Health and Fitness

Steam Bath लेने से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्‍यान

Monday, October 16 2017

Steam Bath लेने से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्‍यान

बॉडी रिलेक्‍सेशन हो या सौंदर्य बढ़ाना हो, स्टीम बाथ को आप कभी भी ले सकते हैं। सौंदर्य में निखार पाने के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है। स्टीम बाथ लेने से हमारी त्वचा अंदर से साफ होती है। स्‍टीम से हमारे अंदर की मृत कोशिकाएं या डेड स्किन बाहर निकल जाती है। काफी हद तक हम रिलेक्‍स फील करते हैं। साथ ही स्‍टीम बाथ से काफी हद तक वेटलॉस किया जाता है। लेकिन स्‍टीम बाथ लेने के जितने फायदें है उतने ही हमें स्‍टीम बाथ लेने से पहले या बाद में ध्‍यान रखना होता है। स्टीम रूम में जाने से एक घंटे पहले तक कुछ ना खाएं। इससे आप असहज और ऐंठन महसूस कर सकते हैं। पानी पीके जाएं स्टीम रूम में शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होता है, जिस वजह से आपको पसीना आता है। इसलिए खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए रूम में जाने से पहले खूब पानी पी लें। शॉवर लें स्टीम रूम में जाने से पहले नहा लें। इससे शरीर की गंदगी और गंध निकल जाएगी, जिससे स्टीम रूम को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलेगी। तापमान का ध्‍यान रखें स्टीम रूम का तापमान 125 के बीच 115 डिग्री के बीच होता है और कमरा धुंध से भरा होता है। इसलिए हल्के कपड़े से पहनने से आपको ओवरहीटिंग से बचने से बचने में मदद मिलेगी। वैसे आप न्यूड या स्विमिंग सूट पर भी विचार कर सकते हैं। संक्रमण से बचें कमरे में तौलिये पर ही बैठें और जूते पहनें रखें। नम और गीली टाइल पर जीवाणु जमा हो सकते हैं, जिससे आप संक्रमित हो सकते हैं। तय समय तक ही रूम में रहें स्टीम रूम में जाने से पहले टाइमिंग सेट कर लें। ज्‍यादा हीट लगने या असहज होने पर तुरंत बाहर आ जाएं। इसे आप कई ब्रेक में ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा शरीर के निचले हिस्से का तापमान कम करने के लिए ठंडी हवा का सहारा लें। स्टीम के बाद क्या करें इसके बाद ठंडे पानी से नहांए लेकिन पानी ज्‍यादा ठंडा न हो वरना तबीयत खराब हो सकती है। सावधानियां स्टीम रूम के तापमान के कारण कई साइड इफ्फेक्ट हो सकते हैं। इसलिए अगर एक्सरसाइज या मौसम के कारण आपके शरीर का तापमान पहले से ही ज्यादा है, तो स्टीम रूम में जाने से बचें। अगर आपको सांस की बीमारी, हाई या लो ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के समस्या है, तो स्टीम रूम में जाने से पहले आपको एक बार अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इससे बचना चाहिए। ये होते है फायदें स्टीम बाथ थेरेपी लेने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है। इसे लेने से हमारे शरीर के डेड सेल्स निकल जाते हैं और हमारी त्वचा ग्लोइंग नज़र आती है। - शरीर के डेड सेल्स निकलने से हमारी बढ़ती उम्र को रोका जा सकता है। साथ ही हमारी त्वचा में निखार आने के साथ चेहरा टाइट होता है। - इसे लेने से हमारी त्वचा के पोर्स खुलते हैं और चेहरे की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। जिसके कारण चेहरे पर कील-मुंहासे नहीं होते।

रोजाना 1 अखरोट खाने से होते हैं ये 9 फायदे

Monday, October 16 2017

रोजाना 1 अखरोट खाने से होते हैं ये 9 फायदे

अखरोट एक स्वास्थयवर्धक ड्राई फ्रूट है। लगभग 28 ग्राम अखरोट खाने से आपको 100% से ज्यादा ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता है। अखरोट में विटामिन C, थियामिन, रिबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन B6, फोलेट, और विटामिन B12, E, K और विटामिन A मौजूद होने के साथ साथ कुछ मात्रा में केरोटीनोइड्स भी होते हैं। अखरोट में पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फ़ास्फ़रोस, पोटेशियम, जिंक,कॉपर आदि भी मौजूद होते हैं जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए जरुरी होते हैं। आपको बता दें कि दूसरे नट्स की ही तरह अखरोट में भी प्रचुर मात्रा में डाइटरी प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। सबसे बड़ी चीज यह है कि अखरोट खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है और आप इसको एक हेल्दी स्नैक की तरह भी खा सकते हैं। बच्चे अखरोट बहुत पसंद करते हैं और खासकर अखरोट से बने केक और बिस्किट बच्चों में बहुत ही लोकप्रिय है। यहाँ हम आपको अखरोट खाने से क्या क्या फायदे होते हैं उसके बारे में बताने जा रहें हैं ध्यान से पढ़िए।

1. दिमाग को स्वस्थ रखता है:

अखरोट में बहुत अधिक मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है जो आपके दिमाग की एक्टिविटी को बढाने में मदद करता है और जिसकी वजह से इसे बहुत अच्छा ब्रेन फ़ूड माना जाता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होने के अलावा आयोडीन और सेलेनियम भी होता है जो दिमाग को स्वस्थ रखते हैं।

2. कैंसर से बचाता है:

अखरोट में अच्छी मात्रा में पोलीफीनोल और फायटोकेमिकल्स होते हैं जिनमें एंटी-आक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जिसकी वजह से अखरोट आपको ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर आदि से बचाता है।

3. ह्रदय को स्वस्थ रखता है:

रोजाना कुछ मात्रा में अखरोट खाने से आपके हार्ट की आर्टरी यानी धमनियों में सूजन नहीं होता है जिससे आप कई तरह की होने वाली हार्ट की बीमारियों से बच जाते हैं। अखरोट आपके ब्लड वाहिकाओं की क्रियाविधि को ठीक रखता है जिससे आपकी धमनियों में प्लेक्स नहीं बन पाते हैं और आपका हार्ट स्वस्थ रहता है।

4. डायबिटीज नियंत्रित करता है:

वैसे तो अखरोट खाना सभी के लिए अच्छा होता है लेकिन जिनको डायबिटीज है उनको रोजाना अखरोट का सेवन करना चाहिए क्योंकि अखरोट में अधिक मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है जिसकी वजह से आपका वजन कम होता है साथ ही आपका डायबिटीज नियंत्रित रहता है।

5. वजन कम करता है:

हालांकि अखरोट में अधिक मात्रा में फैट होता है लेकिन इसके बावजूद भी यह वजन घटाने में मदद करता है। अखरोट में जो फैट होता है उसमें ओमेगा-6 फैटी एसिड और ओमेगा-9 फैटी एसिड होता है जोकि शरीर के लिए जरुरी है। अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 लिनोलेनिक एसिड भी वजन घटाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए अखरोट का इस्तेमाल रोजाना करना चाहिए।

6. हड्डियों को मजबूत रखता है:

ओमेगा 3 फैटी एसिड आपकी हड्डियों के लिए अच्छा होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड में जो अल्फ़ा-लिनोलेनिक एसिड होता है वो हड्डियों में होने वाले नुकसान को कम करके आपको ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। इसके साथ अखरोट में पाए जाने वाले कॉपर, मैग्नीशियम, और मैगनीज भी हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

7. लीवर को साफ़ रखता है:

अखरोट का सेवन करने से आपके शरीर में अमोनिया जैसे टॉक्सिक पदार्थ को निकालने में मदद होती है। इसके साथ ही अखरोट में पाए जाने वाले ग्लूटाथिओन और ओमेगा-3 फैट एसिड आपके लिवर को साफ़ करने में मदद करते हैं।

8. स्पर्म और सीमेन की क्वालिटी को बढाता है:

अपने डाइट में अखरोट का इस्तेमाल करने से पुरुष की स्पर्म क्वालिटी बढ़ जाती है जिससे उनकी फर्टिलिटी बढ़ जाती है। मेडिकल जर्नल "बायोलॉजी ऑफ़ रिप्रोडक्शन" के अनुसार रिसर्चर्स ने 117 लोगों पर एक अध्ययन किया जो वेस्टर्न डाइट को फॉलो करते थे। उन्होंने तीन महीने तक उनके डाइट में 75 ग्राम अखरोट का इस्तेमाल किया और पाया कि उनके स्पर्म सेल्स की एक्टिविटी में बढ़ोतरी हुई है। इसलिए अखरोट का सेवन लाभकारी माना गया है।

9. शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट होता है:

जब किसी ड्राई फ्रूट की एंटी-आक्सीडेंट वैल्यू की बात आती है तो सबसे पहले जो नाम आता है वो अखरोट का आता है। एक जर्नल है "फ़ूड एंड फंक्शन" जिसमें एक आर्टिकल छपा कि बाक़ी के ड्राई फ्रूट्स की तुलना में अखरोट एक बहुत ही अच्छा एंटी-आक्सीडेंट होता है। एक अच्छा एंटी-आक्सीडेंट होने की वजह से अखरोट आपको शरीर के लिए वो सारे लाभ देता है जो उसके लिए जरुरी होते हैं।

गजब...23 फीट के अजगर से निहत्ता भिड़ गया ये युवक, फिर क्या हुआ?

