Thunderstorm Today : spectacular solar storm in coming 48 hrs mobile cable network might stop working | अगले 48 घंटे में सूरज फेंकेगा गर्म तूफान, सारे सिग्नल हो सकते हैं बंद - Navbharat Times Hindi Newspaper

नई दिल्ली
अगले 48 घंटे में पृथ्वी से सोलर स्टॉर्म टकराने की आशंका है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इससे कुछ समय के लिए ब्लैकआउट + हो सकता है। आम लफ्जों में कहें, तो यह टेक ब्लैकआउट की स्थिति होगी। तमाम उपग्रह आधारित सेवाएं यानी मोबाइल सिग्नल, केबल नेटवर्क , जीपीएस नैविगेशन और सैटेलाइट आधारित तकनीक प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा रेडिएशन के खतरे की भी आशंका है।
एक्सप्रेस यूके की रिपोर्ट के मुताबिक सूर्य में एक कोरोनल होल खुलेगा। इसके कारण सूरज से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। इसमें कॉस्मिक कण भी मौजूद होंगे। स्पेश वेदर की एक रिपोर्ट में कहा गया, 'सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके कारण सूर्य के वातावरण से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा। नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर में गैस के इस तूफान को देखा जा सकता है।'
'आर्ट्स फॉर ऑल' और सोनालिका ग्रुप ने 'नेचर कनेक्ट' शीर्षक से इंटरैक्टिव नेचर आर्ट प्रॉजेक्ट और ऐग्जिबिशन का आयोजन किया। हंगेरियन इंटरनैशनल कल्चरल सेंटर में आयोजित इस 3 दिवसीय (27-29 सितंबर) एग्जिबिशन में देश के अलग-अलग हिस्से से आए कलाकारों के 8 आर्ट इंस्टलेशन शामिल किए गए। देखिए:
मिट्टी, बांस और कपड़े की मदद से अभिनव ने इस इंस्टलेशन को तैयार किया है। इसके जरिये उन्होंने भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट करने के लिए जिम्मेदार कॉर्पोरेट ऐग्रिकल्चर के गैरजिम्मेदाराना रवैये की तरफ ध्यान खींचने की कोशिश की है। इस इंस्टलेशन में स्थानीय बायॉड्रिग्रेडबल मटीरियल का उपयोग किया गया है। इस संकरे रास्ते से गुजरने पर विजिटर को जो असहजता महसूस होगी, उसके जरिये साइनस जैसी बीमारी और शरीर को होने वाली दूसरी तकलीफों की तरफ इशारा करने की कोशिश की गई है।
अनूप ने 2 पेड़ों के बीच सूती धागों की मदद से एक मकड़ी के जाले जैसा स्ट्रक्चर तैयार किया और इसके बीच बांबियों की तस्वीर लगाई। इसके जरिये उन्होंने इस तरफ ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की कि प्रकृति के छोटे-छोटे जीवों को इंसान किस कदर नजरअंदाज करता है।
बालगोपालन के स्कल्पचर इंस्टलेशन के जरिये मानव और प्रकृति के बीच संबंध को जानने-समझने की कोशिश की गई है। शहरों की दौड़ती-भागती जिंदगी के बीच यह प्रॉजेक्ट थोड़ा रुककर आराम से कुछ सोचने की बात करता है।
अंधाधुंध निर्माण का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस सवाल का जवाब देता यह इंस्टलेशन देविका स्वरूप ने तैयार किया है।
एक पुराने इंस्टलेशन को रिसाइकल करके पूजा बाहरी ने इस दुनिया और प्रकृति को हो रहे उस नुकसान की तरफ इशारा किया है जिसके लिए इंसान जिम्मेदार है।
आर्टिस्ट राहुल मोदक ने इनइस इंस्टलेशन के जरिये मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में बायॉडिग्रेडबल वेस्ट की अहमियत के साथ-साथ उसकी खूबसरती की तरफ लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की है।
इस इंस्टलेशन का पूरा नाम है- 'टु डू ऑर नॉट टु, टु राइज ऑर नॉट टु, टु फाल ऑर नॉट टु, टु ऐश ऑर नॉट टु...'। इसे शुभांगी त्यागी और हरिंदर ने तैयार किया है। फोम और गैस सिलिंडर की मदद से तैयार किए गए इस इंस्टलेशन के जरिये आने वाली पीढ़ियों के लिए हम जो भविष्य छोड़कर जा रहे हैं और उपभोक्तावाद की तरफ लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की गई।
औद्योगीकरण के प्रकृति पर खतरनाक प्रभाव को दर्शाता यह इंस्टलेशन सोमू देसाई ने तैयार किया है।
भारी नुकसान नहीं होगा
नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने कहा है कि जब यह तूफान आएगा तो उत्तर और दक्षिण में तेज रोशनी नजर आएगी। हालांकि नैशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर असोसिएशन ने इसे जी-1 या हल्का सौर तूफान + ही करार दिया है। असोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि जी-1 श्रेणी का जियोमैग्नेटिक तूफान रविवार या सोमवार को उस वक्त आ सकता है, जब सौर हवाएं चलेंगी। बता दें कि चुंबीय तूफान को सौर तूफान कहते हैं, जो सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है। ऐसा माना जाता है कि जी-5 श्रेणी का तूफान पृथ्वी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
सोलर स्टॉर्म को लेकर स्काईमेट के साइंटिस्ट डॉ. महेश पलावत ने चेताया कि कॉस्मिक पार्टिकल सूर्य से धरती पर पहुंचेंगे और इसके नतीजे काफी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जी-1 कैटिगरी में पावर ग्रिड पर सबसे अधिक असर होता है। माइग्रेटरी बर्ड्स पर भी गंभीर असर पड़ता है। इस आंधी का व्यापक असर यूएस और यूके में ज्यादा पड़ने की आशंका है।
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