प्रवाह होता रहता है जिससे कि बैक्टीरिया उत्पन्न नहीं हो पाते हैं। इसके अलावा अंडरवियर से गंदी महक भी नहीं आती है और ब्लैडर के संक्रमण से पूरी तरह बचाव होता है। Related Articles

EXAM के नाम से बच्‍चे के अंदर हो रही है घबराहत तो ऐसे करे दूर

Monday, March 12 2018

EXAM के नाम से बच्‍चे के अंदर हो रही है घबराहत तो ऐसे करे दूर

तंदुरुस्‍ती » EXAM के नाम से बच्‍चे के अंदर हो रही है घबराहत तो ऐसे करे दूर EXAM के नाम से बच्‍चे के अंदर हो रही है घबराहत तो ऐसे करे दूर Wellness Updated: Monday, March 12, 2018, 10:47 [IST] Subscribe to Boldsky साल भर पढ़ने के बाद जब परीक्षा का समय आता है तब काफी सारे बच्‍चे एक दम से घबरा जाते हैं। उन्‍हें एक तो अपने एग्‍जाम में अच्‍छे नंबर लाने का प्रेशर होता है वहीं दूसरी ओर अपने माता-पिता की उम्‍मीदों पर खरा ना उतर पाने का डर भी होता है। ऐसे में बच्‍चा काफी ज्‍यादा तनाव में आ जाता है, जिसके चलते उसके अंदर कुछ शारीरिक लक्षण जैसे लगातार सिर दर्द, बदन दर्द, पाचन शक्ति कमजोर होना, साँस लेने में तकलीफ, बार-बार अस्थमा के अटैक पड़ना, तनाव में बेचैन रहना आदि दिखाई देने लगते हैं। यही नहीं बच्‍चे इतना प्रेशर में आ जाते हैं कि वह उन्‍हें ना तो कुछ याद हो पाता है और ना ही वो एग्‍जाम में कुछ लिख पाते हैं। परीक्षा का तनाव अगर छात्रों को परेशान कर रहा है तो उनसे बात करें। डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों विद्यार्थी स्कूल से ज्यादा घर में रहता है। परीक्षा का दबाव भी होता है। ऐसे में कई बार वह इसे बोल कर जाहिर नहीं कर पाता है। लेकिन अगर कोई शारीरिक परेशानी हो रही है तो पैरेंट्स को उस पर ध्यान देना चाहिए। मां बाप को समझना चाहिये कि वह अपने बच्‍चों पर इतना प्रेशर ना डालें कि बाद में उन्‍हें डॉक्‍टर के पास ले जाना पड़े। उन्‍हें घर पर भी ऐसा माहौल बना कर नहीं रखना चाहिये जिससे बच्‍चे को लगे कि पढ़ाई में अच्‍छे नंबर नहीं आएंगे तो उसकी जिंदगी खतरे में है। एग्‍जाम समय में सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर में सकारात्मक वातावरण बना कर रखें और उन पर अनावश्यक दबाव न बनाए। दूसरी जरूरी बात कि पढ़ाई के साथ ही युवाओं की शारीरिक गतिविधियाँ भी लगातार जारी रहनी चाहिए। साथ ही खाने-पीने पर विशेष ध्यान दें। बेहतर खान-पान वैसे तो बच्‍चों को हमेशा ही ढंग का हेल्‍दी फूड खाना चाहिये मगर परीक्षा के दिनों में यह और भी जरुरी हो जाता है। हेल्‍दी खाने के साथ साथ पर्याप्‍त मात्रा में पानी भी जरूर पीना चाहिए इससे दिमाग तर रहता है। ताजा, हल्‍का और घर का बना खाना बच्‍चों का एनर्जी लेवल और एकाग्रता बढ़ाता है। आप चाहें तो बच्‍चे को ओट मील बना कर खिला सकती हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिससे हमारा शरीर सेरोटिन प्रोड्यूस करता है। सेरोटिन मूड अच्छा करने का काम करता है और मन को शांति और आराम का एहसास कराता है। योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई परीक्षा के दौरान तनाव को कम करने और सफलता के लिए जरूरी है कि पढ़ाई योजनाबद्ध तरीके से की जाए। विषयों और समय को सही तरीके से बांटकर नियमित अध्‍ययन करना, लाभदायक होता है। प्राणायाम या एक्‍सरसाइज करें योग या प्राणायाम करने से दिमाग से तनाव चला जाएगा और आप अच्‍छा महसूस करेंगे। इसमें धीमी, गहरी सांस लेने से रक्तचाप कम करने में भी मदद मिलती है। ब्रेक के दौरान आप कभी भी इसे कर सकते हैं। इसके अलावा थोड़ी बहुत एक्‍सरसाइज करनी भी काफी जरुरी है, जिससे आपका मन खुश रहेगा। ब्रेक लीजिये अगर आप माता पिता के डर से घंटों कुर्सी पर चिपक कर बैठे रहते हैं तो ऐसा ना करें क्‍योंकि इससे तनाव हो सकता है। बीच-बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें। इससे आप तरोताजा तो रहेगें ही साथ ही रिविजन भी अच्‍छा होगा। हमेशा पॉजिटिव सोंचे चाहे कैसी भी स्थितियां आये। अपनी सोच सकारात्मक रखे। अगर आपकी सोच नकारात्मक हो गयी तो आप किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सकते। साथ में आपको इससे केवल परेशानी ही होगी जबकि पॉजिटिव थिंकिंग के बल पर आप बड़ी से बड़ी समस्या का हल आसानी से निकाल सकते है। गहरी और अच्‍छी नींद लें गहरी नींद लेना तनाव दूर करने का सबसे उपयुक्त तरीका होता है। आप खुद इसे आजमा के देख ले। जब हम गहरी नींद लेते है तो तब हमें काफी रिलैक्‍स मिलता है और हम बेहतर महसूस करते है। आप जब भी तनाव महसूस हो आप एक अच्छी सी नींद ले। वैसे एक दिन में हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए। Related Articles

