इस दरगाह में जमीन से 2 इंच ऊपर तैरता है पत्थर, जानिए कहां है ये मजार

हमारे देश में ऐसे बहुत से सूफी संत हुए है जो अपने चमत्कारों से इतने प्रसिद्ध हुए की उनके चर्चे आज भी हर जुबान पर मशहूर है। ऐसे कई वाकिए भी है जिसे सुनकर आपके भी उड़ जांएगे होश जिंदगी में हर बात और हर एक चीज के पीछे कोई न कोई तर्क छुपा होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि पेड़ों पर लगे पत्ते हरे क्यों होते है।

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मौसम क्यों बदलता है आदि छोटी से छोटी बातों के पीछे भी तर्क है। इस हवा में तैरते हुए जादुई पत्थर का रहस्य आया सामने, जिसे सुनकर आपके भी उड़ जांएगे होश। लेकिन फिर भी हमारे आसपास ऐसे कई जगह मौजूद है जो सबी के लिए रहस्य का विषय है आधुनिक हो चुकी दुनिया के पास भी उस बात का कोई जवाब नही है।


ऐसा हमेशा देखा जाता है कि जिन बातों का जवाब देने में विज्ञान भी चुप रहता है। आज हम आपको एक ऐसे ही हैरान कर देने वाली मजार के बारे में बताएंगे जहां पर एक पत्थक बिना किसी सहारे के जमीन से 2 इंच ऊपर लटका हुआ है। आइए जानते है कहां है ये


चमत्कारी मजार... अजमेर में ख्वाजा जी की मजार
आपको बता दें कि अजमेर के हजरत ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन चिश्ती को भारत का महाराजा भी कहा जाता है। एक वाकिया तो इसी मजार से संबंधित है। वैसे तो कई चमत्कार यहां पर हुए हैं। आपको बता दें कि इनकी दरगाह में हर धर्म के लोग रोज आकर इनकी जियारत करते है। ये अपने आप में एक मिसाल है। यहां हवा में तैरता है एक पत्थर
वैसे तो पूरा राजस्थान ही ऐतिहासिक इमारतों से सजा हुआ है। लेकिन ख्वाजा के अजमेर में उनकी दरगाह से कुछ कदम की दूरी पर एक एक चट्टान है। इसी चट्टान में एक हैरान कर देने वाला नजारा आपको दिखेगा। दरअसल इस इस चट्टान पर एक पत्थर बिना किसी सहारे के हवा में 2 इंच की दूरी पर लटका हुआ है। वैज्ञानिकों ने किए की शोध


आपको बता दें कि इस बात से पर्दा उठाने के लिए और इसके बारे में जानने के लिए कई वैज्ञानिक यहां पर आए और अभी भी आते रहते है। लेकिन ऐसा क्यों है ये किसी ने पता नहीं लगा पाया। पत्थर से जुड़ी हैं कई कहानियां

आपको बता दें कि इस पत्थर से जुड़ी कई कहानियां है जो लोग सुनाते है। कुछ लोग कहते है कि इस पत्थर से ख्वाजा गरीब नवाज ने अपने एक फरियादी को बचाया था। लोग कहते है कि ये पत्थर बहुत ही तेजी के साथ ख्वाजा गरीब नवाज की तरफ बढ़ रहा था। ऐसे में ख्वाजा ने इस पत्थर को हवा में ही रोक दिया था। तब से लेकर आज तक ये पत्थर हवा में ही तैर रहा है। सच्चे मन से ख्वाजा को याद किया
कहते है कि वो फरियादी ख्वाजा गरीब नवाज के दर पर हमेशा आता था। उस दिन भी जब ये हादसा हुआ तो वो वापस जा रहा था। इस मुसीबत को देखकर उसने ख्वाजा गरीब नवाज को सच्चे मन से याद किया तो ख्वाजा गरीब नवाज उसको बचाने के लिए खुद आ गए। हर धर्म के लोग झुकाते है सिर
इस जगह की एक खाशियत है कि यहां हर धर्म के लोग मत्था टेकने जरूर आते है।

यहां पर तारागढ़ की चढ़ाई और ढ़ाई दिन का झोपड़ा भी बहुत प्रसिद्द है। आपको एक बार इस जीते जागते कुदरत के करिश्मे को जरूर देखना चाहिए।