Monday, October 16 2017

गजब...23 फीट के अजगर से निहत्ता भिड़ गया ये युवक, फिर क्या हुआ?

इस संसार में बहुत से ऐसे देश है जिनसे आपको ऐसी ऐसी खबरे सुनने को मिलती रहती है जो आपके दिमाग में कई सारे सवाल खड़ा कर देती है। कई बार ये भी होता है कि आप फैसला नहीं कर पाते हो कि ये सही है या गलत। आपने हॉलीवुड की एक मूवी एनाकॉन्डा को जरूर देखी होगी। उसमें एक विशालकाय सांप होता है और आपने अक्सर बड़े-बड़े सांपों को पकडऩे के किस्से सुने होंगे, कई बार इस तरह के वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल भी हो जाते हैं। इनमें हमें ज्यादातर सांप ही संघर्ष करते हुए दिखाई देते हैं लेकिन आज आपको एक ऐसी घटना के बारें में बताने जा रहे हैं जिसमें एक सांप ने एक आदमी को छठी का दूध याद दिला दिया। लेकिन उस आदमी की हिम्मत की भी तारीफ करनी पड़ेगी जो निहत्था 23 फिट लंबे अजगर से भिड़ गया। ऐसा सच में हुआ है ये महज एक कहानी नहीं है। आइए जानते है ये हैरान कर देने वाली घटना कहां पर हुई है

इंडोनेशिया की है ये घटना

इस चौंका देने वाली घटना को इंडोनेशिया में अंजाम दिया गया है। पता चला है कि यहां पर रॉबर्ट रिब्बन नाम के एक लड़के ने ये काम किया है। ये लड़का एक सेक्योरिटी गार्ड है और इसकी उम्र 23 साल है। जिस दिन ये घटना हुई उस दिन वो अपने घर काम से लौट रहा था तो उसने देखा कि एक बड़े से सांप ने दो लोगों का रास्ता रोका हुआ था और उन्हे परेशान कर रहा था। इसके बाद जो हुआ वो यकीन करने लायक नहीं है। दूसरों के लिए सांप से भिड़ गया

दूसरों के लिए सांप से भिड़ गया

इस बहादुर युवक ने उन दोनो लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान खतरे में डाल दी और उस सांप से भिड़ गया। देखने वाले बताते है कि इन दोनो की लड़ाई काफी समय तक चलती रही और अंत में रॉबर्ट ने उस सांप को हरा दिया। रॉबर्ट ने जब लड़ाई खत्म की तो वो भी पूरी तरह से पस्त हो चुका था और उसके एक हाथ से खून निकल रहा था।

गवाना पड़ा अपना हाथ

इस लड़ाई के बाद रॉबर्ट ने जीत तो हासिल कर ली पर उसको इसकी बहुत बड़ी कामत भी चुकानी पड़ी। उस सांप से लड़ते हुए रॉबर्ट के एक हाथ की सारी हड्डियां टूट कर चकनाचूर हो गई। उसका एक हाथ अब कभी काम नहीं करेगा। इसकी बहादुरी के चर्चे बहुत दूर दूर तक फैल गए क्योंकि ये बात किसी फिल्म के ऐक्शन सीन से कम नहीं लगती है।

23 फीट की था सांप

इस घटना को सुनने वालों ने अपने दांतो तले उंगलिया दबा ली। क्या आप जानते है कि उस सांप की लम्बाई क्या थी। आप जब भी किसी छोटे से सांप को भी देखते है तो आप डर जाते है क्योंकि सांपो के प्रति एक दहशत सी भरी रहती है। इस लड़ाई के बाद जब घायल सांप को नापा गया तो पता चला कि उसकी लंबाई 23 फीट है। इस बात को देखकर सभी हैरान थे कि आखिर कैसे रॉबर्ट ने उसका सामना किया होगा।

पेट की चर्बी को तुरंत पिघला सकते है ये 10 फिटनेस सीक्रेट

Monday, October 16 2017

पेट की चर्बी को तुरंत पिघला सकते है ये 10 फिटनेस सीक्रेट

आपको पता है कि आपके शरीर के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है आपके शरीर का फिट होना। अगर आपके शरीर में चर्बी है तो आपको ये सबसे बड़ी समस्या है। पेट की चर्बी कम करने के लिए पहले सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि आहार और व्यायाम में परिवर्तन लाने से कम समय में ज्यादा वज़न घटा सकते है। तो आइये इस सच को जानें कि कैसे हमारे शरीर में चर्बी जमा और अलग होती है, इसके बाद अधिक से अधिक चर्बी कम करने के लिए अपनी जीवन शैली को किस तरह समायोजित करें। क्या आप एक जिद्दी मध्यभाग के साथ संघर्ष कर रहे हैं? पेट की चर्बी सिर्फ सुन्दरता के लिहाज़ से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी कई किस्म की बीमारियों की संभावना को बड़ा सकती है, अगर आपको ये समस्या ज्यादा दिनो तक रहती है तो आपको कई समस्याओं सामना करना पड़ेगा। आपको इस समस्या में कई गंभीर बीमारियां भी हो सकती है। तो आइए जानते है

स्टेप 1

अगर आप एक ब्रेड का पैकेट रोज खरीदकर लाते है और उसको खाने के शौकीन है तो आपको ये ध्यान रखना है कि इसके साथ आप 1 ग्राम फाइबर भी ले सकते है जो कि आपके शरीर के लिए बहुत जरूरी है। इससे आपकी चर्बी में कमीं आएगी और वो घटेगी।

स्टेप 2

जब आप डिनर करते है तो ध्यान रखें कि ये सबसे कम खाना खाने का समय होता है। इतने समय आपके प्लेट में खाना जितना कम हो उतना आपके लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। अगर इसकी जगह आपके प्लेट में सलाद रखी हुई है तो ये आपके पेट के लिए ज्यादा फायदेमंद है।

स्टेप 3

आपको ये तो जरूर पता होगा कि हमारे शरीर के लिए प्रोटीन कितना फायदेमंद है क्योंकि एक रिसर्च में पता चला है कि प्रोटीन खाने से शरीर का फैट जल्दी कम हो जाता है। इसलिए ये ध्यान रखें कि आपके शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होनी चाहिए।

स्टेप 4

अगर आप अपने पेट की चर्बी को कम करना चाहते है तो आपके कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है क्योंकि आपका दिन का खाना कैसा है ये या आपके शरीर को कम या ज्यादा करता है। इसलिए ध्यान रहे कि आपके शरीर में दिन में ओटमील, केला और अंडा जैसे हाईप्रोटीन के पदार्थ ही जाएं। इससे आपको लाभ मिलेगा।

स्टेप 5

अक्सर देखा जाता है कि जब हम परहेज करते है तो ये होता है कि हमारा ध्यान भटक जाता है। हमारा वही चीज खाने का मन होता है जिसको हमें नहीं खाना है या जो हमें स्किप करने को बोला गया है। आपको ध्यान रखना है कि आपको मन को काबू में रखना है। वरना आपके परहेज का कोई फायदा नहीं होगा।

स्टेप 6

आप जब भी खाना खाएं तो ध्यान रखें कि आपका दिमाग सिर्फ खाने पर ही होना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि जब आप खाना खाते है चाहे वो लंच हो या डिनर ध्यान रखें कि आपको टीवी, कंप्यूटर या मोबाइल की तरफ ध्यान देकर खाना नहीं खाना है क्योंकि ऐसा करने आपका ध्यान बटेगा और आप देर तक खाना खाएंगे जो कि हानिकारक होता है।

स्टेप 7

आपको ध्यान रखना है कि आपको ऐसी चीजें ही खानी है जो आपके लिए सही हो। पेट की चर्बी कम करते समय और अपना पेट कम करते समय आपको ये ध्यान रखना है कि आपको कोई ऐसी चीज नहीं खानी है जो आपके पेट को खराब करे या जो आपके पाचन क्रिया को नुकसान पहुंचाए।

स्टेप 8

आपको अगर चाय पीने का शौक है तो आपको ये ध्यान रखना है कि आपको कभी भी खाना खाने के बाद चाय नहीं पीनी है। आप चाहे तो बाद में एक कप चाय लेकर उसको आराम से पी सकते है।

स्टेप 9

आपको इस बात का ध्यान भी रखना है कि इस दौरान आप जो भी खा रहे है वो खाना आपके घर में ही पका हुआ होना चाहिए। क्योंकि अगर आपने बाहर से खाना मंगाया तो आप कितना फैट गेन कर रहे है आपको पता भी नहीं होता है।