पाइल्‍स है तो जरुर आजमाएं मूली, होगी बीमारी दूर

Monday, March 12 2018

पाइल्‍स है तो जरुर आजमाएं मूली, होगी बीमारी दूर

» पाइल्‍स है तो जरुर आजमाएं मूली, होगी बीमारी दूर पाइल्‍स है तो जरुर आजमाएं मूली, होगी बीमारी दूर Diet Fitness Published: Monday, March 12, 2018, 12:21 [IST] Subscribe to Boldsky बवासीर या पाइल्स एक आम बीमारी है जो आए दिन किसी ना किसी को हो रही है। इस रोग में गुदे में छोटे-छोटे मस्से जैसे बन जाते हैं। जो समय के साथ आकार में बड़े हो जाते है और इसमें हर समय दर्द और जलन बनी रहती है। जो लोग पाइल्स झेलते हैं उन्‍हें परिवार वालों से इसके बारे में कहने से झिझक महसूस होती है। यहां तक कि वह इसका जिक्र डॉक्टरों से भी करने में कतराते हैं। लेकिन डॉक्टर से सलाह लेकर उसका सही इलाज कराना बहुत जरूरी है। क्‍या आप जानते हैं मूली, जो घर घर में सलाद के रूप में खाई जाती है, वह पाइल्‍स के इलाज में कितनी लाभदायक हो सकती है? यह पाइल्‍स को ठीक करने की क्षमता रखती ही है साथ में इस बीमारी की हालत को और अधिक बिगड़ने से रोकती है। मूली के नियमित और सही इस्तेमाल से पाइल्स की समस्या को कुछ महीनों में दूर किया जा सकता है। अगर आप या आपके घर में कोई भी व्‍यक्‍ति पाइल्‍स से पीडित है तो मूली इस मामले में काफी कार्यगर हो सकती है। इसके अलावा अगर आप पाइल्‍स से पीडित हैं तो अपनी डाइट को बदलिये। अपनी डाइट में ढेर सारे फल शामिल कीजिये। कैसे मदद करती है मूली? शायद आपको पता ना हो लेकिन मूली में काफी मात्रा में घुलनशील फाइबर होता है, जो ना केवल मल को मुलायम करने में मदद करती है बल्‍कि खाने को भी आराम से पचाती भी है। मूली में वाष्पशील तेल भी होता है, जो पाइल्‍स के दौरान पैदा होने वाले दर्द और सूजन को कम करता है। आप मूली का प्रयोग पाइल्‍स को ठीक करने के लिये कैसे कर सकते हैं? अगर आप पाइल्‍स से पीडि़त हैं तो आप सफेद मूली का प्रयोग करें। आप इसे दो प्रकार से यूज़ कर सकते हें। शुरुआती दौर पर दर्द को दूर करने के लिये : 100 ग्राम मूली को घिस कर उसमें 1 चम्‍मच शहद मिलाएं और दिन में इसे दो बार खाएं। यह कब्‍ज से भी छुटकारा दिलाएगा। अगर मूली खानी अच्‍छी ना लगे यदि आप बिल्‍कुल भी मूली प्रेमी नहीं हैं या फिर इसे खाना अच्‍छा नहीं लगता है तो आप मूली का 1 गिलास रस निकाल कर उसमें चुटकी भर नमक मिलाएं और दिन में दो बार पियें। इससे आपको मन चाहा रिजल्‍ट मिलेगा। बहुत ज्‍यादा दर्द और सूजन है तो ऐसे प्रयोग करें सफेद मूली का पेस्‍ट बना कर उसमें थोड़ा दूध मिलाएं। इस पेस्‍ट को उस हिस्‍से पर लगाएं जहां बहुत ज्‍यादा दर्द या सूजन है। मूली के पावडर का सेवन मूली की कुछ पत्‍तियां ले कर उन्‍हें धो लें और छाया में सुखा लें। सुखाने के बाद उनका पावडर बना लें। रोजाना इस पावडर का एक चम्‍मच करीबन 40 दिनों तक खाएं। आप ऐसे भी कर सकते हैं मूली के पावडर का सेवन मूली की कुछ पत्‍तियां ले कर उन्‍हें धो लें और छाया में सुखा लें। सुखाने के बाद उनका पावडर बना लें। रोजाना इस पावडर का एक चम्‍मच करीबन 40 दिनों तक खाएं। Related Articles

इन कारणों से योनि में आ जाती है सूजन..

