क्या डायबिटीज के मरीज डायट सोडा पी सकते हैं?

Saturday, October 14 2017

क्या डायबिटीज के मरीज डायट सोडा पी सकते हैं?

डायबिटीज के मरीजों को अपने खानेपीने का बहुत ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। इतना ही नहीं आपको अपने कुछ पसंदीदा खाद्य पदार्थ और पेय को छोड़ देना पड़ सकता है। अगर आप फिजी ड्रिंक्स पसंद करते हैं,
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तो आपको पता होना चाहिए कि आप किस प्रकार का सोडा पी सकते हैं। अक्सर, विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि डायट सोडा सबसे बेहतर है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में सुरक्षित है?
ऐसा माना जाता है कि डायट सोडा डायबिटीज के लिए ठीक है। यह सबसे खराब नहीं है, लेकिन यह सबसे अच्छा भी नहीं है। पानी और कम मीठी चाय सबसे बेहतर विकल्प है।
इससे पहले की आप डायट सोडा पीना शुरू करें, आपको यह समझ लेना चाहिए कि यह डायबिटीज के मरीजों को कैसे प्रभावित कर सकता है।

1) इसमे कैलोरी नहीं होती


वजन कंट्रोल करना सभी के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन जब आपको डायबिटीज होता है, तो यह और भी महत्वपूर्ण है। अधिक वजन या मोटापे की वजह से जटिलताएं बढ़ सकती हैं। वजन भी शरीर के लिए इंसुलिन का उपयोग करना कठिन बनाता है।


2) डायट सोडा पी सकते हैं आप


डायट सोडा डायबिटीज के रोगियों के लिए अच्छा है क्योंकि इसमें कोई कैलोरी नहीं है। हालांकि इसमें कृत्रिम मिठास जैसे एस्पेरेटम, सैकरीन और नीटोम का इस्तेमाल किया जाता है। डायट सोडा में इस्तेमाल करने पर ये शुगर की जगह लेते हैं, जिससे इसमें कैलोरी की संख्या कम हो जाती है। कैलोरी में यह कमी वजन घटाने में योगदान दे सकती है। बेशक अच्छी तरह से भोजन करना और व्यायाम अभी भी महत्वपूर्ण हैं डायट सोडा सिर्फ एक कदम है।


3) ग्लूकोज मैनेजमेंट


डायबिटीज के मरीजों को ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। आखिरकार यह डायबिटीज को परिभाषित करता है। आपके रक्त में ग्लूकोज को नियंत्रित करना आपके आहार का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।


4) यह ब्‍लड में शुगर नहीं बढाता


डायबिटीज से पीड़ित एक व्यक्ति डायट सोडा पी सकता है क्योंकि यह ग्लाइसेमिक प्रतिक्रिया नहीं बदलता है। दूसरे शब्दों में, यह भोजन के बाद रक्त में ग्लूकोज नहीं बढ़ाता है। ये लाभ डायबिटीज से पीड़ित लोगों में भी सही।



5) अध्ययन क्‍या कहता है


उदाहरण के लिए, 2013 में आर्किविस लॉटिनोअमेरिकोनस डी न्यूट्रिकियन में एक अध्ययन ने देखा कि विभिन्न प्रकार के सोडा टाइप 2 डायबिटीज वा वयस्कों को कैसे प्रभावित करते हैं। दो समूहों को 8 घंटे के लिए उपवास करने के लिए कहा गया था। इसके बाद, एक समूह को एस्पेरेटम और ऐसेल्फैम से भरपूर डायट सोडा दिया गया था, जबकि अन्य को शुगर से भरपूर डायट सोडा दिया गया। इनके ब्लड ग्लूकोज को 10, 15 और 30 मिनट में मापा गया था।


6) क्‍या पाया शोधकर्ताओं ने


शोधकर्ताओं ने पाया कि डायट सोडा ने ग्लूकोज के स्तरों को नहीं बदला। इन निष्कर्षों के अनुसार, डायट सोडा डायबिटीज के रोगियों को सुरक्षित रूप से ब्लड ग्लूकोज का प्रबंधन कर सकता है।



7) ड्रिंक में नहीं होती कोई शुगर


इसके अलावा एडेड शुगर को आर्टिफीसियल शुगर से बदलना बड़ा अंतर आता है। ये शुगर असली शुगर की तुलना में बहुत अधिक मीठी होती है, जिसका मतलब है कि किसी पेय में कम इस्तेमाल होता है। सबसे अच्छी बात यह आपके मीठा खाने की लालसा को भी कम कर देगा और आपको संतुष्ट करेगा।


8) एनर्जी बढती है


डायट सोडा की कम कैलोरी सामग्री एक अच्छी बात है। दुर्भाग्य से, यह एक समस्या भी हो सकती है। मिठाई आपके शरीर को अधिक भोजन खाने के लिए प्रेरित करती है। यह आपके मस्तिष्क की प्रतिक्रिया का तरीका है। और जब आर्टिफीसियल स्वीटनर रेगुलर शुगर से अधिक मीठे होते हैं, तो आपकी लालसा बढ़ने की संभावना होती है है। यह अधिक कैलोरी खाने और पीने का कारण हो सकता है।
दी जर्नल डायबिटीज केयर इस संबंध को स्वीकार करती है। कृत्रिम मिठास के बिना पेय की तुलना में, कृत्रिम मिठास वाले पेय ऊर्जा को बढ़ाते हैं। कम कैलोरी का सेवन करने के लिए अधिक कैलोरी का सेवन किया जाता है। एक और मुद्दा यह है कि सोडा के साथ कुछ अलग चीजें खाई जाती हैं। इसमें फल और सब्जियां शामिल हैं। हालांकि, इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोडा के साथ मीठा और नमकीन स्नैक्स जैसी चीजेंबेहतर होती हैं।


9) हमेशा लेबल देख कर ही खरीदें डायट सोडा


नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, मोटापे से ग्रस्त जो व्यस्क डायट सोडा पीते हैं, वो नमकीन स्नैक्स में 131 कैलोरी और मिठाई स्नैक्स में 243 कैलोरी रोज़ खाते हैं। जबकि जो मोटे व्यस्क नॉर्मल सोडा पीते हैं, वे क्रमशः मिठाई और नमकीन की 107 और 213 कैलोरी खाते हैं। ध्यान रखें कि डायट सोडा में अन्य सामग्री की कैलोरी हो सकती है। इसलिए हमेशा इसका लेबल देखकर ही लें।


10) मेटाबोलिक सिंड्रोम जोखिम


जब डायट सोडा लेने से अधिक ऊर्जा मिलती है, तो मेटाबोलिक सिंड्रोम अधिक होने की संभावना है। इसमें स्ट्रोक, हृदय रोग और डायबिटीज की संभावना बढ़ जाती है। मेटाबोलिक सिंड्रोम में पांच कारक शामिल हैं:
एक बड़ी कमर, हाई फास्टिंग ब्लड शुगर, हाई ब्लड शुगर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल। आधिकारिक तौर पर मेटाबोलिक सिंड्रोम के लिए, आपको पाँच में से तीन की आवश्यकता होती है।
लेकिन अगर डायबिटीज पहले ही मौजूद है, तो यह एक बड़ी समस्या है। इससे मेटाबोलिक सिंड्रोम तीव्र हो जाएगा। जटिलताओं का खतरा बढ़ने से यह ग्लूकोज कंट्रोल को भी कठिन बना देता है।