स्टेप 10

आपको पता होना चाहिए कि दालें आपके शरीर के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। अगर आपने अपनी पेट की चर्बी को कम करनें में सफलता पाई तो इसमें दालों और चने का महत्वपूर्ण हाथ होता है। इस दौरान दालों को भी अपने डायट में शामिल करें।

आखिर किन-किन कारणों से होती है कब्‍ज, जान लेंगे तो बच जाएंगे

Monday, October 16 2017

आखिर किन-किन कारणों से होती है कब्‍ज, जान लेंगे तो बच जाएंगे

जिंदगी में हर किसी को कभी न कभी कब्‍ज जरुर होती है। सुबह अगर ठीक से पेट साफ ना हो तो पूरा दिन खराब चला जाता है। कब्‍ज होने का मतलब है कि स्‍टूल पास करने में परेशानी होना। कब्‍ज एक ऐसी परेशानी है जिसमें पाचन तंत्र खराब हो जाता है। जिसके कारण से वह जो खाता है उसे ठीक तरीके से पचा नहीं पाता। डॉक्‍टर के पास जाने से पहले आपको कब्‍ज की बीमारी का कारण जरुर पता लगा लेना चाहिये। कब्ज की समस्या शरीर में कमजोरी, हाईपोथायराइड या पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने, आदि के कारण भी सकती है। यदि आप बहुत ज्‍यादा दवाइयों का सेवन करते हैं तो यह उसके कारण भी हो सकती है। पर जाने-अनजाने कुछ ऐसे भी कारण हैं जिसके बारे में हम नहीं जानते। आज हम आपको ऐसे ही कारणों के बारे में बताएंगे, जिसके कारण से आपको कब्‍ज की बीमारी होती है। साथ में इसे दूर करने के कुछ उपाय भी बताएंगे। आइये जानिये इसके लिये क्‍या करना है:

पानी कम पीना

कब्‍ज होने का एक कारण है डीहाइड्रेशन। जब खाना हमारी छोटी आंत से बड़ी आंत में जाता है, तब पानी कम होने की वजह से हमारा स्‍टूल हार्ड हो जाता है, जिसकी वजह से इसे पास होने में दिक्‍कत आती है। इसलिये आपको दिनभर में 8 गिलास पानी जरुर पीना चाहिये।

वसा युक्‍त आहार

ऐसे आहार जिसमें काफी ज्‍यादा फैट होता है वह कब्‍ज को बढ़ा सकता है। आइये जानते हैं ऐसा कैसे होता है। आप जो आहार खाते हैं, उसमें से प्रोटीन और कार्ब सबस पहले पचता है लेकिन वसा को पचाने में थोड़ा समय लगता है। इससे पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है और कब्‍ज की शिकायत होने लगती है।

बहुत ज्‍यादा शराब पीना

आइये जानते हैं कि कब्‍ज पैदा करने में शराब का क्‍या योगदान है। शराब शरीर में डीहाइड्रेशन पैदा करती है, जिससे ग्‍लूकोज़ मेटाबॉलिज्‍म धीमा पड़ जाता है। इससे कब्‍ज होने लगती है।

कॉफी ज्‍यादा पीना

कैफीन से भी भयानक कब्‍ज होने के चांस होते हैं। इसे पीने के बाद आपको बार बार पेशाब लगती है और शरीर में पानी की कमी होती है। इसके साथ बड़ी आंत स्‍टूल से नमी को सोख लेता है, जिससे आपका स्‍टूल हार्ड हो जाता है। रिजल्‍ट के तौर पर आपको स्‍टूल पास करने में दिक्‍कत आने लगती है।

दवाइयो का सेवन

कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं, जो व्यसकों में कब्ज की समस्या का कारण बन सकती हैं। वे लोग जो इन दवाओं का सेवन कर रहे हैं, उन्हें कब्स की शिकायद से बचने के लिये दिनभर में खूब सारा पानी पीना चाहिये। वहीं सीने में जलन पैदा होने पर अगर आप एंटासिड खाते हैं, तो भी कब्‍ज हो सकती है। क्‍योंकि इस दवाई में कैल्‍शियम और एल्यूमीनियम के घटक होते हैं। कब्‍ज से कैसे पाएं छुटकारा

हाई फाइबर वाले फूड खाएं

हाई फाइबर वाले फूड में घुलनशील फाइबर होते हैं। इन्‍हें खाने से आपकी कब्‍ज की समस्‍या में सुधार आएगा। आइये जानते हैं कैसे... हमारी बॉडी फाइबर को आसानी से नहीं पचा पाती, लेकिन यह स्‍टूल को मुलायम और नमी युक्‍त बना सकता है। इससे स्‍टूल को पास करने में आसानी आती है। ढेर सारा तरल पदार्थ पिएं पानी ज्‍यादा पीने से कब्‍ज की समस्‍या से राहत मिलती है। कब्‍ज और डिहाइड्रेशन एक दूसरे के साथ जुड़े हए हैं। तो अगर आप बहुत ज्‍यादा पानी पिएंगे तो आपको कोलोन स्‍टूल से कम मात्रा में पानी सोखेगा। जिससे स्‍टूल का मॉइस्‍चराइज़र बना रहेगा और वह आराम से पास हो जाएगा।

व्‍यायाम

व्‍यायाम करने से आपकी कब्‍ज की समस्‍या ठीक हो सकती है। रोजाना 10-15 मिनट के लिये बिस्‍क वॉक करें जिससे आपक पेट का स्‍वास्‍थ्‍य बना रहे और पाचन क्रिया ना बिगड़े।

ढेर सारी सब्‍जियां भी खाएं

अगर आप ढेर सारी सब्‍जियां अपनी प्‍लेट मे शामिल करते हैं तो आपको कभी कब्‍ज नहीं होगा। जानिये कैसे? क्‍योकि सब्‍जियों में ढेर सारा फाइबर होता है जिससे स्‍टूल को निकालने में आसानी होती है। बीस, मटर और दाल आदि आपके गट हेल्‍थ को मजबूत करते हैं।

ये है दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहें

Monday, October 23 2017

ये है दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहें

देखने में आता है कि धरती की सबसे सुरक्षित जगहें ही सबसे ज्‍यादा रहस्‍मयी होती हैं। माना जाता है कि एरिया 51 और व्‍हाइट हाउस सबसे ज्‍यादा सुरक्षित है लेकिन ऐसा नहीं है। दुनियाभर में धरती पर ऐसी कई जगहें हैं जिन्‍हें सबसे ज्‍यादा सुरक्षित कहा जाता है। आइए जानते हैं धरती के सबसे सुरक्षित स्‍थानों के बारे में -:

चेयेन्‍ने माउंटेन कॉम्‍प्‍लेक्‍स, कोलोराडो, यूएसए

इस कॉम्‍प्‍लेक्‍स में कई सरकारी संस्‍थान हैं और पहले यहां पर यूएस-कैनेडियन ऐरोस्‍पेस प्रोटेक्‍शन प्रोजेक्‍ट का ऑफिस भी था। इस कॉप्‍लेक्‍स को सॉलिड ग्रेनाइट की 2,000 फीट की गहराई में बनाया गया है।

बोल्‍ड लेन कार पार्क, डर्बी, यूके

1970 में बने इस कार पार्क 1990 तक ड्रग्‍स और अपराध का गढ़ बन चुका था। लोकल सुरक्षा एजेंसियों ने बोल्‍ड लेन को आर्ट कार पार्क के रूप में तब्‍दील करने का निर्णय किया। यहां से बाहर और अंदर जाने के लिए बारकोडेड टिकट की जरूरत पड़ती है। कारों को मोशन सेंसर द्वारा मॉनिटर किया जाता है और सुरक्षा तोड़ने पर बैरियर लगा दिए जाते हैं।

ग्रेनाइट माउंटेन रिकॉर्डस वॉल्‍ट

इस चर्च का ऐतिहासिक महत्‍व बहुत ज्‍यादा है। उताह में स्थित ये चर्च ग्रेनाइट माउंटेन की हज़ारों फीट अंदर बना है। अंदर के वातावरण को कागजों और माइक्रो फिल्‍म को सुरक्षित रखने के लिए नियंत्रित रखा गया है।

टुमेन नदी

ये नदी चीन, दक्षिण कोरिय और रूस के बीच गेटअवे का काम करती है। कई बार दक्षिण कोरियाई नागरिक इस नदी को पार करते हुए चीन में घुसते हुए पकड़े गए हैं इसलिए इस नदी पर कड़ी सुरक्षा की गई है।

स्‍वैलबार्ड ग्‍लोबल सीड वॉल्‍ट, नॉर्वे

इस जगह पर बढ़ते भोजन के उद्देश्य के लिए बीज के अतिरिक्त नमूनों को सुरक्षित रखना है। मनुष्‍य को किसी बड़ी मुसीबत से बचाने के लिए इस जगह को बनाया गया है।