Monday, March 12 2018

इन कारणों से योनि में आ जाती है सूजन..

» इन कारणों से योनि में आ जाती है सूजन.. इन कारणों से योनि में आ जाती है सूजन.. Women Updated: Monday, March 12, 2018, 14:51 [IST] Subscribe to Boldsky महिलाओं को प्राइवेट पार्ट क‍ी साफ सफाई के लिए जागरुक होना जरुरी है क्‍योंकि सफाई के अभाव में महिलाओं योनि के संक्रमण से संक्रमित होना पड़ता हैं। जिस वजह से योनि में सूजन भी आ सकती हैं। महिलाओं में अक्‍सर योनि की सूजन की शिकायत रहती हैं। यह बहुत सामान्‍य सी समस्‍या हैं, हर किसी को कभी न कभी वुल्‍वा में सूजन की शिकायत जरुरत होती हैं। योनि में होने वाली सूजन को वेजिनाइटिस भी कहते है, जिसके परिणामस्‍वरुप योनि डिस्‍चार्ज, योनि में खुजली और दर्द होता हैं। । यह संक्रमण कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह समस्या उन महिलाओं में अधिक होती है जो यौन क्रिया में अक्सर सक्रिय रहती हैं। कभी कभी एंटीबायोटिक्स लेने से भी इन जीवाणुओं में वृद्धि होती है और संक्रमण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अन्य कारण हैं - गर्भावस्था के दौरान, एस्ट्रोजन का स्तर, हॉर्मोन में बदलाव, मधुमेह आदि के वजह से भी योनि में सूजन या वेजिनाइटिस हो जाता हैं। योनि में सूजन के लक्षण.. योनि में सूजन के कई कारण होते हैं, इसके लक्षण निम्‍न होते हैं - योनि और वुल्‍वा के चारो तरफ, खुजली, जलन और सूजन आ जाएगी। वुल्‍वा के आस पास दर्द होना। सेक्‍स के दौरान दर्द और असुविधाजनक लगना। बार बार पेशाब लगना और पेशाब करते समय दर्द होना। वजाइना डिस्‍चार्ज होना। योनी में यीस्ट संक्रमण यह सबसे आम प्रकार का योनि संक्रमण है। ये कैंडिडा नामक फंगस प्रजाति के कारण होता है। कैंडिडा आपकी योनि में कम संख्या में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं जो आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते। लेकिन जब वे किसी वजह से संख्या में बढ़ जाते हैं तब योनि संक्रमण का कारण बनते हैं। योनि में बैक्टीरियल संक्रमण आमतौर पर लेडीज के गुप्तांग पर स्वस्थ प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं जिनसे कोई भी प्रॉब्लम नहीं होती लेकिन कभी कभी कई कारणों से बुरे बैक्टीरिया की संख्या ज्यादा हो जाती है और आपको प्राइवेट पार्ट में बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो जाती है जिसके लक्षण होते हैं खुजली, जलन, सूजन और बदबूदार डिस्चार्ज होना| ट्राइकोमोनिएसिस ये संक्रमण यौन संचारित संक्रमण है। यह संक्रमण संभोग के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित होता है। यौन संचारित रोग यौन रोग के द्वारा भी अकसर महिला को योनी की खारिश और दुसरे लक्षण होने की शिकायत होती है| नीचे कुछ यौन गुप्त रोग हैं जिनके कारण प्राइवेट पार्ट में खाज होना एक आम बात है| हपर्स यह हपर्स (HSV) द्वारा फैलाया जाता है इसमें गुप्तांग के आस पास दाने और घाव हो जाते हैं| इसमें रोगी को जलन , दर्द और काफी तेज खुजली रहती है| असंक्रामक वैजिनाइटिस वजाइना स्‍प्रे, डूश, सुगंधित साबुन, सुंगधित डिटरर्जेंट और शुक्राणुनाशक उत्‍पादो से एलर्जी हो सकतीह ै या योनि के ऊतकों में जलन हो सकती हैं। एस्‍ट्रोजन की कमी के चलते महिलाओं के शरीर में एस्‍ट्रोजन हार्मोन की कमी के चलते योनि में सूजन आ जाती हैं। इसे वजाइन अट्रोफी भी कहा जाता है, जिसमें योनि में खुजली और आसामान्‍य डिस्‍चार्ज होने लगता है। ब्रेस्‍टफीडिंग, मैनोपॉज, ऑवेरी में चोट लगने या ऑवेरी निकाल देने के वजह से भी एस्‍ट्रोजन के स्‍तर पर कमी आ जाती हैं। Related Articles

