चीनी सैनिकों को मिली भारतीय सैनिकों से बेहतर संवाद के लिए हिंदी सीखने की नसीहत Posted at: Nov 1 , 2017 by Dilersamachar 52 Share On: दिलेर समाचार, बीजिंग। जैसे नई दिल्ली, चीन सीमा पर तैनात अपने सैनिकों को मंदारिन भाषा सिखा रहा है, उसी तरह बीजिंग को भी अपने सैनिकों को हिंदी भाषा सिखानी चाहिए। इससे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के अधिकारियों का उनके भारतीय समकक्षों के साथ संवाद बेहतर होगा और बेवजह की गलतफहमियां नहीं होंगी। शंघाई अकादमी ऑफ सोशल साइंसेज इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल में रिसर्च फेलो हू जियांग ने अपने देश की सेना को यह सलाह दी है। गत सप्ताह गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-तिब्बत सीमा बल (आइटीबीपी) के जवानों और अफसरों की इसलिए सराहना की थी , क्योंकि उन्होंने संगठन के मूल प्रशिक्षण में मंदारिन भाषा शामिल की है। आइटीबीपी ने ऐसा इसलिए किया ताकि पीएलए के अधिकारियों से आमना-सामना होने पर संवाद में उन्हें मदद मिल सके। हू जिंयाग के हवाले से सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स लिखता है , डोकलाम विवाद के बाद से चीन को लेकर भारत की चिंता बढ़ी है, इसलिए उसने सैनिकों को मंदारिन भाषा सीखने का निर्देश दिया है, ताकि चीनी सैन्यकर्मियों के साथ वह संवाद कर सकें और व्यर्थ की गलतफहमियां ना पैदा होने पाएं।