फेडरल रिज़र्व बैंक, न्‍यूयॉर्क

यूएस में 12 फेडरल रिज़र्व बैंक हैं जिनमें से कुछ बैंकों में बहुत ज्‍यादा सुरक्षा रखी गई है। न्‍यूयॉर्क के रिज़र्व वॉल्‍ट में रोबोट का इस्‍तेमाल किया जाता है और बाहरी सुरक्षा के लिए विेशेष रूप से कॉम्‍बैट को प्रशिक्षण दिया गया है।

वेटिकन सीक्रेट आर्चिव्‍स, इटली

इस जगह पर कैथोलिक चर्च के आधिकारिक दस्‍तावेज, बहीखाते और संपत्ति के कागज़ संग्रहित किए गए हैं। इस आर्चिव का संरक्षण पोप के पास होता है।

व्‍हाइट हाउस, यूएसए

अमेरिका के राष्‍ट्रपति का घर भी दुनिया में सबस ज्‍यादा सुरक्षित माना जाता है। इस प्रॉपर्टी के आसपास लोहे का घेरा लगा है और इसकी खिड़कियां बुलेट प्रूफ बनाई गईं हैं।

फोर्ट नॉक्‍स, यूएसए

ये जगह भी दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक है। हर समय फोर्ट नॉक्‍स की सुरक्षा में हथियारबंद सुरक्षाबल तैनात रहते हैं। निमंत्रण के बिना इसके अंदर प्रवेश करना बहुत मुश्किल है।

एरिया 51, नेवादा, यूएसए

नेवादा में स्थित एडवर्ड एयरफार्से की इस उप शाखा में प्रवेश करने के लिए मोशन ट्रिगर सेंसर्स, हथियारबंद सुरक्षाबल लगाए गए हैं। बाहरी लोगों का अंदर प्रवेश कर पाना नामुमकिन है।

वर्णव्यवस्था की शिकार साफसफाई

Wednesday, October 18 2017

वर्णव्यवस्था की शिकार साफसफाई

6 अगस्त, 2017, दिल्ली के लाजपत नगर में गटर की सफाई कर रहे 3 मजदूरों की जहरीली गैस के रिसाव के चलते मौत हो गई. यह पहली घटना नहीं है. इस से पहले दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी इलाके में सैप्टिक टैंक में मजदूरी करने उतरे 4 लोग भी मौत के मुंह में समा चुके हैं. इसी तरह 3 मई, 2017 को पटना, बिहार में सफाई करने के दौरान गटर में गिरने से 2 सफाईकर्मियों की मौत हो गई. स्वच्छ भारत अभियान के तहत नेता व अफसर हाथों में झाड़ू ले कर फोटो खिंचवा लेते हैं और इश्तिहारी ढोल बजा कर मीडिया में गाल भी बजा लेते हैं. लेकिन सचाई यह है कि साफसफाई के मामले में हम आज भी अमीर मुल्कों से कोसों पीछे हैं. सही व्यवस्था नहीं होने के कारण 1 सितंबर को दिल्ली के गाजीपुर में कचरे का पहाड़ का एक हिस्सा धंस जाने से 2 लोगों की मौत हो गई. ज्यादातर गांवों, कसबों व शहरों में आज भी गंदगी के ढेर दिखाई देते हैं.

वर्णव्यवस्था का जाल

हमारी धार्मिक, सामाजिक व्यवस्था ने हमें अपनी गंदगी, कूड़ाकरकट स्वयं साफ करने की सीख नहीं दी. हमें सिखाया गया है कि आप अपनी गंदगी वहीं छोड़ दें या बाहर फेंक दें. कोई दूसरा वर्ग है जो इसे उठाएगा. गंदगी उठाने वाले वर्ग को यह कार्य उस के पूर्वजन्म के कर्मों का फल बताया गया. गंदगी को उस की नियति करार दिया गया. इसलिए निचले वर्गों को बदबूदार गंदगी के ढेर में रहने की आदत है. वर्णव्यवस्था में शूद्रों यानी पिछड़ों का काम ऊपर के 3 वर्णों की सेवा करना, उन का बचा हुआ भोजन खाना और उतरा हुआ कपड़ा पहनना बताया गया. इस व्यवस्था की वजह से यह वर्ग भी गंदगी को त्याग नहीं पाया. वहीं इन चारों वर्णों से बाहर का एक पांचवां वर्ण था दलित. उसे गांव, शहर से बाहर रहने का आदेश दिया गया. उसी का काम गंदगी उठाना, साफसफाई करना और मरे हुए पशुओं को ठिकाने लगाना था. सदियों बाद भी यह वर्ग इस सब से उबर नहीं पाया है. आबादी का बड़ा हिस्सा पुलों के नीचे, सड़कों व नालों के किनारे, उड़ती धूल व कीचड़ के पास बनी झुग्गी बस्तियों में रहता है. गंदगी के कारण बहुत से लोग बीमारियों से भरी जिंदगी जीते हैं. ठेलेखोमचों पर चाटपकौड़ी व खानेपीने की दूसरी बहुत सी चीजें खुली हुई बिकती रहती हैं और लोग बड़े आराम से उन्हें खातेपीते रहते हैं. सिर्फ एअरपोर्ट, महानगरों की पौश कालोनियों, रईसों के बंगले, अमीरों के फार्महाउस व नेताओं की कोठियों आदि कुछ अपवादों को छोड़ कर देश के ज्यादातर इलाकों में गंदगी की भरमार है. नदी, नाले, गली, महल्ले, बसअड्डे, रेलवेस्टेशन, रेल की पटरियां, प्लेटफौर्म, सिनेमाघर, सड़कें, पार्क, सरकारी दफ्तर, स्कूल, अस्पताल आदि सार्वजनिक इमारतों में जहांतहां गंदगी पसरी रहना आम बात है. भारी गंदगी के कारण देश में तरक्की के बजाय पिछड़ापन, निकम्मापन व बदइंतजामी दिखती है. इस वजह से विदेशी सैलानी भारत के नाम पर नाकभौं सिकोड़ते हैं. वे हमारे देश में आने से हिचकते हैं. सो, हमारे रोजगार के मौके घटते हैं. गंदगी से बहुत सी बीमारियां फैलती हैं. इस के चलते इंसान की कम वक्त में बेहतर व ज्यादा काम करने की कूवत घटती है. परिणामस्वरूप, उस की आमदनी कम होती है.

हक से बेदखल

बहुत से लोग आज भी गंदे रहते हैं क्योंकि हमारे समाज में धर्म के ठेकेदारों ने अपनी चालबाजियों से जातिवाद के जहरीले बीज बोए. सारे अच्छे काम अपने हाथों में ले कर शूद्रों को सिर्फ सेवा करने का काम दिया. जानबूझ कर इन को हर तरह से कमजोर बनाया गया. धर्म की आड़ में चालें चली गईं कि सेवाटहल करने वाले माली व अन्य पिछड़े वर्ग सामाजिक तौर पर ऊपर न उठने पाएं. नियम बना कर उन्हें गंदा व गांवों से बाहर गंदी जगहों में जानवरों के साथ व जानवरों की तरह जीने, रहने पर मजबूर किया गया. दलितों व पिछड़ों को बुनियादी हकों से बेदखल रखा गया. इसी कारण ज्यादातर लोग आज भी गंदगी में ही रहने, खाने व जीने के आदी हैं. आबादी का बड़ा हिस्सा दलितों व पिछड़ों का है और उन्हें सदियों से गंदा रहने के लिए मजबूर किया जाता रहा है. जहांतहां पसरी भयंकर गंदगी की असली वजह यही है. इस में सब से बड़ी व खास बात यह है कि निचले तबके के लोग अपनी मरजी से नहीं, बल्कि उन पर जबरदस्ती थोपे गए सामाजिक नियमों के कारण गंदगी में रहते हैं. सब से बड़ी खोट तो अगड़ों की उस गंदी व पुराणवादी हिंदू पाखंडी सोच में है जिस में वे खुद को सब से आगे व ऊपर रखने के लिए दूसरों, खासकर कमजोरों, को जबरदस्ती धकेल कर नीचे व पीछे रखा जाता है. बेशक, आगे बढ़ना अच्छा है लेकिन यह हक सभी का है. सिर्फ अपनी बढ़त के लिए दूसरों को उन के अधिकारों से बेदखल करना सरासर गलत तथा समाज, संविधान व इंसानियत के खिलाफ है. इसलिए सफाई के लिए दिमाग के जाले साफ करने भी जरूरी हैं.