गर्मियों में चुभती जलती घमौरियां का ठंडा ठंडा घरेलू ईलाज

Monday, March 12 2018

गर्मियों में चुभती जलती घमौरियां का ठंडा ठंडा घरेलू ईलाज

» गर्मियों में चुभती जलती घमौरियां का ठंडा ठंडा घरेलू ईलाज गर्मियों में चुभती जलती घमौरियां का ठंडा ठंडा घरेलू ईलाज Wellness Published: Monday, March 12, 2018, 16:05 [IST] Subscribe to Boldsky मौसम का मिजाज बदल चुका हैं, गर्मियों ने दस्‍तक दे दी हैं, घरों में गर्मियों से बचने के लिए अभी से जतन शुरु हो चुके हैं। गर्मियों में तपती धूप में बाहर निकलना किसी बुरे सपनें से कम नहीं होता हैं। गर्मियों में तपती और चिलचिलार्ती धूप से भी ज्‍यादा जो चीज और डरा देती हैं वो होती है घमौरियां। गर्मियों में घमौरियां होना आम समस्या है। ये सबसे ज्यादा गर्दन, पेट तथा पीठ पर होती है और खुजली व जलन पैदा करती हैं। गर्मियों में घमौरियों से बचने के लिए खाने में अधिक से अधिक कच्चे प्याज का सेवन करें, क्योंकि कच्ची प्याज गर्मी से बचाती है। ऐसे और दूसरे घरेलू उपायों से भी घमौरियों दूर होती हैं। इनसे बचने के लिए आपको कुछ आसान से घरेलू उपाय करने होंगे। खीरे का उपयोग खीरे में शरीर को ठंडा रखने का शक्तिशाली गुण होते हैं। एक गिलास पानी में नींबू का रस निचोड़ लें और इसी पानी में खीरे के पतले-पतले टुकड़े काटकर डाल दें। इसके बाद इन टुकड़ों को घमौरियों की जगह पर लगाएं। आपको आराम मिलेगा। आम का उपयोग कच्चा आम शरीर की गर्मी को ठंडा करने में बेहद प्रभावशाली होता है। कच्चे आम को धीमी आंच में भूनकर इसके गूदे का शरीर पर लेप करने से घमौरियां दूर हो जाती है। इसके अलावा कच्‍चें आम का पाना बनाकर पीने से भी घमौरियों का ईलाज किया जा सकता हैं। एलोवेरा घमौरियों को दूर करने के लिए एलोवरा जैल भी बहुत ही इफेक्टिव हैं। ये शरीर से जलन और खुजली जैसी समस्‍या का रामबाण ईलाज हैं। इसके लिए एलोवेरा के पत्‍तों में से जैल निकालकर लगा लें। मेहंदी से घमौरियों का इलाज: शरीर में घमौरियां होने पर मेहंदी का लेप करने से घमौरियां कुछ ही समय में बिल्कुल खत्म हो जाती हैं। नहाते समय पानी में मेहंदी के पत्तों को पीसकर मिला लें। इस पानी से नहाने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं और रोगी को राहत मिलती है। मुल्तानी मिट्टी मुल्तानी मिट्टी घमौरी की जलन से निजात दिलाती है और खुजली भी मिटाती है। इसके लिए पांच चम्मच मुल्तानी मिट्टी में गुलाब जल मिलाकर लेप बनाएं और इस लेप को घमौरियों पर दिन में एक बार लगाएं। बर्फ घर में उपलब्ध बर्फ को घमौरियों वाले स्थान पर लगाने से आराम मिलता है। घमौरियों में ठंडक मिलती है और तुरंत आराम मिलता है। नारियल के तेल नारियल के तेल में कपूर को मिलकार पूरे शरीर पर मालिश करने से घमौरियाँ दूर हो जाती हैं। नीम घमौरियों से बचने के लिए नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर नहाना चाहिए। इससे घमौरियां दूर हो जाएंगी। सरसों दो चम्मच सरसों के तेल में दो चम्मच पानी मिलाकर सुबह और शाम मालिश करने से घमौरियां दूर होती हैं।Home Remedies To Treat Prickly Heat Naturally Related Articles

गर्मियों में Pimples Free चेहरे के लिए रखें इन बातों का ध्‍यान..

Monday, March 12 2018

गर्मियों में Pimples Free चेहरे के लिए रखें इन बातों का ध्‍यान..

» गर्मियों में Pimples Free चेहरे के लिए रखें इन बातों का ध्‍यान.. गर्मियों में Pimples Free चेहरे के लिए रखें इन बातों का ध्‍यान.. Skin Care Published: Monday, March 12, 2018, 18:30 [IST] Subscribe to Boldsky गर्मी आते ही न सिर्फ पसीने के समस्‍या ज्‍यादा होती है बल्कि चेहरे भी ऑयली होने लगता है। गर्मियों के दौरान तेज धूप के कारण अधिकांश लोगों के चेहरे पर मुहांसे निकल आते हैं, इसलिए फाइबर युक्त भोजन ग्रहण करें और नियमित रूप से अच्छी तरह से चेहरे की सफाई करें। इस आर्टिकल के जरिए बता रहे है कैसे गर्मियों में मुहांसों की समस्‍या से निजात पाया जा सकता है। ऑयल फ्री फूड खाएं चिकनाई व वसा युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन नहीं करें। आइसक्रीम, चॉकलेट, केक और पिज्जा के सेवन से समस्या बढ़ सकती है। चीनी और रिफाइंड आटे से बने खाद्य पदार्थ नहीं खाएं। रेशेदार फल खाएं कब्ज बढ़ाने वाले भोज्य पदार्थो का सेवन नहीं करें। रेशेदार और सिट्रस वाले फलों, खरबूजे, अंकुरित अनाज के सेवन से पेट साफ रहता है और मुहांसे होने की संभावना कम रहती है। स्‍क्रब करें गर्मियों के दौरान अधिक मात्रा में धूल और गंदगी चेहरे पर जम जाती है, इसलिए रोजाना चेहरे को सौम्य और नीम युक्त फेसवॉश से धुलना नहीं भूलें। चेहरे के रोम छिद्रों को खोलने के लिए सप्ताह में एक दिन स्क्रब का इस्तेमाल जरूर करें। पानी भी खूब पिएं। जेल मॉइश्‍चराइजर इस्‍तेमाल करें गर्मियों में जेल वाला मॉइश्चराइजर इस्तेमाल करें, ताकि ज्यादा चिकनाई से मुहांसे नहीं निकल सकें। रेटिनॉल, ग्लाइकोलकि एसिड और बेंजोइल पेरोक्साइड युक्त क्रीम या लोशन गर्मियों के दौरान मुहांसे रोकने में मददगार होते हैं। इन तीनो में से कोई भी इंग्रीडिएंट युक्त नाइट क्रीम का इस्तेमाल करें। त्वचा विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें अगर आपको लगता है कि मुहांसों पर काबू पाना आपके बस के बाहर है तो किसी त्वचा विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें। मुहांसों का गंभीरता का आकलन करने के बाद चिकित्सक आपका सही इलाज कर सकते हैं, नॉन इंवेजिव वीनस विवा लेजर ट्रीटमेंट भी मुहांसों को रोकने में मददगार होता है। Related Articles

शुगर स्‍क्रब से दूर करें स्‍किन की कंडीशन, ऐसे बनाएं

Monday, March 12 2018

शुगर स्‍क्रब से दूर करें स्‍किन की कंडीशन, ऐसे बनाएं

Published: Monday, March 12, 2018, 18:57 [IST] Subscribe to Boldsky क्‍या आपने कभी सोंचा है कि किचन में रखी हुई चीनी यानी शुगर चेहरे की सुंदरता बढाने में कितनी किफायती होती है। यह हमारी स्‍किन को ब्राइट तो बनाती ही है साथ में रउसे साफ और हेल्‍दी भी रखती है। स्‍किन को अगर अच्‍छी तरह से स्‍क्रब ना किया गया तो यह दिखने में खराब लगने लगती है। इसलिये शुगर से आप घरेलू स्‍क्रब तैयार कर सकती हैं। आइये जानते हैं यह कैसे बनाया जा सकता हे। 1. शहद, नींबू और शुगर स्‍क्रब स्‍किन को गोरा बनाने के लिये शहद और नींबू का मेल काफी अच्‍छा माना जाता है। यह स्‍किन को मॉइस्‍चराइज भी करता है जिससे स्‍किन काफी सुंदर लगने लगती है। इसे आप आराम से घर पर बना सकती हैं, जिसके लिये आपको 3 चम्‍मच शहद, 2 चम्‍मच नींबू का रस और 2 चम्‍मच शक्‍कर मिलानी होगी। इस स्‍क्रब को धीरे धीरे चेहरे पर लगा कर मलें और 10 मिनट तक छोड़ दें। बाद में सादे पानी से चेहरे को धो लें। इसे आप हफ्ते में तीन बार करें। 2. बादाम तेल और शुगर स्‍क्रब बादाम तेल में विटामिन सी होता है जिससे स्‍किन की समस्‍या दूर होती है। एक कटोरी में 1 चम्‍मच शुगर और 2 चम्‍मच बादाम तेल लें। फिर इससे चेहरे को स्‍क्रब करें और फिर ठंडे पानी से धो लें। आपको ऐसा हफ्ते में तीन बार करना होगा। 3. केला और शुगर स्‍क्रब स्‍किन को हाइड्रेट करने के लिये केला सबसे अच्‍छा माना जाता है। केले में विटामिन ए, बी और सी के साथ अन्‍य मिनरल्‍स पाए जाते हैं। केले को काट कर उसे मैश कर के पेस्‍ट बनाएं। फिर उसमें 2 चम्‍मच शक्‍कर डाल कर पेस्‍ट बनाएं। इस पेस्‍ट से चेहरे को स्‍क्रब करें और 5 मिनअ के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें। ऐसा आपको हफ्ते में दो बार करना है। 4. नारियल तेल और शुगर स्‍क्रब स्‍किन को मॉइस्‍चराइज करने के लिये नारियल तेल काफी अच्‍छा होता है। इससे स्‍किन मुलायम होती है। एक कटोरी में 3 चम्‍मच नारियल तेल लें और उमसें 2 चम्‍मच शहद और 3 चम्‍मच शक्‍कर मिलाएं। अगर यह स्‍क्रब काफी सूख है तो इसमें थोड़ा सा और नारियल तेल मिला लें। इस मिश्रण से चेहरे को सक्रब कर के सादे पानी से चेहरा धो लें। 5. चॉकलेट स्‍क्रब कोकोआ पावडर में ढेर सारा एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि स्‍किन को प्राकृतिक रूप से चमकदार बनाता है। यह डैमेज स्‍किन को रिपेयर करता है और स्‍किन को हेल्‍दी बनाता है। इस स्‍क्रब को बनाने के लिये 2 चम्‍मच शुगर, 1 चम्‍मच कोकोआ पावडर और 2 चम्‍मच नारियल तेल मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और बॉडी पर भी। 15 मिनट के बाद सादे पानी से इसे धो लें। इसे हफ्ते में दो बार लगाएं। 6. दही और शुगर स्‍क्रब दही से चेहरे की झाइयां दूर होती हैं और बैक्‍टीरिया का खात्‍मा होता है। यह डेड सेल्‍स को भी मिटाती है। एक कटोरी में आधा कप ताजी दही और 2 चम्‍मच शुगर मिला कर मिक्‍स करें। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और फिर स्‍क्रब करें। फिर इसे सादे पानी से धो लें और सुखा लें। 7. ग्रीन टी और शुगर स्‍क्रब यह स्‍क्रब एंटीऑक्‍सीडेंट से भरा होता है जो कि स्‍किन की कंडीशन को ठीक करता है। इसमें एंजाइम्‍स और अमीना एसिड भी हेाता है जिससे स्‍किन हेल्‍दी बनती है। इस स्‍क्रब को बनाने के लिये 2 चम्‍मच ग्रीन टी में 3 चम्‍मच शुगर और 2 चम्‍मच हनी मिक्‍स करें। अपने चेहरे पर इस स्‍क्रब को लगाएं और बाद में ठंडे पानी से धो लें। ग्रीन टी को बना कर ही डालें। Related Articles