ऊंची जातियों की साजिश

मुट्ठीभर ऊंची जातियों वाले अमीर दबंग वर्णव्यवस्था के नाम पर अपनी दबंगई, अमीरी व बाहुबल पर सदियों से दलितों व पिछड़ों पर राज करते रहे हैं. अपने हक में तरहतरह के नियम बना कर निचले तबकों को नीचे व पीछे रखने की साजिशें रचते रहे हैं. उन्हें कुओं पर चढ़ने, मंदिरों में घुसने व बरात निकालने व मरने पर आम रास्ते से लाश ले जाने तक से वंचित किया गया. पिछले दिनों बिहार में दलितों को अपने संबंधी की लाश को तालाब से हो कर ले जाना पड़ा था. मंदिर कोई पैसा कमा कर नहीं देते पर उन में घुसने न देना दलितों में हीनभावना भर देता है. पंडेपुजारियों की मदद से अगड़ों द्वारा दलितों व पिछड़ों के खिलाफ बनाए गए सामाजिक नियमों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. पुनर्जन्म और पिछले जन्म के कर्मों का फल बताने के साथ नीच व मलेच्छ बता कर उन के नहानेधोने, नल से पानी लेने, साफसुथरे रहने, अच्छे कपड़े पहनने, पक्के घर बनाने व पढ़नेलिखने तक पर पाबंदियां लगाई गईं. गंदगी में रह कर जानवरों से बदतर जिंदगी जीने पर उन्हें मजबूर किया गया ताकि वे ऊपर उठ कर या उभर कर किसी भी तरह मजबूत न होने पाएं. धर्मग्रंथों में अगड़ों के कुल वंश में जन्म लेने को पुण्य का परिणाम व दलितों को पाप की पैदाइश बताया गया है. हालांकि हमारे संविधान में सभी को बराबरी का दरजा हासिल है लेकिन दलित व पिछड़े आज भी गंदगी में रहते हैं क्योंकि वे अगड़े, अमीरों व दबंगों के रहमोकरम पर जीते हैं. आज कुछ को मंदिरों में जाने दिया जा रहा है लेकिन उन्हें दूसरे दरजे के देवीदेवता दिए गए हैं. साफसुथरे रह कर कहीं वे सामने आ कर मुकाबला करने लायक न हो जाएं, इस डर से अगड़ों ने दलितों व पिछड़ों को सदियों तक किसी भी तरह उबरने नहीं दिया. उन का खुद पर से यकीन तोड़ने के लिए ही उन्हें उतरन व जूठन की सौगातें बख्शिश में दी जाती हैं. इतना ही नहीं, ऊपर से उन्हीं के सामने जले पर नमक बुरकते हुए यह भी कहा जाता है कि ये तो गंदगी में रहने के ही आदी हैं.

दोषी कौन?

आम आदमी की जिंदगी में जो कुछ भरा गया, जहां जैसे खराब माहौल में उन्हें रखा गया, सामाजिक नियमों के चलते जो गंदे हालात उन्होंने देखे, उसी के मुताबिक वे आज भी गंदगी में जीते, खाते व रहते हैं. इस में दोष उन का नहीं है. असल दोषी तो वे हैं जिन्होंने अपने मतलब की वजह से समाज में उन्हें गंदा बनाए रखने के नियम बनाए. उन्हें साफसफाई की अहमियत नहीं जानने दी. साफसुथरा नहीं रहने दिया. सो, जागरूक हो कर इन चालबाजियों को समझना बेहद जरूरी है ताकि जिंदगी दुखों की गठरी न साबित हो. ज्यादातर अगड़े, अमीर खुद साफसफाई जैसे किसी भी काम को हाथ नहीं लगाते. दरअसल, उन की नजर में काम करना तो सिर्फ दलितों व पिछड़ों का फर्ज व जिम्मेदारी है. अमीर मुल्कों में नेता, अफसर व अमीर सब खुद अपनी मेज आदि साफ करने में जरा भी नहीं हिचकते, जबकि यहां इसे हिमाकत समझा जाता है. हर काम के लिए दलितों का सहारा लिया जाता है. इसलिए हमारे देश में गंदगी की समस्या भयंकर होती जा रही है. समाज में आज भी ऐसे घमंडी सिरफिरों की कमी नहीं है जो जाति के आधार पर ऊंचनीच का फर्क करते हैं, कमजोरों के साथ भेदभाव करते हैं. उन्हें दलितों व पिछड़ों की खुशहाली खटकती है. दलितों, पिछड़ों के पास वाहन व पक्के घर होना, उन का साफसुथरे रहना भी अगड़ों को जरा नहीं सुहाता. सो, वे उन्हें पीछे और नीचे रखने की सारी कोशिशें करते हैं.

बदलें हालात

अपवाद के तौर पर पुरानी लीक, अंधविश्वास, गरीबी व दबंगों के चंगुल से दूर रहने वाले कुछ दलित व पिछड़े पढ़लिख कर आगे निकले और वे शहरों में बस गए. लेकिन ज्यादातर आज भी गंदगी व गरीबी के शिकार हैं. उन की दुनिया आज भी जस की तस है. वे आज भी घासफूंस व खपरैल की छत वाली कच्ची झोंपडि़यों में अपने जानवरों के साथ रहते हैं. जरूरत उन की जिंदगी में सुखद बदलाव लाने की, उन्हें हिम्मत व हौसला देने की है. साफसुथरा रहना महंगा, मुश्किल या नामुमकिन नहीं है. कम खर्च में भी साफसुथरा रहा जा सकता है, अपने आसपास का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है. उत्तराखंड के पंतनगर के पास एक गांव है नंगला. वहां बंगालियों के बहुत से परिवार रहते हैं. उन में से बहुतों की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है, लेकिन उन के घरों के अंदरबाहर साफसफाई व सजावट देखते ही बनती है. इसलिए आज जरूरत गंदगी से उबर कर ऐसी ही मिसाल कायम करने की है. हर इलाके में रहने वालों को अब खुद तय करना होगा कि कूड़ा, मलबा आदि इधरउधर बिलकुल नहीं फैलाना है. कचरे का निबटारा हमेशा ठीक तरीके से करना है. नालेनालियों में गोबर व पौलिथीन आदि नहीं फेंकने हैं. साफसफाई के लिए सरकारी कर्मचारियों का इंतजार किए बिना खुद अपने हाथपैरों को भी हिलाना है. यह नजरिया बदलना होगा कि सफाई करना दलितों, पिछड़ों व सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी है. यह भी जरूरी है कि उन्हें गंदगी में रहने को मजबूर न किया जाए. उन्हें भी साफसुथरा रहने का हक है. इसलिए पहले दिमाग में बसी ऊंचनीच व गैरबराबरी की गंदगी दूर करें, तभी समाज में बाहरी गंदगी दूर होगी. वरना गंदगी रुकने वाली नहीं है. और ऐसे में स्वच्छता अभियान भी सिर्फ एक ढकोसला बन कर रह जाएगा.

सामूहिक सैलिब्रेशन से खिल उठे मन | Grihshobha

Wednesday, October 18 2017

सामूहिक सैलिब्रेशन से खिल उठे मन | Grihshobha

रोशनी का त्योहार दीवाली हो या कोई और उत्सव, जब तक 10-20 लोग मिल कर धूम न मचाएं आनंद नहीं आता. सैलिब्रेशन का मतलब ही मिल कर खुशियां मनाना और मस्ती करना होता है. पर मस्ती के लिए मस्तों की टोली भी तो जरूरी है. आज बच्चे पढ़ाई और नौकरी के लिए घरों से दूर रहते हैं. बड़ेबड़े घरों में अकेले बुजुर्ग साल भर इसी मौके का इंतजार करते हैं जब बच्चे घर आएं और घर फिर से रोशन हो उठे. बच्चों से ही नहीं नातेरिश्तेदारों और मित्रों से मिलने और एकसाथ आनंद उठाने का भी यही समय होता है.

सामूहिक सैलिब्रेशन बनाएं शानदार

पड़ोसियों के साथ सैलिब्रेशन: इस त्योहार आप अपने सभी पड़ोसियों को साथ त्योहार मनाने के लिए आमंत्रित करें. अपनी सोसाइटी या महल्ले के पार्क अथवा खेल के मैदान में पार्टी का आयोजन करें. मिठाई, आतिशबाजी और लाइटिंग का सारा खर्च मिल कर उठाएं. जब महल्ले के सारे बच्चे मिल कर आतिशबाजी का आनंद लेंगे तो नजारा देखतेही बनेगा. इसी तरह आप एक शहर में रहने वाले अपने सभी रिश्तेदारों और मित्रों को भी सामूहिक सैलिब्रेशन के लिए आमंत्रित कर सकते हैं. डांस पार्टी: भारतीय वैसे भी डांस और म्यूजिक के शौकीन होते हैं तो क्यों न प्रकाशोत्सव के मौके को और भी मस्ती व उल्लास भरा बनाने के लिए मिल कर म्यूजिक डांस और पार्टी का आयोजन किया जाए. पूरे परिवार के साथसाथ पड़ोसियों को भी इस में शरीक करें ताकि यह उत्सव यादगार बन जाए. बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों के चाहें तो अलगअलग ग्रुप बना सकते हैं ताकि उन के मिजाज के अनुसार संगीत का इंतजाम हो सके. बुजुर्गों के लिए पुराने फिल्मी गाने तो युवाओं के लिए आज का तड़कताभड़कता बौलीवुड डांस नंबर्स, अंत्याक्षरी और डांस कंपीटिशन का भी आयोजन कर सकते हैं.