1 हफ्ते में इस Skin-whitening पैक से बन जाएं गोरी

Monday, March 12 2018

1 हफ्ते में इस Skin-whitening पैक से बन जाएं गोरी

एक आलू को छोटे पीस में काट लें। आलू को घिस कर उसके रस को निकाल लें। फिर उसमें कॉटन पैड डाल कर उसे चेहरे पर लगाएं। इसको अपने चेहरे पर 15-20 मिनट के लिये छोड़ दें। बाद में इसे नार्मल पानी से धो लें। और मॉइस्‍चराइजर लगा लें क्‍योंकि इसे लगाने के बाद स्‍किन ड्राई हो सकती है। इसे हफ्ते में तीन बार लगाएं। 3. बेकिंग सोडा स्‍क्रब बेकिंग सोडा में ऐसे गुण होते हैं जो डेड सेल्‍स को निकालते हैं, बैक्‍टीरिया को मारते है और स्‍किन को रिफ्रेश बना कर ब्राइट करते हैं। सामग्री- 2 चम्‍मच बेकिंग सोडा पानी विधि- 1 टीस्‍पून बेकिंग सोडा और पानी ले कर मिलाएं। फिर चेहरे पर धीरे धीरे स्‍क्रब करें, गोल मोशन में। फिर चेहरे को नॉर्मल पानी से धो कर क्रीम लगा लें। ऐसा रोजाना करें जब तक कि आपको डिफरेंस ना दिखे। हांलाकि उन लड़कियों को यह उपचार नहीं आजमाना चाहिये जिनके चेहरे पर एक्‍ने हैं या फिर स्‍किन सेंसटिव है। 4. दही पैक दही से स्‍किन की सारी गंदगी बाहर निकलती है, जिससे स्‍किन एकदम ब्राइट और क्‍लीन हो जाती है। सामग्री- 1 चम्‍मच शहद विधि- एक कटोरी में 2 चम्‍मच दही और 1 चम्‍मच शहद मिलाएं। इस पेस्‍ट को पूरे चेहरे पर लगाएं। फिर इसे 20 मिनट के लिये छोड़ दें। फिर इसे पानी से धो लें। इस विधि को रोजाना करें और रिजल्‍ट देंखे। 5. ओटमील फेस पैक ओटमील में डेड सेल्‍स को हटोन के गुण होते हैं। साथ ही इसमें प्रोटीन होता है जो कि स्‍किन को ब्राइट करता है। सामग्री- 2-3 चम्‍मच गुलाब जल विधि - एक ब्‍लेंडर में ओटमील का पावडर बनाएं। उसमें रोज वॉटर डाल कर पेस्‍ट बनाएं। अपने चेहरे पर पेस्‍ट लगाएं। इस पेस्‍ट को 15 मिनट तक लगा छोड़ दें। इसे हफ्ते में दो बार लगाएं और रिजल्‍ट देंखे। Related Articles

जरुर आजमाएं मठ्ठे से बने ये फेस पैक

Monday, March 12 2018

जरुर आजमाएं मठ्ठे से बने ये फेस पैक

Published: Monday, March 12, 2018, 16:57 [IST] Subscribe to Boldsky गर्मियां शुरु हो चुकी हैं तो ऐसे में मठ्ठा पीना एक आम बात हो जाएगी। पर क्या आप जानते हैं कि पाचन तंत्र को सुधाने के अलावा यह मंठ्ठा आपको जवा दिखने में मदद कर सकता है? मंठ्ठे में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा पर से डेड स्किन सेल को हटाता है तथा आपकी निखरी त्वचा को उभारता है। इसमें मौजूद जरूरी फैट त्वचा में भीतर तक समाते हैं, त्वचा को हाइड्रेट करके उसे टाइट व चमकदार बनाते हैं। मंठ्ठे में उच्च मात्रा में मौजूद फैट त्वचा पर अपना जादू बिखेरता है। यदि आप भी जवा दिखना चाहते हैं तो नीचे दिए गए मंठ्ठे से बने फेस पैक को 1. स्‍किन का टोन निखारे जैसा की हम सभी जानते हैं कि बटर मिल्‍क में लैक्‍टिक एसिड होता है इसलिये वह स्‍किन के टोन को निखारता है, जिससे स्‍किन गोरी दिखने लगती है। 1 चम्‍मच बटर मिल्‍क ले कर उसमें चुटकी भर हल्‍दी मिलाएं। इस लोशन को अपने चेहरे तथा गर्दन पर लगाएं। फिर इसे आधे घंटे के लिये लगा कर छोड़ दें और फिर पानी से धो लें। इस विधि को हर हफ्ते में दो बार करें। 2. तैलीय त्‍वचा के लिए तैलीय त्‍वचा पर बहुत जल्‍दी से धूल और मिट्टी के कण चिपक जाते हैं इसलिए टमाटर गुलाबजल, छाछ और ऑलिव/बादाम के तेल का ये पैक त्‍वचा की सफाई करने में मदद करता है। इस पैक को बनाने के लिये आधा कप छाछ, एक चम्‍मच टमाटर की प्‍यूरी, 5 बूंदें ऑलिव/बादाम के तेल की, 5 बूंदें गुलाबजल ले कर मिक्‍स करें। अब कॉटन बॉल की मदद से इसे अपनी त्‍वचा पर लगाएं। त्‍वचा के जिन हिस्‍सों पर तेल ग्रंथियां ज्‍यादा एक्‍टिव रहती हैं वहां पर इस मिश्रण को ज्‍यादा लगाएं। ठंडे पानी से त्‍वचा को वॉश कर लें। सप्‍ताह में तीन बार आपको ऐसा करें। 3. सन टैनिंग हटाने के लिये बेस्‍ट तरीका है कि आप चेहरे पर मठ्ठा लगाएं और इससे मुक्‍ती पाएं। आपको बस ¼ कप बटर मिलक लेना है उसमें आधा टमाटर का पेस्‍ट मिलाना है। फिर इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगा कर 30 मिनट के लिये छोड़ दें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें। दूसरा तरीका यह भी है कि इसके लिए 1 चम्मच मंठ्ठे में थोडा सा आम व 1 चम्मच शहद मिलाएं। इस सामग्री को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को अपने चेहरे व गर्दन पर लगाएं। 30 मिनट बाद अपने चेहरे को साफ पानी से धो लें। 4. रूखी त्‍वचा के लिये यह नैचरल फेस पैक रूखी त्वचा को मोइस्चराइज़ करके त्वचा को साफ व कोमल बनाता है। इस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच मंठ्ठे में आधा चम्मच क्रीम मिलाएं। इस घोल से अपनी त्वचा की 10 मिनट तक मालिश करें। फिर आधे घंटे बाद ठंडे पानी से अपने चेहरे को धो लें। इससे स्‍किन काफी ब्राइट लगने लगेगी। 5. क्‍लींजर के तौर पर काम करे यह स्‍किन से गंदगी को निकालता है, बेक्‍टीरिया साफ करता है और डेड सेल्‍स मिटाता है। पैक बनाने के लिये 3 चम्‍मच मठ्ठे में 1 चम्‍मच जैतून तेल, बादाम तेल और कुछ बूंद गुलाब जल मिलाएं। इन्‍हें मिक्‍स कर के कॉटन पैड से लगाएं। इससे आप चेहरे की गंदगी से मुक्‍ती पा सकती हैं। इसे 15 मिनट तक ऐसे ही रहने दें और फिर ठंडे पानी से धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक हर रोज करें। Related Articles

जानिए, नेपाल की 'जीवित कन्‍या' की पूजा का सच, पीरियड आने के बाद छीन लेते है 'देवी' की उपाधि

Monday, March 19 2018

जानिए, नेपाल की 'जीवित कन्‍या' की पूजा का सच, पीरियड आने के बाद छीन लेते है 'देवी' की उपाधि