स्वीट ईटिंग कंपीटिशन

प्रकाशोत्सव सैलिब्रेट करने का एक और बेहतर तरीका है कि तरहतरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं. मसलन, स्वादिष्ठ मिठाईयां बनाने की प्रतियोगिता, कम समय में ज्यादा मिठाई खाने की प्रतियोगिता, खूबसूरत रंगोली बनाने की प्रतियोगिता आदि. आप चाहें तो जीतने वाले को इनाम भी दे सकते हैं. इतना ही नहीं, कौन जीतेगा यह शर्त लगा कर गिफ्ट की भी मांग कर सकते हैं.

वन डे ट्रिप

आप त्योहार का आनंद अपने मनपसंद शहर के खास टूरिस्ट स्थल पर जा कर भी ले सकते हैं. सभी रिश्तेदार पहले से बुक किए गए गैस्ट हाउस या रिजौर्ट में पहुंच कर अलग अंदाज में त्योहार मनाएं और आनंद उठाएं. त्योहार मनाने का यह अंदाज आप के बच्चों को खासतौर पर पसंद आएगा.

तनहा लोगों की जिंदगी करें रोशन

आप चाहें तो त्योहार की शाम वृद्घाश्रम या अनाथालय जैसी जगहों पर भी बिता सकते हैं और अकेले रह रहे बुजुर्गों या अनाथ बच्चों की जिंदगी रोशन कर सकते हैं. पटाखे, मिठाई और कैंडल्स ले कर जब आप उन के बीच जाएंगे और उन के साथ मस्ती करेंगे तो सोचिए उन के साथसाथ आप को भी कितना आनंद मिलेगा. जरा याद कीजिए ‘एक विलेन’ फिल्म में श्रद्घा कपूर के किरदार को या फिर ‘किस्मत कनैक्शन’ फिल्म में विद्या बालन का किरदार. ऐसे किरदारों से आप अपनी जिंदगी में ऐसा ही कुछ करने की प्रेरणा ले सकते हैं. इनसान सामाजिक प्राणी है. अत: सब के साथ सुखदुख मना कर ही उसे असली आनंद मिल सकता है.

सामूहिक सैलिब्रेशन के सकारात्मक पक्ष

खुशियों का मजा दोगुना: जब आप अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के साथ सामूहिक रूप से त्योहार मनाते हैं तो उस की खुशी अलग ही होती है. घर की सजावट और व्हाइटवाशिंग से ले कर रंगोली तैयार करना, मिठाई बनाना, शौपिंग करना सब कुछ बहुत आसान और मजेदार हो जाता है. हर काम में सब मिल कर सहयोग करते हैं. मस्ती करतेकरते काम कब निबट जाता है, पता ही नहीं चलता. वैसे भी घर में कोई सदस्य किसी काम में माहिर होता है तो कोई किसी काम में. मिल कर मस्ती करते हुए जो तैयारी होती है वह देखने लायक होती है. मानसिक रूप से स्वस्थ त्योहारों के दौरान मिल कर खुशियां मनाने का अंदाज हमारे मन में सिर्फ उत्साह ही नहीं जगाता वरन हमें मानसिक तनाव से भी राहत देता है. यूनिवर्सिटी औफ दिल्ली की साइकोलौजी की असिस्टैंट प्रोफैसर, डा. कोमल चंदीरमानी कहती हैं कि त्योहारों के समय बड़ों का आशीर्वाद और अपनों का साथ हमें ऊर्जा, सकारात्मक भावना और खुशियों से भर देता है. समूह में त्योहार मनाना हमारे मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. इस से हमारा सोशल नैटवर्क और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ती है, जीवन को आनंद के साथ जीने की प्रेरणा मिलती है. हाल ही में अमेरिका में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों का समाजिक जीवन जितना सक्रिय होता है उन के मानसिक रोगों की चपेट में आने की आशंका उतनी ही कम होती है.

शोध के अनुसार,

15 मिनट तक किया गया सामूहिक हंसीमजाक दर्द को बरदाश्त करने की क्षमता को 10% तक बढ़ा देता है. अपने होने का एहसास: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अकसर हमें अपने होने का एहसास ही नहीं रह जाता. सुबह से शाम तक काम ही काम. मिल कर त्योहार मनाने के दौरान हमें पता चलता है कि हम कितने रिश्तेनातों में बंधे हैं. हम से कितनों की खुशियां जुड़ी हैं. तोहफों के आदानप्रदान और मौजमस्ती के बीच हमें रिश्तों की निकटता का एहसास होता है. हमें महसूस होता है कि हम कितनों के लिए जरूरी हैं. हमें जिंदगी जीने के माने मिलते हैं. हम स्वयं को पहचान पाते हैं. जीवन की छोटीछोटी खुशियां भी हमारे अंदर के इनसान को जिंदा रखती हैं और उसे नए ढंग से जीना सिखाती हैं. बच्चों में शेयरिंग की आदत: आप के बच्चे जब मिल कर त्योहार मनाते हैं तो उन में मिल कर रहने, खानेपीने और एकदूसरे की परवाह करने की आदत पनपती है. वे बेहतर नागरिक बनते हैं. बच्चे दूसरों के दुखसुख में भागीदार बनना सीखते हैं. उन में नेतृत्व की क्षमता पैदा होती है. घर के बड़ेबुजुर्गों को त्योहार पर इकट्ठा हुए लोगों को अच्छी बातें व संस्कार सिखाने और त्योहार से जुड़ी परंपराओं और आदर्शों से रूबरू कराने का मौका मिलता है.

गिलेशिकवे दूर करने का मौका

उत्सव ही एक ऐसा समय होता है जब अपने गिलेशिकवों को भूल कर फिर से दोस्ती की शुरुआत कर सकता है. त्योहार के नाम पर गले लगा कर दुश्मन को भी दोस्त बनाया जा सकता है. सामने वाले को कोई तोहफा दे कर या फिर मिठाई खिला कर आप अपनी जिंदगी में उस की अहमियत दर्शा सकते हैं. सामूहिक सैलिब्रशन के नाम पर उसे अपने घर बुला कर रिश्तों के टूटे तार फिर से जोड़ सकते हैं.

कम खर्च में ज्यादा मस्ती

जब आप मिल कर त्योहार मनाते हैं, तो आप के पास विकल्प ज्यादा होते हैं. आनंद व मस्ती के अवसर भी अधिक मिलते हैं. इनसान सब के साथ जितनी मस्ती कर सकता है उतनी वह अकेला कभी नहीं कर सकता. एकल परिवारों के इस दौर में जब परिवार में 3-4 से ज्यादा सदस्य नहीं होते, उन्हें वह आनंद मिल ही नहीं पाता जो संयुक्त परिवारों के दौर में मिलता था. सामूहिक सैलिब्रेशन में मस्ती और आनंद ज्यादा व खर्च कम का फंडा काम करता है. आप इस लेख को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं

हेल्दी समझी जाने वाली इन 10 चीजों को बार बार खाना हो सकता है नुकसानदायक

Monday, October 30 2017

हेल्दी समझी जाने वाली इन 10 चीजों को बार बार खाना हो सकता है नुकसानदायक

अक्सर हम लोगों को लगता है कि हेल्दी खाद्य पदार्थ हमेशा ही हमारे स्वास्थय के लिए अच्छे होते हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है क्योंकि कभी कभी जिन चीजों को हम समझते हैं कि ये हेल्दी हैं दरअसल वो ज्यादा खाने से खतरनाक भी हो जाते हैं। बाज़ार में ऐसी बहुत सी चीजें मिलती हैं जिनके लेबल पर लिख होता है कि यह शुगर फ्री है या नेचुरल है या फिर ऑर्गेनिक है, लेकिन ये लिखे होने का ये मतलब नहीं कि वो सारे ही प्रोडक्ट अच्छे और हेल्दी ही हों। सेहत को फिट रखने के लिए खाएं 15 फैटी एसिड फूड्स इन चीजों का ज्यादा मात्रा में खा लेना हमारे स्वास्थय के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए इस चीज को और अधिक आसान बनाने के लिए हम यहां कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें ज्यादा खाने से दिक्कत हो सकती है।

1. स्मोक्ड सालमन:

जब आप इसका सेवन करते हैं तो आपके शरीर में पालीसाइक्लिक ऐरोमेटिक हाइड्रोकार्बन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे आपको हमेशा के लिए कैंसर भी हो सकता है। इसलिए आप इसे पहले भून लें और फिर खाएं।

2. कोम्बुचा:

यह एक तरह का मंचूरियन मशरूम होता है जोकि एसिडिक प्रवृत्ति का होता है जिसको खाने से हार्टबर्न की समस्या हो सकती है। इसके अलावा यह आपके दांतों के लिए भी नुकसानदायक होता है क्योंकि इसको खाने की वजह से आपके दांतों में कैविटी हो सकती है।

3. टूना मछली :