Life » जानिए, नेपाल की 'जीवित कन्‍या' की पूजा का सच, पीरियड आने के बाद छीन लेते है 'देवी' की उपाधि जानिए, नेपाल की 'जीवित कन्‍या' की पूजा का सच, पीरियड आने के बाद छीन लेते है 'देवी' की उपाधि Life Updated: 10:36 नवरात्र शुरु हो चुके हैं, 9 दिन तक देवी के सभी स्‍वरुपों की पूजा की जाती हैं। नवरात्र के आखिरी दिन देवी के स्‍वरुपों को पूजने के लिए और 9 दिन की तप का फल पाने के लिए कन्‍या पूजन किया जाता हैं। कन्‍या पूजन का इतिहास बहुत पुराना हैं। लेकिन आपको जानकर बहुत आश्‍चर्य होगा कि भारत का पड़ोसी मुल्क नेपाल में जीवित कन्‍या को देवी बनाकर पूजने का रिवाज हैं, जिन्‍हें 'कुमारी देवी' कहा जाता हैं। जिन्‍हें साक्षात काली का स्‍वरुप मानकर उनको पूजा जाता हैं। यह एक राष्‍ट्रीय दर्जा होता हैं। यह परंपरा करीब तीन सदी पुरानी बताई जाती है। कालातंर में यहां 11 कुमारी देवियां हैं। जैसे ही एक कन्‍या से देवी की उपाधि वापस ले ली जाती हैं, उस रिक्‍त स्‍थान क‍ी पूर्ति के लिए कुमारी देवी की चयन प्रक्रिया शुरु कर दी जाती हैं। आइए जानते है कि आखिर कौन होती है कुमारी देवी और कैसे होता हैं उनका चयन? कैसे साधारण कन्‍या बनती है कुमारी देवी? नेपाल की कुमारी देवी का चयन के लिए जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह-नक्षत्र भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। माना जाता है कि कुमारी में 32 गुणों का होना अनिवार्य होता हैं। कुंडली के अलावा उनके भीतर कुछ ऐसे लक्षण देखे जाते हैं जो उनके कुमारी देवी बनने में मदद करते हैं जैसे उनके समक्ष भैंस के कटे सिर को रखा जाता है, इसके अलावा राक्षस का मुखौटा पहने पुरुष वहां नृत्य करते हैं। अगर जो भी बच्ची बिना किसी डर के इन परिस्थितियों को पार कर लेती हैं, उसे मां काली का अवतार मानकर कुमारी देवी बनाया जाता है। रॉयल गॉडेस नेपाल के लोगों की जीवित देवी या कुमारी देवी शाक्य या वज्रचार्य जाति से संबंध रखती हैं, इन्हें नेपाल के नेवारी समुदाय द्वारा पहचाना जाता है। नेपाल में करीब 11 कुमारी देवियां होती हैं जिनमें से रॉयल गॉडेस या कुमारी देवी को सबसे प्रमुख माना गया है। 3 साल के उम्र में ही बना दी जाती हैं.. शाक्य और वज्राचार्य जाति की बच्चियों को 3 वर्ष का होते ही उनके परिवार से अलग कर दिया जाता है और उसके बाद 32 स्तरों पर उनकी परीक्षाएं होती हैं। जिसके बाद चयनित कन्‍या को ‘कुमारी' नाम दे दिया जाता है। इन सभी बच्चियों को ‘अविनाशी' अर्थात जिसका अंत नहीं हो सकता, कहा जाता है। मासिक धर्म आने से पहले तक ये कन्‍याएं ताउम्र के लिए रॉयल गोडेस या कुमारी देवी बनकर नहीं रह सकती हैं। इसकी भी एक अवधि होती हैं, जब तक ये यौवन न छू लें अर्थात जब तक इन्हें मासिक धर्म शुरू नहीं हो जाता, तब तक ये कुमारी देवी की पदवी पर रहती हैं और उसके बाद कोई अन्य बालिका कुमारी देवी बनाई जाती है। लोगों की आस्‍था.. जब नेपाल में अप्रेल 2015 में भूकंप आया था अत्याधिक तीव्रता से आए भूकंप ने नेपाल की जमीन को हिलाकर रख दिया, हजारों की संख्या में लोग इस प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ गए। लेकिन एक स्थान ऐसा था जहां मौजूद लोगों पर आंच तक नहीं आई और वह स्थान था जीवित देवी के नाम से प्रख्यात नेपाल की ‘कुमारी देवी' का मंदिर। ये है मान्‍यता.. नेपाल के लोगों का मानना है कि ये जीवित देवियां आपदा के समय उनकी रक्षा करती हैं। इस मान्यता की शुरुआत 17वीं शताब्दी के आरंभ में ही हो गई थी। तब से लेकर अब तक नेपाल निवासी छोटी बच्चिययों को देवी का रूप मानकर उन्हें मंदिरों में रखकर उनकी पूजा करते हैं। उन्हें समाज और अपने परिवारों से अलग रहना पड़ता है। अलग हो जाता है रहन सहन कुमारी देवी बनने के बाद उन्हें कुमारी घर में रखा जाता है, जहां रहकर वे अपना ज्यादातर समय पढ़ाई और धार्मिक कार्यों में बिताती हैं। वह केवल त्यौहार के समय ही घर से बाहर निकल सकती हैं लेकिन उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ने चाहिए। ऐसे चली जाती है पदवी कुमारी देवी' की पदवी उनसे तब छीन ली जाती है जब उन्हें या तो मासिक धर्म शुरू हो जाए या फिर किसी अन्य वजह से उनके शरीर से रक्त बहने लगे या फिर मामूली सी खरोंच ही क्यों ना पड़ जाए। नहीं कर सकती शादी कुमारी देवी की पदवी से हटने के बाद उन्हें आजीवन पेंशन तो मिलती है लेकिन नेपाली मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता है कि जो भी पुरुष पूर्व कुमारी देवी से विवाह करता है उसकी मृत्यु कम उम्र में हो जाती है। इसलिए कोई भी पुरुष उनसे विवाह करने के लिए तैयार नहीं होता, जिस कारण उनमें से अधिकांश आजीवन कुंवारी रह जाती हैं। Related Articles