यह एक प्रकार की मछली होती है जिसे स्वास्थ्यवर्धक फ़ूड माना जाता है, लेकिन इसके शरीर में बहुत ज्यादा मरकरी होता है इसलिए इसे रोज नहीं खाना चाहिए। इसके ज्यादा इस्तेमाल से आपके आँखों की रोशनी भी जा सकती है और आपकी मांसपेशियाँ भी कमजोर हो सकती हैं।

4. नारियल तेल:

नारियल तेल एक सेचुरेटेड फैट होता है जिसमें मीडियम चेन ट्राईग्लिसराइड पाया जाता है जो कोलेस्ट्राल लेवल को कम करता है। एक चम्मच नारियल तेल में 121 कैलोरी होती है लेकिन आप इसे रोजाना इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

5. केन वाला सूप:

बाजार में केन में मिलने वाले सूप में बहुत ज्यादा सोडियम होता है जो आपके शरीर की आवश्यकता से कहीं ज्यादा होता है क्योंकि आपके शरीर को एक दिन में सिर्फ 2300 मिलीग्राम सोडियम की ही जरुरत होती है। अगर आप बिना सूप के नहीं रह सकते है तो कम सोडियम वाला सूप इस्तेमाल करें। लेकिन आप इसका रोजाना इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

6. भुना हुआ मांस:

अगर आप बीफ, मछली या मुर्गे के मांस को ज्यादा तापमान पर पकाकर खाते हैं तो इसमें हेट्रोसाइक्लिक ऐमिन्स होने की वजह से आपको कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

7. फ्रूट जूस:

कभी कभी बाज़ार में मिलने वाला फ्रूट जूस भी सोडा की ही तरह आपके लिए खराब हो सकता है क्योंकि इसमें 45.5 ग्राम फ्रक्टोज होता है जबकि सोडा में 50 ग्राम फ्रक्टोज होता है जोकि फ्रूट जूस के लगभग बराबर है और आपके लिए हानिकारक भी।

8. नकली मक्खन:

इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में ट्रांस फैट पाया जाता है और अगर आप इसका इस्तेमाल करते हैं तो आपको डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

9. वेजिटेबल ऑयल:

वेजिटेबल ऑयल स्वास्थय के लिए बहुत अच्छा होता है लेकिन अगर आप इसका इस्तेमाल ज्यादा करेंगे तो आपको कई सारी दिक्कतें हो सकती हैं।

10. विदेशी कॉफ़ी:

अक्सर आप लोग रेस्तरां में ऐसी ही कॉफ़ी आर्डर करते हैं लेकिन आप शायद यह नहीं जानते है कि इसमें बहुत अधिक मात्रा में शुगर होता है जो आपके लिवर को डैमेज कर सकता है। इसलिए आपको हमारी सलाह है कि आप कोई भी ऐसी चीज जो भले ही हेल्दी क्यों ना हो, उसे ज्यादा मात्रा में ना खाएं ताकि आप ढेर सारी होने वाली बीमारियों से बच सकें।

चिनी रोगीले कसरी खाना खाने

Tuesday, October 31 2017

चिनी रोगीले कसरी खाना खाने

शरीरको रगतमा चिनीको मात्रा चाहिने भन्दा धेरै भयो भने त्यो रोगलाई मधुमेह रोग भनिन्छ । यो रोग एकपटक लागेपछि पुरा निको हुँदैन तर लगभग ५० प्रतिशत नयाँ मधुमेहका केसहरु खानाबाटै नियन्त्रण गर्न सकिन्छ र ५० प्रतिशत रोगीलाई औषधि या ईन्सुलिनको आवश्यकता पर्दछ । मधुमेहका रोगीले खानपानको साथसाथै शारीरिक व्यायमलाई पनि संगसंगै नियमितता दिनुपर्छ जसले रगतमा चिनीको मात्रा सन्तुलन राख्न सहयोग पुर्‍याउँछ । मधुमेहका रोगीलाई कति आहार चाहिन्छ भन्ने कुरा रोगीको उमेर, शरिरको तौल, कार्य, पेशा, लिङ्ग, वर्ण आदिको आधारमा निर्धारण गरिन्छ । कार्बोहाईड्रेट : ५० प्रतिशत २५० ग्राम (१००० क्यालोरी) प्रोटिन : २० प्रतिशत १०० ग्राम (४०० क्यालोरी) बोसो : ३० प्रतिशत ६७ ग्राम (६०० क्यालोरी) मधुमेहका रोगीहरुले खानपान कसरी गर्ने ? मधुमेहका रोगीहरुले हरेक दिन सन्तुलित मात्रामा ३ पटक खाना र ३ पटक खाजा खानुपर्छ । बिहानको नास्ता (६-७ बजे) बिहानको खाना (९-१० बजे) दिउँसोको नास्ता (१-२ बजे) साँझको नास्ता (५-६ बजे) रातिको खाना (८ बजे) सुत्ने बेला (१०-११ बजे) बिहानको खाजा (६-७ बजे) १ गिलास दुध वा १ कप चिया/कफी (चिनी नहालेको वा बढीमा सानो चम्चाको १ चम्चा कर्नफ्लेक्स वा पोरीज (१ कचौरा) वा गहूँको रोटि (१-२ वटा) वा बिस्कुट (३-४ वटा) वा पाउरोटि (२ पिस) बिहानको खाना (९-१० बजे) गहुँको रोटी (२-३ वटा) वा १ कचौरा भात (नफलेको चामलको) वा ढिँडो (मक/कोदो/फापरको १ कचौरा) बाक्लो दाल सागसब्जी/तरकारी/भटमास/सिमी अचार थोरै मात्रामा मासु÷माछा (यसरी खाँदा अन्नको मात्रा भन्दा दाल र सागसव्जीको मात्रा धेरै हुनुपर्छ ।) दिउँसोको नास्ता (१-२ बजे) चिया/कफी १ कप (कालो उपयुक्त) १ दाना फलफूल (सुन्तला/केरा/मेवा/स्यउ/अम्बा वा मौसमअनुसारको फल वा १ गिलास ताजा फलफूलको रस) गहुँको रोटी (१ वटा) वा १ मुठ्ठी चिउरा साँझको नास्ता (५-६ बजे) पातलो मोहि (१ गीलास) चाउचाउ (सानो कचौराको १ कचौरा) वा पाउरोटि (१/२ पिस) वा नुनिलो बिस्कुट (३,४ वटा) रातिको खाना (८ बजे) बिहानको खाना जस्तै सुत्ने बेला (१०-११ बजे) गाई भैँसीको दुध आधा कप तर काटेको २ वटा बिस्कुटसंग मधुमेहका रोगीहरुले खानपानमा ध्यान दिनुपर्ने कुराहरु : सबै प्रकारका फलफूल र तरकारी हरेक दिन मात्रा मिलाएर खानुपर्छ । खना पकाउँदा घ्यूको सट्टामा तोरीको तेल अथवा वनस्पति वा जैतुनको तेल राम्रो हुन्छ । दिनमा कम्तिमा ३ लिटर पानी पिउनुपर्छ । माछा हप्तामा २ पटक खानुपर्छ यसरी खाँदा कम तेल राखेर सुप बनाएर खाएको राम्रो । बोसो, छाला र चिल्लो कुराहरु धेरै खानु हुँदैन । नुनको मात्रा पनि कम गनुपर्छ । प्रत्यक्ष चिनी भएका चिजहरु जस्तै चिनी, मिठाई, कोका कोला, पेय पदार्थ , मह खानु हुदैन । खानामा रेसादार खानेकुरा समावेश गर्नुपर्छ । बजारमा पाईने विभिन्न किसिकमका प्याकेटका जुसहरुमा चिनिको मात्रा बढि हुने भएकाले त्यस्ता जुसको सट्टामा ताजा फल किनेर खानु राम्रो हुन्छ । सुर्तिजन्य र खैनिजन्य पदार्थ सेवन गर्नुहुँदैन । मादकपदार्थ सकेसम्म सेवन नगरेकै राम्रो मानिन्छ तर कसैलाई सेवन गर्नुपरेमा दिनभरमा महिलाले बढिमा २ यूनिट (२५-३० एमएल) र पुरुषले बढिमा ४ यूनिट (५०-६० एमएल) खान सकिन्छ । चिनी रोग सम्बन्धी भ्रम हाम्रो जनमानसमा मधुमेहरोग लागेको बिरामीले भात वा आलु खानु हुँदैन भन्ने भ्रम छ जुन सत्य होइन । खासमा भात, जरा भएको तरकारी र अरु अन्नहरुले रगतमा चिनिको मात्रा सन्तुलन राख्छ । त्यसकारण हरेक खाजा वा खाना मात्रा मिलाएर खानुपर्छ । चिनीरोग प्यानक्रियाजमा इन्सुलिन कम वनेमा वा बनिसकेको इन्सुलिनले कुनै कारणवस काम नगरेमा हुन्छ । यो रोग भनेको पुख्र्याैली रोग पनि हो । त्यसैले धेरै गुलियो पदार्थ वा भात खानाले चिनी रोग लाग्ने कुरामा सत्यता छैन तर चिनि रोग लागेपछि चिनि भएको खाना र गुलियो पदार्थ थोरै मात्रामा या चिकित्सको सल्लाह अनुसार खानुपर्छ या बन्द गर्नुपर्छ ।-कान्तिपुरबाट Share this:

टी20 क्रिकेट ने इस खेल में मैदान पर इस कदर रोमांच ला दिया है

Tuesday, October 31 2017

टी20 क्रिकेट ने इस खेल में मैदान पर इस कदर रोमांच ला दिया है

टी20 क्रिकेट ने इस खेल में मैदान पर इस कदर रोमांच ला दिया है Posted at: Oct 31 , 2017 by Dilersamachar 51 Share On: दिलेर समाचार, टी20 क्रिकेट ने इस खेल में मैदान पर इस कदर रोमांच ला दिया है कि दर्शक मैदान में मुकाबले को देखने के लिए खिंचे चले आते हैं. 20-20 ओवर के क्रिकेट में उन्‍हें रनों की जबर्दस्‍त बारिश देखने को मिलती है. इससे बेहतर उन्‍हें और क्‍या चाहिए. विश्‍व में कई खिलाड़ी इस क्रिकेट के विशेषज्ञ बनकर उभरे हैं. वे ताबड़तोड़ बल्‍लेबाजी करते हुए रनों का अंबार लगाने के लिए जाने जाते हैं. इस फॉर्मेट के क्रिकेट में 200 या इससे अधिक का स्‍कोर बनना अब आम बात बनता जा रहा है. वह दिन भी दूर नहीं जब इस तरह के क्रिकेट में फैंस को 275 या 300 रन के आसपास का स्‍कोर भी देखने को मिले. दूसरे शब्‍दों में कहें तो टी20 क्रिकेट ने इस खेल की परिभाषा को बदलकर रख दिया है. इस फॉर्मेट की क्रिकेट का असर अब वनडे और टेस्‍ट क्रिकेट में भी देखने को मिल रहा है. इन दोनों फॉर्मेट में भी अब तेजी से रन बनने लगे हैं. भारतीय टीम न्‍यूजीलैंड के खिलाफ तीन टी20 मैचों की सीरीज खेलने जा रही है. टी20 क्रिकेट से जुड़ी आपकी जानकारी कितनी है, इन सवालों के जवाब देकर आप जान सकते हैं... उम्मीद है, आपको यह क्विज़ पसंद आई होगी, और इसमें आपको कुछ न कुछ नया जानने को मिला होगा... इसी तरह की ढेरों अन्य क्विज़ हम आपके लिए लाते रहेंगे, सो, लगातार इन पृष्ठों पर नज़र टिकाए रखिए, और देश-दुनिया, मनोरंजन और खेल जगत के बारे में अपनी जानकारी बढ़ाते रहिए...

कुपोषित बालकलाई पोर्चुगलबाट सहयोग

Tuesday, October 31 2017

कुपोषित बालकलाई पोर्चुगलबाट सहयोग

प्रकाशित मिति :2017-10-31 04:40:33 रोल्पाका कुपोषित एकै परिवारका दुई बालकलाई पोर्चुगलमा रहेका नेपालीको एक संस्थाले पोषणका लागि आर्थिक सहयोग गरेको छ । पोर्चुगल बस्ने नेपालीहरुको संस्था हिमालयन एशोसिएसन कल्चरल नेपालले रोल्पा नगरपालिका वडा नं ४ बस्ने श्यामलाल सुनारका दुई छोराको पोषण सहयोगका लागि सो सहयोग हस्तान्तरण गरेको हो । गत वैशाखमा भएको पोषण सप्ताहकै बेला राष्ट्रिय समाचार समितिबाट संप्रेषण गरिएको कुपोषणबाट पीडित बालकको समाचार विभिन्न अनलाइन तथा पत्रपत्रिकामा प्रकाशन भएको थियो । अनलाइन र अन्य पत्रपत्रिकामा आएको समाचारका आधारमा पोर्चुगलमा रहेका नेपालीले ती बालकलाई सहयोग गर्ने निर्णय गरेको हिमालय एशोसिएसन कल्चरल नेपालका अध्यक्ष रमेशराज बाँस्तोलाले जानकारी दिनुभयो । पोर्चुगलका नागरिक र पोर्चुगलमा बस्ने नेपालीबाट पहिलो चरणमा ५०० युरो जम्मा भएकाले पीडित परिवारको घरको स्थलगत अवलोकन गरी सहयोग हस्तान्तरण गरिएको बाँस्तोलाले बताउनुभयो । रोल्पा नगरपालिकाका प्रमुख पूर्ण केसी र रोल्पा नगरपालिका वडा नं ४ का वडा सदस्य दिलमाया विकलाई सो सहयोग रकम संयुक्तरुपमा हस्तान्तरण गरिएको थियो । हाल पोषण सुधारका लागि दिएको सहयोग राशि रु ६१ हजार ५० रहेको छ । बालकको पोषण सुधारका लागि हरेक महिना रु पाँच हजारका दरले सो रकम खर्च गरिने बताइएको छ । पहिलो चरणमा उपलब्ध गराइएको सो रकम सदुपयोग गरे दोस्रो चरणमा थप सहयोग गरिने हिमालयन एशोसिएसन कल्चरल नेपालका अध्यक्ष बाँस्तोलाले जानकारी दिनुभयो । रोल्पा सदरमुकाम लिवाङका श्यामलाल विकका दुई वर्षे छोरा विवेक विक र तीन वर्षे छोरा विकास विक कुपोषित भएको लामो समय भइसकेको छ । बाबु श्यामलाल विक मजदुरी गर्न बिहानै बजारतिर जान्छन् । बाबु मजदुरीबाट नफर्कुञ्जेल बन्द कोठामा एकोहोरिएर सुतिरहन्छन् । ओछ्यानमै दिसापिसाब गर्छन् । भोक प्यास लागे पनि उनलाई खान दिने न कोही हुन्छ, न त खाने कुरा नै । चालीस वर्ष उमेर पुगिसकेका श्यामलालले चार वर्षअघि मिझिङ रोल्पाकी अप्सरा कामीसँग विवाह गरेका थिए । सुनार दम्पतीबाट दुई छोरा विवेक र विकासको जन्म भएको हो । वर्षौंटे दुई छोरा जन्माए पनि आर्थिक समस्याका कारण उनीहरुले राम्रोसँग स्याहार गर्न सकेनन् । जसका कारण दुवै छोरालाई कुपोषण भयो । विभिन्न निकायको सहयोगमा कुपोषित छोराहरुलाई शिशु स्याहार केन्द्र दाङमा भर्ना गरिएको थियो । पोषण पुर्नस्थापना केन्द्रमा दुई महिना बसेका उनीहरुको स्वास्थ्यमा केही सुधार आएपछि दुई छोरासहित श्यामलाल घर फिर्ता भएका थिए । छोराहरु घरमा ल्याउँदा श्रीमती भने घरमा थिइनन् । श्रीमतीको बारेमा लामो समयसम्म खोजी गरे । कसैले काठमाडौँ इँटाभट्टा गएको भनिदिए भने कसैले पोइल गई भने तर म भने छोराको मायाले एक दिन पक्कै आउली भनेर बाटो हेरिरहँे, तर नौ महिना बितिसक्दासमेत श्रीमतीको अत्तोपत्तो नभएको विकले दुखेसो पोखे । छोरालाई स्याहार गर्ने कि ज्याला मजदुरी गरेर खाने । घरमा कोही छैनन् । काममा जाँदा छोराको स्याहार गर्ने मान्छे हुँदैन । छोराको स्याहार गर्न घरमा बस्दा भोकभोकै बस्नु पर्छ, सुनारले गम्भीर हुँदै भने । हिमालय कल्चरल एशोसिएसन पोर्चुगलले पछिल्लोपटक गरेको सहयोगले छोराको स्वास्थ्य सुधार हुनेमा आफू आशावादी रहेको विकले बताए । कान्छो छोराको स्वास्थ्य अवस्था निकै कमजोर रहेकाले उपचारमा समेत सहयोग गर्न दाताहरुसँग आग्रह गरेका छन् । हस्तान्तरित सहयोग बुझ्दै रोल्पा नगरपालिकाका प्रमुख पूर्ण केसीले गरिब विपन्न परिवारमा अझै पनि कुपोषण मुख्य समस्याका रुपमा देखिएको बताउनुभयो । खाद्य असुरक्षाका कारण कुपोषण बढिरहेको औँल्याउँदै स्थानीय सरकारले दलित बालबालिकालाई उपलब्ध गराउँदै आएको पोषण भत्ता सदुपयोग हुनसके धेरै समस्या हल हुने विचार व्यक्त गर्नुभयो । जिल्लाका सञ्चार माध्यमले सदरमुकाममै रहेका दलित बालबालिकामा देखिएको कुपोषणलाई समाचार बनाएकाले सहयोग सम्भव भएको पत्रकार तथा मानव अधिकारकर्मी खेम बुढाले बताउनुभयो । रासस Share this: